Diwali Laxmi Puja Vidhi: दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा कैसे करें? जानें शुभ पूजन विधि

दिवाली लक्ष्मी पूजा विधि और माता लक्ष्मी पूजन

Diwali Laxmi Puja Vidhi के इस लेख में जानिए दीपावली के पावन अवसर पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने की पारंपरिक विधि। दीपावली की अमावस्या तिथि पर घर की साफ-सफाई, दीप प्रज्वलन और लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से मां लक्ष्मी की आराधना करके परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।

दीपावली की लक्ष्मी पूजा में पूजा स्थल की तैयारी से लेकर कलश स्थापना, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन, दीप अर्पण, नैवेद्य, मंत्र जाप और आरती तक कई चरण शामिल होते हैं। इस लेख में Diwali Laxmi Puja Vidhi, लक्ष्मी पूजा सामग्री, गणेश पूजन, कलश स्थापना और दीपावली पूजा के महत्वपूर्ण चरणों को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि आप अपनी पारिवारिक एवं क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार दीपावली पर विधिपूर्वक पूजा कर सकें।

दिवाली लक्ष्मी पूजा विधि

1. श्री लक्ष्मी जी का ध्यान

पूजन आरंभ करने से पहले माता लक्ष्मी का श्रद्धापूर्वक ध्यान करें। मन को शांत करके माता लक्ष्मी का स्मरण करते हुए निम्न मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

या सा पद्मसंस्था विपुल-कटी-तती पद्म-पत्राताक्षी,
गंभीरार्तव-नाभिः स्थान-भर-नमिता शुभ्रा-वस्तारिया।
या लक्ष्मीरदिव्य-रूपेरमणि-गण-खचितैः स्वपिता हेमा-कुंभैह,
सा नित्यं पद्म-हस्त मम वसातु गृहे सर्व-मंगल्या-युक्त:॥


2. माता लक्ष्मी का आवाहन

ध्यान के बाद माता लक्ष्मी को पूजा स्थल पर आमंत्रित करें। दोनों हथेलियों को जोड़कर और अंगूठों को भीतर की ओर मोड़कर आवाहन मुद्रा बनाते हुए नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

आगच्छा देव-देवशी! तेजोमयी महा-लक्ष्मी!
क्रियामनम् माया पूजाम, गृहण सुर-वंदिते!
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवी आवाहयमी ॥


3. पुष्पांजलि एवं आसन अर्पण

माता लक्ष्मी का आवाहन करने के बाद दोनों हाथों में पांच पुष्प लें और उन्हें माता की प्रतिमा के समक्ष अर्पित करें। इसके बाद मंत्र का जाप करते हुए उन्हें आसन समर्पित करें।

मंत्र:

नाना-रत्न-समायुक्तम, कर्ता-स्वर-विभुशीतम।
आसनम देव-देवेश! प्रीत्यार्थम प्रति-गृह्यताम्॥
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै आसनार्थे पंच-पुष्पाणी समरपयामी ॥


4. माता लक्ष्मी का स्वागत

आसन अर्पित करने के बाद हाथ जोड़कर माता लक्ष्मी का स्वागत करें।

मंत्र:

श्री लक्ष्मी-देवी! स्वागतम।


5. पाद्य अर्पण

माता लक्ष्मी का स्वागत करने के बाद उनके चरणों को धोने के लिए श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें और निम्न मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

पद्यम गृहण देवेशी, सर्व-क्षेम-समर्थे, भो!
भक्त समरपिताम देवी, महा-लक्ष्मी! नमोस्तु ते॥
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै पद्यम् नमः ॥


6. अर्घ्य समर्पण

पाद्य अर्पित करने के पश्चात माता लक्ष्मी को अर्घ्य दें। इसके लिए नीचे दिए गए मंत्र का उच्चारण करें।

मंत्र:

नमस्ते देव देवेशी! नमस्ते कमल-धारिणी!
नमस्ते श्री महा-लक्ष्मी, धनदा-देवी! अर्घ्यम गृह।
गंध-पुष्पक्षतार्युक्तम, फल-द्रव्य-समनवितम्॥
गृहण तोयामर्घ्यार्थन, परमेश्वरी वत्सले!
॥ श्री लक्ष्मी-देवयै अर्घ्यं स्वाहा ॥


7. जल स्नान

अर्घ्य देने के बाद माता लक्ष्मी को स्नान के लिए जल अर्पित करें और निम्न मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

