Karva Chauth Pujan Vidhi: करवा चौथ पर कैसे करें पूजा? जानें करवा माता, गणेश जी और चंद्रमा पूजन की संपूर्ण विधि

करवा चौथ पूजन विधि में करवा माता और चंद्रमा की पूजा

Karva Chauth Pujan Vidhi के इस लेख में जानिए करवा चौथ के दिन पूजा की तैयारी से लेकर चंद्रमा को अर्घ्य देने तक की संपूर्ण पारंपरिक विधि। करवा चौथ विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला व्रत माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की मंगलकामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को करवा माता, भगवान गणेश तथा चंद्रदेव की पूजा करती हैं।

करवा चौथ की पूजा में करवा, रोली, अक्षत, दीपक, धूप, पुष्प, मिठाई और अन्य श्रृंगार सामग्री का विशेष रूप से उपयोग किया जाता है। व्रत कथा सुनने के बाद चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है और इसके बाद व्रत खोलने की परंपरा है। इस लेख में Karva Chauth Puja Vidhi, पूजा सामग्री, करवा माता की पूजा, व्रत कथा और चंद्रमा पूजन से जुड़ी जानकारी सरल और क्रमबद्ध तरीके से दी गई है, ताकि आप अपनी पारिवारिक एवं क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार करवा चौथ का पूजन कर सकें।

करवा चौथ पूजन विधि | Karva Chauth Pujan Vidhi

करवा चौथ के दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। पूजा के दौरान करवा माता, भगवान गणेश और माता पार्वती का पूजन करने की परंपरा है। नीचे करवा चौथ की पूजा विधि को सरल और क्रमबद्ध रूप में बताया गया है।

करवा चौथ की पूजा विधि

1. व्रत का संकल्प लें

करवा चौथ के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लेते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें—

मंत्र:
“मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।”

2. निर्जला व्रत रखें

संकल्प लेने के बाद पूरे दिन करवा चौथ का निर्जला व्रत रखने की परंपरा है। व्रत के दौरान अपनी धार्मिक एवं पारिवारिक परंपरा का पालन करें।

3. भोग तैयार करें

पूजा के लिए घर पर अठावरी, यानी आठ पूरियों से तैयार किया जाने वाला प्रसाद, हलवा, खीर या अपनी परंपरा के अनुसार अन्य पकवान बनाएं।

4. माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाएं

पूजा के लिए पीली मिट्टी से माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा तैयार करें। इन्हें श्रद्धापूर्वक पूजा स्थल पर रखें।

5. प्रतिमाओं की स्थापना करें

लकड़ी की चौकी या पाटे को स्वच्छ करके उस पर दोनों प्रतिमाओं को स्थापित करें। इसके बाद पूजा की तैयारी पूरी करें।

6. पूजन सामग्री अर्पित करें

माता पार्वती और भगवान गणेश को जल, मेहंदी, सिंदूर आदि पूजा सामग्री श्रद्धानुसार अर्पित करें।

7. करवे की पूजा करें

अब एक करवा लेकर उस पर रोली की सहायता से स्वस्तिक बनाएं। करवे को पूजा की चौकी पर उचित स्थान पर रखें।

8. करवे में सामग्री भरें

स्वस्तिक बनाए गए करवे को गेहूं या शक्कर से भरकर पूजा में रखें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक करवा माता का स्मरण करें।

9. पति की दीर्घायु की प्रार्थना करें

पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए इस मंत्र का जाप करें—

मंत्र:
“ॐ नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥”

10. करवा चौथ की कथा सुनें

करवे पर रोली से 13 बिंदियां लगाएं। इसके बाद चावल और गेहूं के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की व्रत कथा पढ़ें या श्रद्धापूर्वक उसका श्रवण करें।

11. बड़ों का आशीर्वाद लें

व्रत कथा पूरी होने के बाद घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें। इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार करवा और बय्या अर्पित करें।

12. पूजा के दाने सुरक्षित रखें

कथा के समय हाथ में रखे गए 13 चावल और गेहूं के दानों को अलग करके सुरक्षित रख लें। इनका उपयोग बाद में चंद्रमा को अर्घ्य देने में किया जाता है।

13. चंद्रमा को अर्घ्य दें

रात्रि में चंद्रोदय होने के बाद पूजा की तैयारी करें। सुरक्षित रखे गए 13 दानों के साथ चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करें।

14. परिवार के मंगल की कामना करें

चंद्रमा को अर्घ्य देते समय पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।

15. पति के हाथ से व्रत खोलें

चंद्रमा की पूजा पूरी करने के बाद पति को प्रणाम करके उनका आशीर्वाद लें। इसके बाद पति के हाथ से जल ग्रहण करके करवा चौथ का व्रत खोलने की परंपरा है।

इस तरह पूरा करें करवा चौथ का व्रत

इस प्रकार करवा माता, भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा, व्रत कथा, चंद्रमा को अर्घ्य और पति के हाथ से जल ग्रहण करने के बाद करवा चौथ का व्रत पूर्ण किया जाता है। पूजा की विधि और परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों एवं परिवारों में कुछ भिन्न हो सकती हैं, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजन करना उचित है।

॥ करवा माता की जय ॥

Also Read

Scroll to Top