Kuber Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi | कुबेर जी की आरती – ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे

Shri Kuber Maharaj Ki Aarti Lyrics in Hindi – ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे

भगवान कुबेर को समर्पित Kuber Ji Ki Aarti एक भक्तिमय आरती है, जिसमें भगवान कुबेर के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और समृद्धि की मंगलकामना व्यक्त की जाती है। हिंदू धार्मिक और पौराणिक परंपराओं में कुबेर देव को धनाध्यक्ष तथा यक्षों के अधिपति के रूप में स्मरण किया जाता है।

इस लेख में आपको Kuber Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi, श्री कुबेर महाराज की आरती के संपूर्ण बोल, आरती का भक्तिमय भाव, भगवान कुबेर का धार्मिक महत्व और पूजा से जुड़ी सामान्य जानकारी सरल भाषा में मिलेगी।

धार्मिक परंपराओं में भगवान कुबेर की आराधना विशेष रूप से धनतेरस, दीपावली और लक्ष्मी-कुबेर पूजा जैसे अवसरों से भी जुड़ी हुई है।

भगवान कुबेर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

भारतीय धार्मिक और पौराणिक परंपराओं में भगवान कुबेर को धन, ऐश्वर्य और समृद्धि से जुड़े देवता के रूप में जाना जाता है। उन्हें यक्षों के अधिपति तथा उत्तर दिशा के संरक्षक के रूप में भी स्मरण किया जाता है।

भारत की प्राचीन कला और सांस्कृतिक विरासत में भी कुबेर की प्रतिमाएँ और चित्रण मिलते हैं। विभिन्न ऐतिहासिक कालों की मूर्तियाँ भारतीय धार्मिक कला में भगवान कुबेर की सांस्कृतिक उपस्थिति को दर्शाती हैं।

कुबेर जी की आराधना का भाव केवल भौतिक संपत्ति तक सीमित नहीं माना जाता। भारतीय धार्मिक परंपराओं में धन के साथ सद्बुद्धि, संतोष, दान, सेवा और संसाधनों के उचित उपयोग को भी महत्वपूर्ण जीवन-मूल्यों के रूप में देखा जाता है।

Kuber Ji Ki Aarti कब पढ़ें?

भक्त अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान कुबेर की आरती कर सकते हैं।

सामान्य रूप से कुबेर जी की आरती निम्न अवसरों पर पढ़ी या गाई जा सकती है:

  • दैनिक पूजा के समय
  • धनतेरस के अवसर पर
  • दीपावली और लक्ष्मी-कुबेर पूजा के दौरान
  • किसी शुभ धार्मिक अवसर पर
  • घर में होने वाली विशेष पूजा के समय

पूजा की विधि, समय और क्रम परिवार, क्षेत्र और धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

श्री कुबेर महाराज की आरती

ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे,
स्वामी जय यक्ष, जय यक्ष कुबेर हरे।
शरण पड़े भक्तों के,
भंडार कुबेर भरे॥

॥ ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे…॥

शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,
स्वामी भक्त कुबेर बड़े।
दैत्य दानव मानव से,
कई-कई युद्ध लड़े॥

॥ ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे…॥

स्वर्ण सिंहासन बैठे,
सिर पर छत्र फिरे,
स्वामी सिर पर छत्र फिरे।
योगिनी मंगल गावैं,
सब जय-जयकार करें॥

॥ ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे…॥

गदा त्रिशूल हाथ में,
शस्त्र बहुत धरे,
स्वामी शस्त्र बहुत धरे।
दुःख भय संकट मोचन,
धनुष टंकार करें॥

॥ ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे…॥

भाँति-भाँति के व्यंजन बहुत बने,
स्वामी व्यंजन बहुत बने।
मोहन भोग लगावैं,
साथ में उड़द चने॥

॥ ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे…॥

बल, बुद्धि, विद्या दाता,
हम तेरी शरण पड़े,
स्वामी हम तेरी शरण पड़े।
अपने भक्त जनों के,
सारे काम सँवारे॥

॥ ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे…॥

मुकुट मणि की शोभा,
मोतीयन हार गले,
स्वामी मोतीयन हार गले।
अगर कपूर की बाती,
घी की ज्योत जले॥

॥ ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे…॥

यक्ष कुबेर जी की आरती,
जो कोई नर गावे,
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत प्रेमपाल स्वामी,
मनवांछित फल पावे॥