गंगासरस्वतीरेवपयोशनिनर्मदजलैह।
स्नैपितसी माया देवी तथा शांतििम कुरुश्व मे॥
आदित्यवर्णे तपसोआधिजतो वनस्पतिस्तव वृक्षोथा बिलवाह।
तस्य फलानी तपस नुदंतु मयंतरायश्च बह्य अलक्ष्मीः।
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै जलासनं समरपयामी ॥


8. पंचामृत स्नान

अब दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत से माता लक्ष्मी का अभिषेक करें। इस दौरान निम्न मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

दधि मधु घृतशचैव पयश्च शरकाराय्युतम।
पंचामृतं समनितम स्नानार्थं प्रतिगृह्यतम॥
ॐ पंचानदयः सरस्वतीमापियंति शस्त्रोताः।
सरस्वती तू पंचधसोदेशेभवत सरित॥
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै पंचामृतसनं समरपयामी ॥


9. गंध स्नान

पंचामृत स्नान के बाद सुगंधित चंदन आदि से माता लक्ष्मी को गंध स्नान अर्पित करें।

मंत्र:

ॐ मलयाचलसम्भुतम चंदनागरुसम्भवं।
चंदनम देवदेवशी स्नानार्थम प्रतिगृह्यताम्॥
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै गन्धस्नानम् समरपयामी ॥


10. शुद्ध जल से स्नान

गंध स्नान के बाद माता लक्ष्मी को स्वच्छ जल से स्नान कराएं।

मंत्र:

मंदाकिनीस्तु यादवारी सर्वपापहरम शुभम।
तदिदं कल्पितं तुभ्यं स्नानार्थम प्रतिगृह्यताम्॥
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै शुद्धोदकसनं समरपयामी ॥


11. वस्त्र अर्पण

स्नान के पश्चात माता लक्ष्मी को नए वस्त्र या मौली अर्पित करें और मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

दिव्यम्बरम नूतनम् ही क्षौमं त्वतिमनोहरम।
दीयानामं माया देवी गृहण जगदंबिके॥
उपैतु मम देवासाखः कीर्तिश मनिना साहा।
प्रदर्भुतो सुरराष्ट्रस्मीन कीर्तिमृद्धि दादातु मे॥
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै वस्त्रं समरपयामी ॥


12. मधुपर्क अर्पण

अब माता लक्ष्मी को शहद और दूध से तैयार मधुपर्क अर्पित करें।

मंत्र:

ॐ कपिलम दधी कुन्देंदुधावलं मधुसमुतम।
स्वर्णपत्रस्थितम् देवी मधुपर्कम् गृहण भोही॥
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै मधुपर्कम् समरपयामी॥


13. आभूषण अर्पित करें

मधुपर्क के बाद माता लक्ष्मी को श्रद्धापूर्वक आभूषण अर्पित करें।

मंत्र:

रत्नाकंकदा वैदुर्यमुक्ताहारयुतानी चा।
सुप्रासन्ना मनसा दत्तानी स्विकुरुश्व मे॥
क्षुप्तिपपासमलं ज्येष्ठमलक्ष्मि नशायम्याहं।
अभ्युतिमासमृद्धिम च सर्वनिरुनुदा में ग्रहा॥
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै भूषणानी समरपयामी ॥


14. रक्त चंदन समर्पण

अब माता लक्ष्मी को लाल चंदन अर्पित करें और नीचे दिए मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

ॐ रक्तचंदनसंमिश्रम पारिजातसमुद्भवम्
माया दत्तम् गृहनशु चन्दनम गन्धसम्य्युतम॥
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै रक्तचंदनं समरपयामी॥


15. सिंदूर अर्पण

माता लक्ष्मी को सिंदूर अर्पित करते हुए निम्न मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

ॐ सिंधुराम रक्तवर्णश सिंदुरतिलकप्रिय।
भक्ति दत्तम माया देवी सिंधुराम प्रतिगृह्यतम॥
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै सिंधुराम समरपयामी॥


16. कुमकुम अर्पित करें

अब माता लक्ष्मी को कुमकुम अर्पित करें और अखंड सौभाग्य की कामना करें।

मंत्र:

ॐ कुमकुम कामदं दिव्यं कुमकुमं कामरूपिनम।
अखण्डकामसौभाग्यं कुमकुमं प्रतिगृह्यताम्॥
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै कुमकुम समरपयामी ॥


17. अबीर और गुलाल अर्पण

माता लक्ष्मी को शुभ अबीर-गुलाल अर्पित करें।

मंत्र:

