Shitala Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi & English | शीतला माता की आरती

Shitala Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi – जय शीतला माता

शीतला माता की आरती माता शीतला को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। भारतीय लोक और धार्मिक परंपराओं में माता शीतला की पूजा विशेष श्रद्धा के साथ की जाती है। उनकी आराधना शीतलता, स्वच्छता, संयम और परिवार के मंगल की प्रार्थना से जुड़ी हुई है।

इस लेख में आपको Shitala Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi & English, शीतला माता की आरती के संपूर्ण बोल, आरती का भक्तिमय भाव, शीतला माता की पूजा से जुड़ी सामान्य जानकारी और महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं के बारे में सरल भाषा में जानकारी मिलेगी।

शीतला माता की आरती का भक्तिमय महत्व

माता शीतला की आराधना भारत की विभिन्न लोक और धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान रखती है। माता को श्रद्धा के साथ शीतलता और मंगल के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाता है।

आरती के माध्यम से भक्त माता के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करते हैं तथा परिवार में शांति, सद्भाव और मंगल की प्रार्थना करते हैं।

भक्ति परंपरा में आरती का उद्देश्य केवल शब्दों का पाठ करना नहीं, बल्कि श्रद्धा, विनम्रता और एकाग्रता के साथ अपने आराध्य का स्मरण करना भी है।

Shitala Mata Ki Aarti कब पढ़ें?

भक्त अपनी पारिवारिक, स्थानीय और धार्मिक परंपरा के अनुसार शीतला माता की आरती पढ़ या गा सकते हैं।

सामान्य रूप से आरती इन अवसरों पर की जा सकती है:

  • शीतला माता की पूजा के समय
  • शीतला अष्टमी के अवसर पर
  • देवी पूजा के दौरान
  • पारिवारिक धार्मिक अवसरों पर
  • अन्य स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार

पूजा की विधि, प्रसाद और आरती का क्रम भारत के अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकता है।

शीतला माता की पूजा और सांस्कृतिक परंपरा

शीतला माता की पूजा भारत की विविध लोक परंपराओं का हिस्सा है। कई क्षेत्रों में शीतला अष्टमी से संबंधित विशेष पूजा और पारंपरिक रीति-रिवाज प्रचलित हैं।

वाराणसी की आधिकारिक जिला वेबसाइट पर शीतला माता से जुड़ी परंपराओं में शीतला अष्टमी और बसोड़ा पूजा का उल्लेख मिलता है, जिसमें कुछ क्षेत्रों में ठंडे या पहले से तैयार किए गए भोजन अर्पित करने की स्थानीय परंपरा देखी जाती है।

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में माता शीतला से जुड़ी लोककथाएँ, पूजा-पद्धतियाँ और सांस्कृतिक परंपराएँ अलग-अलग रूपों में मिलती हैं। पश्चिम बंगाल की लोक परंपरा में “Shasthi Mangal and Shitala Mangal” जैसी पारंपरिक लोक गायन परंपराओं को भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत से संबंधित सूची में दर्ज किया गया है।

शीतला माता की आरती हिंदी में

जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता।
आदि ज्योति महारानी,
सब फल की दाता॥

