Trimurtidham Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi | त्रिमूर्तिधाम हनुमान जी की आरती

Trimurtidham Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi – त्रिमूर्तिधाम श्री हनुमान जी की आरती

Trimurtidham Hanuman Ji Ki Aarti भगवान श्री हनुमान जी को समर्पित एक श्रद्धापूर्ण और भक्तिमय आरती है। हनुमान जी को हिंदू परंपरा में भक्ति, शक्ति, साहस, सेवा और भगवान श्रीराम के प्रति अटूट समर्पण के प्रतीक के रूप में श्रद्धा से स्मरण किया जाता है।

त्रिमूर्तिधाम से जुड़ी इस भक्तिमय आरती में हनुमान जी के दिव्य स्वरूप, उनके पराक्रम और श्रीराम के प्रति उनकी भक्ति का स्मरण किया जाता है।

इस लेख में आपको Trimurtidham Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi, त्रिमूर्तिधाम हनुमान जी की आरती के संपूर्ण बोल, आरती का भक्तिमय भाव, इसे कब पढ़ा जा सकता है और पूजा से जुड़ी सामान्य जानकारी सरल भाषा में मिलेगी।

त्रिमूर्तिधाम हनुमान जी की आरती का भक्तिमय महत्व

हनुमान जी की आराधना भारतीय धार्मिक परंपरा में भक्ति, सेवा, साहस और समर्पण के भाव से जुड़ी हुई है। उन्हें भगवान श्रीराम के परम भक्त और आदर्श सेवक के रूप में श्रद्धा से स्मरण किया जाता है।

आरती के माध्यम से भक्त हनुमान जी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और उनके जीवन से जुड़े भक्ति, विनम्रता और सेवा के आदर्शों का स्मरण करते हैं।

आरती का उद्देश्य केवल शब्दों का पाठ करना नहीं, बल्कि श्रद्धा और एकाग्रता के साथ अपने आराध्य का स्मरण करना भी है।

भगवान हनुमान का भक्ति और सेवा का संदेश

भगवान हनुमान के जीवन से जुड़े धार्मिक प्रसंगों में उनके साहस के साथ-साथ विनम्रता और निस्वार्थ सेवा का भी विशेष महत्व माना जाता है।

श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति भक्तों के लिए समर्पण और कर्तव्य की प्रेरणा मानी जाती है। इसी प्रकार उनका पराक्रम जीवन की कठिन परिस्थितियों में साहस और धैर्य बनाए रखने का भक्तिमय संदेश देता है।

भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत में हनुमान जी को समर्पित अनेक प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं। भारत सरकार के आधिकारिक पर्यटन मंच Incredible India पर Hanuman Garhi, Ayodhya सहित हनुमान जी से जुड़े महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों की जानकारी उपलब्ध है।

Trimurtidham Hanuman Ji Ki Aarti कब पढ़ें?

भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार त्रिमूर्तिधाम हनुमान जी की आरती का पाठ या गायन कर सकते हैं।

सामान्य रूप से भक्त इसे निम्न अवसरों पर श्रद्धापूर्वक पढ़ सकते हैं:

  • सुबह या शाम की पूजा के समय
  • मंगलवार के दिन
  • शनिवार के दिन
  • हनुमान जयंती के अवसर पर
  • मंदिर पूजा के समय
  • भजन और कीर्तन के दौरान
  • अन्य धार्मिक और पारिवारिक अवसरों पर

पूजा की विधि, समय और सामग्री परिवार, क्षेत्र और धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

त्रिमूर्तिधाम – श्री हनुमान जी की आरती

जय हनुमत बाबा,
जय जय हनुमत बाबा।
रामदूत बलवंता,
रामदूत बलवंता,
सब जन मन भावा।
जय जय हनुमत बाबा॥

अंजनी गर्भ संभूता,
पवन वेगधारी,
बाबा पवन वेगधारी।
लंकिनी गर्व निहंता,
लंकिनी गर्व निहंता,
अनुपम बलधारी।
जय जय हनुमत बाबा॥

बालापन में बाबा अचरज बहु कीन्हों,
बाबा अचरज बहु कीन्हों।
रवि को मुख में धारयो,
रवि को मुख में धारयो,
राहु त्रास दीन्हों।
जय जय हनुमत बाबा॥