अबिराश गुलाम चा चोवा-चंदनामेव चा।
॥ श्रृंगारार्थम माया दत्तम गृहण परमेश्वरी ॥
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै अबीरागुलाम समरपयामी ॥


18. सुगंधित द्रव्य अर्पित करें

अब माता लक्ष्मी को सुगंधित द्रव्य अर्पित करते हुए मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

ॐ तैलानी चा सुगंधिनी द्रव्यनी विविधानी चा।
माया दत्तानी लेपर्थम गृहण परमेश्वरी
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै सुगंधिता तैलम समरपयामी ॥


19. अक्षत अर्पण

अब माता लक्ष्मी को अखंड चावल अर्थात अक्षत अर्पित करें।

मंत्र:

अक्षतश्च सुरश्रेष्ठ कुमकुमक्तः सुशोभिताः।
माया निवेदिता भक्ति पुजारीम प्रतिगृह्यताम्॥
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै अक्षतं समरपयामी ॥


20. चंदन समर्पित करें

माता लक्ष्मी को चंदन अर्पित करते हुए निम्न मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

श्री-खंड-चंदनम दिव्यं, गंधादयम सुमनोहरम।
विलेपनम महा-लक्ष्मी! चंदनम प्रति-गृह्यताम्:
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै चंदनम समरपयामी ॥


21. पुष्प अर्पण

अब माता लक्ष्मी को ऋतु के अनुसार उपलब्ध पुष्प अर्पित करें।

मंत्र:

यथा-प्रपता-ऋतु-पुष्पैह, विल्व-तुलसी-दलाइश्च!
पुजायामी महा-लक्ष्मी! प्रसाद मे सुरेश्वरी!
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै पुष्पम समरपयामी ॥


22. अंग पूजा

अब माता लक्ष्मी के विभिन्न अंगों की पूजा करें। बाएं हाथ में गंध, अक्षत और पुष्प लेकर दाहिने हाथ से उन्हें माता लक्ष्मी की प्रतिमा के समीप अर्पित करें।

मंत्र:

ॐ चपलायै नमः पड़ौ पुजायामी।
ॐ चंचलायै नमः जनुनी पुजायामी।
ॐ कमलयै नमः कटिम पुजायामी।
ॐ कात्यायन्याय नमः नाभिम पुजायामी।
ॐ जगन्मात्रै नमः जथाराम पूजामी।
ॐ विश्व-वल्लभयै नमः वक्ष-स्थलं पूजायामी।
ॐ कमला-वासिनयै नमः हस्तौ पुजायामी।
ॐ कमला-पत्राक्षयै नमः नेत्र-त्रयं पूजामी।
ॐ श्रीयै नमः शिरः पुजायामी।


23. अष्ट सिद्धि पूजन

अब माता लक्ष्मी के समीप अष्ट सिद्धियों का पूजन करें। गंध, अक्षत और पुष्प अर्पित करते हुए निम्न मंत्रों का जाप करें।

मंत्र:

ॐ अनिम्ने नमः। ॐ महिम्ने नमः।
ॐ गरिमने नमः। ॐ लघिम्ने नमः।
ॐ प्रपत्यै नमः। ॐ प्रकाशमयै नमः।
ॐ इशितायै नमः। ॐ वशितायै नमः।


24. अष्ट लक्ष्मी पूजन

अष्ट सिद्धि पूजन के बाद माता लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों का पूजन करें। अक्षत, चंदन और पुष्प अर्पित करते हुए मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

ॐ आध्या-लक्ष्मयै नमः। ॐ विद्या-लक्ष्मयै नमः।
ॐ सौभाग्य-लक्ष्मयै नमः। ॐ अमृत-लक्ष्मयै नमः।
ॐ कमलाक्षयै नमः। ॐ सत्य-लक्ष्मयै नमः।
ॐ भोग-लक्ष्मयै नमः। ॐ योग-लक्ष्मयै नमः।


25. धूप अर्पण

अब माता लक्ष्मी को धूप अर्पित करें और मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

वनस्पति-रसोद्भूतो गंधाध्याय सुमनोहरः।
अग्रेयः सर्व-देवनां, धूपोयं प्रति-गृह्यताम्।
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै धूपं समरपयामी ॥


26. दीप प्रज्वलित करें

धूप के बाद माता लक्ष्मी के समक्ष दीप अर्पित करें।

मंत्र:

सज्यम वर्ति-संयुक्तम चा, वाहनिना योजितम माया,
दीपम गृहन देवेशी! त्रैलोक्य-तिमिरपहं।
भक्त दीपं प्रयाच्छामि, श्री लक्ष्मयै परतपरयै।
त्रि माम निर्यद घोरद, दीपोयम प्रति-गृह्यताम्॥
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै दीपं समरपयामी ॥