ॐ जय शीतला माता॥

रतन सिंहासन शोभित,
श्वेत छत्र भाता।
ऋद्धि-सिद्धि चँवर ढुलावें,
जगमग छवि छाता॥

ॐ जय शीतला माता॥

विष्णु सेवत ठाढ़े,
सेवें शिव धाता।
वेद पुराण वरणत,
पार नहीं पाता॥

ॐ जय शीतला माता॥

इंद्र मृदंग बजावत,
चंद्र वीणा हाथा।
सूरज ताल बजावै,
नारद मुनि गाता॥

ॐ जय शीतला माता॥

घंटा शंख शहनाई,
बाजै मन भाता।
करै भक्तजन आरती,
लखि-लखि हर्षाता॥

ॐ जय शीतला माता॥

ब्रह्म रूप वरदानी,
तू ही तीन काल ज्ञाता।
भक्तन को सुख देती,
मातु, पिता, भ्राता॥

ॐ जय शीतला माता॥

जो जन ध्यान लगावे,
प्रेम शक्ति पाता।
सकल मनोरथ पावे,
भवनिधि तर जाता॥

ॐ जय शीतला माता॥

शीतल करती जननी,
तू ही है जग त्राता।
सबके जीवन में मंगल,
तू सबकी माता॥

ॐ जय शीतला माता॥

दास नारायण कर जोरी,
विनती करे माता।
भक्ति अपनी दीजै,
और न कुछ माता॥

जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता।
आदि ज्योति महारानी,
सब फल की दाता॥

ॐ जय शीतला माता॥

Shitala Mata Ki Aarti English Lyrics

Jai Shitala Mata,
Maiya Jai Shitala Mata.
Aadi Jyoti Maharani,
Sab Phal Ki Data॥

Om Jai Shitala Mata॥

Ratan Singhasan Shobhit,
Shwet Chhatra Bhata.
Riddhi-Siddhi Chamar Dhulaven,
Jagmag Chhavi Chhata॥

Om Jai Shitala Mata॥

Vishnu Sevat Thadhe,
Seve Shiv Dhata.
Ved Puran Varnat,
Paar Nahin Pata॥

Om Jai Shitala Mata॥

Indra Mridang Bajavat,
Chandra Veena Hatha.
Suraj Taal Bajavai,
Narad Muni Gata॥

Om Jai Shitala Mata॥

Ghanta Shankh Shehnai,
Bajai Man Bhata.
Karai Bhaktjan Aarti,
Lakhi-Lakhi Harshata॥

Om Jai Shitala Mata॥

Brahm Roop Vardani,
Tu Hi Teen Kaal Gyata.
Bhaktan Ko Sukh Deti,
Matu, Pita, Bhrata॥

Om Jai Shitala Mata॥

Jo Jan Dhyan Lagave,
Prem Shakti Pata.
Sakal Manorath Pave,
Bhavnidhi Tar Jata॥

Om Jai Shitala Mata॥

Shital Karti Janani,
Tu Hi Hai Jag Trata.
Sabke Jeevan Mein Mangal,
Tu Sabki Mata॥

Om Jai Shitala Mata॥

Das Narayan Kar Jori,
Vinti Kare Mata.
Bhakti Apni Deeje,
Aur Na Kuch Mata॥

Jai Shitala Mata,
Maiya Jai Shitala Mata.
Aadi Jyoti Maharani,
Sab Phal Ki Data॥

Om Jai Shitala Mata॥

आरती के शब्दों का भक्तिमय भाव

माता के दिव्य स्वरूप का स्मरण

आरती में माता के दिव्य स्वरूप, रत्न सिंहासन, श्वेत छत्र और भक्तों द्वारा की जाने वाली आराधना का वर्णन मिलता है। ये भाव भक्तों को श्रद्धा और एकाग्रता के साथ माता का स्मरण करने के लिए प्रेरित करते हैं।

शांति और शीतलता का भाव

माता शीतला की भक्ति परंपरा में शीतलता और शांति का विशेष भाव जुड़ा हुआ है। भक्त आरती के माध्यम से अपने जीवन और परिवार में शांति, धैर्य और सद्भाव की प्रार्थना कर सकते हैं।

भक्ति और समर्पण

आरती के अंतिम भावों में भक्त माता के चरणों में अपनी श्रद्धा और भक्ति अर्पित करता है। यह भक्ति परंपरा में विनम्रता और समर्पण के महत्व को दर्शाता है।

शीतला माता की पूजा में आरती का स्थान

आरती भारतीय पूजा परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग है। दीपक या कपूर के माध्यम से भक्त अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

शीतला माता की पूजा में आरती का क्रम परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए किसी विशेष व्रत या पूजा-विधि का पालन करते समय अपनी पारिवारिक और स्थानीय परंपरा को प्राथमिकता देना उचित है।

शीतला माता की आरती के बाद क्या करें?