॥ ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे…॥

Kuber Ji Ki Aarti का भक्तिमय भाव

श्रद्धा और समर्पण

आरती के माध्यम से भक्त भगवान कुबेर के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करता है। भक्ति परंपरा में आरती का उद्देश्य केवल शब्दों का पाठ करना नहीं, बल्कि एकाग्रता और श्रद्धा के साथ अपने आराध्य का स्मरण करना भी है।

समृद्धि के साथ सदाचार

कुबेर जी धन और समृद्धि से जुड़े देवता माने जाते हैं। धार्मिक दृष्टि से समृद्धि के साथ जिम्मेदारी, संतोष और संसाधनों के उचित उपयोग का भाव भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

इसलिए कुबेर जी की आराधना करते समय भक्त अपने जीवन में केवल धन की कामना ही नहीं, बल्कि सद्बुद्धि और अच्छे कर्मों की प्रेरणा की भी प्रार्थना कर सकता है।

कृतज्ञता का भाव

आरती भक्त को जीवन में उपलब्ध संसाधनों और सुखों के प्रति कृतज्ञ रहने का भाव भी सिखाती है। भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं में दान, सेवा और जरूरतमंदों की सहायता को महत्वपूर्ण मानवीय मूल्य माना गया है।

कुबेर जी की पूजा में आरती का स्थान

आरती भारतीय पूजा परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग है। पूजा के अंत या निर्धारित समय पर दीपक अथवा कपूर के माध्यम से भक्त अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

कुबेर जी की पूजा में आरती का क्रम परिवार और धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

यदि आप किसी विशेष संप्रदाय, मंदिर परंपरा या गुरु परंपरा का पालन करते हैं, तो उसी के अनुसार पूजा-विधि का पालन करना उचित है।

कुबेर जी की आरती के बाद क्या करें?

आरती पूर्ण होने के बाद भगवान कुबेर को श्रद्धापूर्वक प्रणाम किया जा सकता है।

भक्त अपने जीवन और परिवार के लिए सद्बुद्धि, शांति, संतोष और उचित साधनों से प्राप्त समृद्धि की प्रार्थना कर सकते हैं।

आप सरल भाव से इस प्रकार प्रार्थना कर सकते हैं:

हे श्री कुबेर महाराज, हमें सद्बुद्धि, संतोष और अच्छे कर्मों की प्रेरणा दें। हमारे जीवन में उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग करने की समझ दें और हमें सेवा, दान तथा सकारात्मकता के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें।

Kuber Ji Ki Aarti से जुड़े सामान्य प्रश्न

कुबेर जी की आरती किस भगवान को समर्पित है?

यह आरती भगवान कुबेर को समर्पित है।

कुबेर जी को किस रूप में स्मरण किया जाता है?

हिंदू धार्मिक और पौराणिक परंपराओं में भगवान कुबेर को धनाध्यक्ष और यक्षों के अधिपति के रूप में स्मरण किया जाता है।

कुबेर जी की आरती कब पढ़ी जा सकती है?

भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार दैनिक पूजा, धनतेरस, दीपावली, लक्ष्मी-कुबेर पूजा और अन्य शुभ अवसरों पर यह आरती पढ़ या गा सकते हैं।

क्या कुबेर जी की पूजा केवल धन की प्राप्ति के लिए की जाती है?

धार्मिक आस्था और पूजा का उद्देश्य व्यक्ति और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। कुबेर जी की आराधना को समृद्धि के साथ श्रद्धा, कृतज्ञता, सदाचार और संसाधनों के उचित उपयोग की भावना से भी जोड़ा जा सकता है।

क्या कुबेर जी की आरती घर पर की जा सकती है?

हाँ, भक्त अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार घर पर श्रद्धा के साथ भगवान कुबेर की पूजा और आरती कर सकते हैं।

निष्कर्ष

Kuber Ji Ki Aarti भगवान कुबेर के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने वाली भक्तिमय आरती है। इसके माध्यम से भक्त भगवान कुबेर का स्मरण करते हुए जीवन में सद्बुद्धि, संतोष, शांति और उचित साधनों से प्राप्त समृद्धि की मंगलकामना करते हैं।

धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ व्यक्तिगत आस्था और परंपराओं से जुड़े होते हैं। इसलिए पूजा और आरती करते समय अपनी पारिवारिक तथा धार्मिक परंपरा का सम्मान करना उचित है।

॥ ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे ॥
॥ श्री कुबेर महाराज की जय ॥
॥ श्री लक्ष्मी-कुबेर भगवान की जय ॥

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॥ जय श्री कुबेर महाराज ॥

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