27. नैवेद्य अर्पण

अब माता लक्ष्मी को मिठाई एवं अन्य नैवेद्य अर्पित करें और मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

शारकारा-खंडा-खदानी, दधी-क्षीरा-घृतानी चा।
आहरो भाष्य-भोज्यम चा, नैवेध्यां प्रति-गृह्यतां।
मैं यतमशताः श्री लक्ष्मयै-देवयै नैवेध्यां समरपयामी
ॐ प्रणय स्वाहा। Om अपानय स्वाहा।
ॐ समान्य स्वाहा। ओम उदयनय स्वाहा।
ॐ व्यन्या स्वाहा॥


28. आचमन एवं जल समर्पण

नैवेद्य के बाद माता लक्ष्मी को आचमन के लिए जल अर्पित करें।

मंत्र:

ततः पनियाम समरपयामी इति उत्तरपोशनम।
हस्त-प्रक्षालनं समरपयामी। मुख-प्रकाशनम।
करोद्वर्तनार्थे चंदनम समरपयामी।


29. ताम्बूल अर्पण

अब माता लक्ष्मी को ताम्बूल अर्थात सुपारी युक्त पान अर्पित करें।

मंत्र:

पूगी-फलम महा-दिव्याम, नागा-वल्ली-दलैरियुतम।
कर्पुरैला-समायुक्तम, तंबूलम प्रति-गृह्यताम्।
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै मुख-वसारथम पूगी-फलम-युक्तम तंबूलम समरपयामी ॥


30. दक्षिणा अर्पित करें

पूजन के अगले चरण में माता लक्ष्मी को श्रद्धानुसार दक्षिणा अर्पित करें।

मंत्र:

हिरण्य-गर्भ-गर्भस्थम, हेमा-वीजम विभावो।
अनंत-पुण्य-फलादमता शांतििम प्रयाच्छा मे॥
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै सुवर्णा-पुष्पा-दक्षिणां समरपयामी ॥


31. प्रदक्षिणा

अब माता लक्ष्मी की श्रद्धापूर्वक प्रदक्षिणा करें और नीचे दिए मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

यानी यानी चा पापनी, जनमंतर-कृतिनी चा।
तानी तानी विनशयंती, प्रदक्षिणं पदे पद॥
अन्यथा शरणं नास्ति, त्वमेव शरणं देवी!
तस्मात करुण्य-भवन, क्षमस्व परमेश्वरी
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै प्रदक्षिणं समरपयामी ॥


32. वंदना एवं पुष्पांजलि

अब माता लक्ष्मी को प्रणाम करते हुए पुष्पांजलि अर्पित करें और अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें।

मंत्र:

कर-कृतं वा कयाजम कर्मजं वा,
श्रवण-नयनजं वा मनसम वापरधाम।
विदितमविदितं वा, सर्वमेतत क्षमस्व,
जय जय करुणाबोधे, श्री महा-लक्ष्मी त्राहि।
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै मंत्र-पुष्पांजलि समरपयामी ॥


33. साष्टांग प्रणाम

अब माता लक्ष्मी के समक्ष साष्टांग प्रणाम करें और निम्न मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

ओम भवानी! त्वं महा-लक्ष्मीः सर्व-काम-प्रदयिनी।
प्रसन्ना संतोष भव देवी! नमोस्तु ते।
॥ मैं अनेना पूजनेना श्री लक्ष्मी-देवी प्रीयतां, नमो नमः ॥


34. क्षमा प्रार्थना

पूजा के अंत में माता लक्ष्मी से ज्ञात-अज्ञात भूलों के लिए क्षमा मांगें। श्रद्धा से निम्न मंत्र का जाप करके पूजन संपन्न करें।

मंत्र:

आवाहनं न जन्मी, न जन्मी विसर्जन।
पूजा-कर्म ना जन्मी, क्षमस्व परमेश्वरी॥
मंत्र-हीनम क्रिया-हीनम, भक्ति हीनम सुरेश्वरी!
माया यात-पूजितम देवी! परिपूर्णम तदस्तु मे॥
अनेना यथा-मिलिटोपाचार-द्रव्यै कृत-पूजनें श्री लक्ष्मी-देवी प्रीयताम
॥ मैं श्री लक्ष्मी-देवयै अर्पणमस्तु ॥

Also Read

Scroll to Top