Chhath Puja Vidhi: छठ पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री और सूर्य देव को अर्घ्य देने का सही तरीका

छठ पूजा विधि और सूर्य देव को अर्घ्य देने की पूजा

छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित एक महत्वपूर्ण लोकपर्व है, जिसमें श्रद्धा, संयम और पवित्रता के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। इस पर्व में व्रती विशेष नियमों का पालन करते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं। इस लेख में Chhath Puja Vidhi के अंतर्गत पूजा की तैयारी, आवश्यक सामग्री, प्रसाद, सूर्य देव को अर्घ्य देने की विधि और पूजा के प्रमुख चरणों की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।

यदि आप पहली बार छठ पूजा कर रहे हैं या पारंपरिक विधि को क्रमवार समझना चाहते हैं, तो यहां दी गई जानकारी आपके लिए उपयोगी हो सकती है। पूजा की विधि और परंपराएं क्षेत्र एवं परिवार की मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने स्थानीय रीति-रिवाजों का भी ध्यान रखें।

छठ पूजा सामग्री

छठ पूजा के लिए पहले से सभी आवश्यक पूजन सामग्री तैयार कर लें। पूजा में सामान्य रूप से निम्न सामग्री का उपयोग किया जाता है:

  • दूध
  • धूप
  • गुड़
  • जल
  • पूजा की थाली
  • लोटा
  • गिलास
  • चावल
  • सिंदूर
  • दीपक
  • नए वस्त्र
  • बांस की दो टोकरियां
  • पानी वाला नारियल
  • पत्तों सहित गन्ना या बांस
  • अदरक का हरा पौधा
  • धूपबत्ती या अगरबत्ती
  • नाशपाती या शकरकंद
  • हल्दी
  • कुमकुम
  • चंदन
  • सुथनी
  • पान
  • सुपारी

छठ पूजा विधि | Chhath Puja Vidhi

छठ पर्व के दौरान पूजा और व्रत की प्रक्रिया श्रद्धा एवं पारंपरिक नियमों के अनुसार पूरी की जाती है। पूजा करते समय निम्न चरणों का पालन किया जा सकता है:

1. व्रत का संकल्प लें

छठ पूजा के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक छठ व्रत का संकल्प लें।

संकल्प के समय निम्न मंत्र का उच्चारण करें:

ॐ अद्य अमुक गोत्रो अमुक नामाहं मम सर्व पापनक्षयपूर्वक
शरीरारोग्यार्थ श्री सूर्यनारायणदेवप्रसन्नार्थ श्री सूर्यषष्ठीव्रत करिष्ये।

2. व्रत का पालन करें

छठ पूजा में व्रती अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत के नियमों का पालन करते हैं। निर्जला व्रत रखने वाले व्रती पूरे दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखते हैं।

3. संध्या अर्घ्य की तैयारी करें

शाम के समय नदी, तालाब या निर्धारित पूजा घाट पर जाएं। वहां स्नान आदि करके सूर्य देव को संध्या अर्घ्य देने की तैयारी करें।

4. पूजा की टोकरी तैयार करें

अर्घ्य के लिए बांस की टोकरी या पीतल के सूप का उपयोग किया जाता है। इसमें फल, फूल, सिंदूर और अन्य आवश्यक पूजन सामग्री को श्रद्धापूर्वक सजाएं।

5. प्रसाद रखें

पूजा की टोकरी या सूप में पारंपरिक प्रसाद जैसे ठेकुआ, मालपुआ और खीर भी रखें। इसके साथ पूजा में उपयोग होने वाले फल एवं अन्य भोग सामग्री को व्यवस्थित करें।

6. सूर्य देव को अर्घ्य दें

संध्या के समय जब सूर्य देव अस्त होने लगें, तब पूजा सामग्री से सजे सूप या टोकरी के साथ जल अर्पित करें। सूर्य देव को अर्घ्य देते समय श्रद्धापूर्वक निम्न मंत्र का जाप करें:

ऊं एहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पया मां भवत्या गृहाणार्ध्य नमोऽस्तुते॥

इस प्रकार श्रद्धा और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार संध्या अर्घ्य की पूजा संपन्न करें। पूजा की विधि और व्रत के नियम परिवार एवं क्षेत्र की परंपरा के अनुसार कुछ अलग हो सकते हैं।

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