आरती पूर्ण होने के बाद माता को श्रद्धापूर्वक प्रणाम किया जा सकता है।

भक्त अपने परिवार में शांति, सद्भाव, संयम और सकारात्मकता बनाए रखने की प्रार्थना कर सकते हैं। इसके बाद अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा पूर्ण की जा सकती है।

आप सरल भाव से इस प्रकार प्रार्थना कर सकते हैं:

हे माता शीतला, हमारे जीवन और परिवार में शांति, सद्भाव और सकारात्मकता बनाए रखें। हमें स्वच्छता, संयम, सेवा और अच्छे विचारों के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दें।

Shitala Mata Ki Aarti से जुड़े सामान्य प्रश्न

शीतला माता की आरती किसे समर्पित है?

यह आरती माता शीतला को समर्पित है।

शीतला माता की आरती कब पढ़ी जा सकती है?

भक्त अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार शीतला माता की पूजा, शीतला अष्टमी और अन्य धार्मिक अवसरों पर इस आरती का पाठ या गायन कर सकते हैं।

क्या शीतला माता की पूजा की विधि सभी जगह एक जैसी होती है?

नहीं। पूजा, प्रसाद और आरती की विधि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

क्या शीतला माता की आरती घर पर की जा सकती है?

हाँ, भक्त अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार घर पर श्रद्धा के साथ माता की पूजा और आरती कर सकते हैं।

शीतला अष्टमी से कौन-सी परंपराएँ जुड़ी हैं?

विभिन्न क्षेत्रों में शीतला अष्टमी से अलग-अलग स्थानीय परंपराएँ जुड़ी हैं। कुछ स्थानों पर बसोड़ा पूजा और पहले से तैयार किए गए भोजन से संबंधित परंपराएँ भी प्रचलित हैं।

निष्कर्ष

Shitala Mata Ki Aarti माता शीतला के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने वाली भक्तिमय आरती है। इसके माध्यम से भक्त माता का स्मरण करते हुए जीवन और परिवार में शांति, सद्भाव और मंगल की प्रार्थना करते हैं।

शीतला माता की पूजा और आरती की परंपराएँ अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं। इसलिए भक्तों को अपनी पारिवारिक और स्थानीय धार्मिक परंपरा का सम्मान करते हुए श्रद्धा के साथ आरती का पाठ या गायन करना चाहिए।

॥ जय शीतला माता ॥
॥ माता रानी की जय ॥
॥ जय माता दी ॥

आधिकारिक जानकारी और संदर्भ

शीतला माता से जुड़ी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के बारे में अतिरिक्त जानकारी के लिए पाठक वाराणसी की आधिकारिक पर्यटन वेबसाइट पर शीतला माता मंदिर की जानकारी देख सकते हैं।

भारतीय लोक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी पारंपरिक कलाओं और परंपराओं के लिए Sangeet Natak Akademi की Intangible Cultural Heritage जानकारी भी उपयोगी संदर्भ है।

धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों की व्यापक जानकारी के लिए पाठक Ministry of Culture – Indian Culture का आधिकारिक मंच भी देख सकते हैं।

Also Read

Maa Laxmi Ji Ki Aarti | लक्ष्मी जी की आरती

माँ लक्ष्मी की आराधना से संबंधित प्रसिद्ध आरती के संपूर्ण बोल पढ़ें।

Shri Vindheshwari Chalisa | श्री विन्धेश्वरी चालीसा

माँ विन्ध्यवासिनी की स्तुति और भक्तिमय चालीसा पाठ पढ़ें।

Maa Durga Amritwani | माँ दुर्गा अमृतवाणी

माँ दुर्गा की महिमा और भक्ति से संबंधित अमृतवाणी का पाठ पढ़ें।

Om Jai Jagdish Hare – जगदीश जी की आरती

सनातन परंपरा की प्रसिद्ध आरतियों में से एक आरती के संपूर्ण बोल पढ़ें।

॥ जय माता दी ॥

Scroll to Top