सीता की सुधि लाए,
लंका दहन कियो,
बाबा लंका दहन कियो।
बाग अशोक उजारी,
बाग अशोक उजारी,
अक्षय मार दियो।
जय जय हनुमत बाबा॥

द्रोण सो गिरि उपारयो,
लखन को प्राण दियो,
बाबा लखन को प्राण दियो।
अहिरावण संहारा,
अहिरावण संहारा,
सब जन तार दियो।
जय जय हनुमत बाबा॥

संकट हरण कृपामय,
दयामय सुखकारी,
बाबा दयामय सुखकारी।
सर्व सुखन के दाता,
सर्व सुखन के दाता,
जय जय केहरि हरि।
जय जय हनुमत बाबा॥

सब द्वारों से लौटा, तेरी शरण परयो,
बाबा तेरी शरण परयो।
संकट मेरा मिटाओ,
संकट मेरा मिटाओ,
विघ्न सकल हरयो।
जय जय हनुमत बाबा॥

भक्ति भाव से बाबा, मन मेरा सिक्त रहे,
बाबा मन मेरा सिक्त रहे।
एक हो शरण तिहारी,
एक हो शरण तिहारी,
विषयों में न चित रहे।
जय जय हनुमत बाबा॥

जय हनुमत बाबा,
जय जय हनुमत बाबा।
रामदूत बलवंता,
रामदूत बलवंता,
सब जन मन भावा।
जय जय हनुमत बाबा॥

॥ दोहा ॥

पवन तनय संकट हरण,
मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित,
हृदय बसहुँ सुर भूप॥

आरती के शब्दों का भक्तिमय भाव

रामदूत बलवंता

आरती में हनुमान जी को भगवान श्रीराम के दूत और महान भक्त के रूप में स्मरण किया गया है। यह भक्तिमय भाव सेवा, कर्तव्य और समर्पण के महत्व को दर्शाता है।

अंजनी पुत्र और पवनसुत का स्मरण

आरती में हनुमान जी के जन्म और उनके पवनपुत्र स्वरूप का भक्तिपूर्वक स्मरण किया गया है। धार्मिक परंपराओं में उनके जीवन से जुड़े अनेक प्रसंग श्रद्धा के साथ सुनाए और गाए जाते हैं।

लंका यात्रा और सीता जी की खोज

आरती में माता सीता की खोज और लंका से जुड़े धार्मिक प्रसंगों का उल्लेख मिलता है। ये प्रसंग हनुमान जी के साहस, निष्ठा और श्रीराम के प्रति उनकी सेवा भावना का भक्तिमय स्मरण कराते हैं।

संजीवनी पर्वत का प्रसंग

हनुमान जी द्वारा पर्वत लाकर लक्ष्मण जी की सहायता करने का प्रसंग भारतीय धार्मिक परंपरा में अत्यंत प्रसिद्ध है। भक्तिमय दृष्टि से यह निस्वार्थ सेवा और कठिन परिस्थितियों में सहायता के भाव को दर्शाता है।

शरणागति और भक्ति

आरती के अंतिम पदों में भक्त हनुमान जी के प्रति अपनी श्रद्धा और शरणागति व्यक्त करता है। यह भाव विनम्रता और अपने आराध्य के प्रति विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

त्रिमूर्तिधाम हनुमान जी की आरती कैसे करें?

पूजा और आरती की विधि परिवार तथा स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

सामान्य रूप से भक्त निम्न प्रकार से पूजा कर सकते हैं:

  1. पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
  2. भगवान हनुमान का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।
  3. अपनी परंपरा के अनुसार दीपक और पूजा सामग्री तैयार करें।
  4. शांत और श्रद्धापूर्ण मन से आरती का पाठ या गायन करें।
  5. आरती पूर्ण होने पर भगवान हनुमान को प्रणाम करें।
  6. अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा पूर्ण करें।

यदि आप किसी विशेष मंदिर, संप्रदाय या पारिवारिक पूजा-विधि का पालन करते हैं, तो उसी परंपरा को प्राथमिकता देना उचित है।

आरती के बाद क्या करें?

आरती पूर्ण होने के बाद भक्त भगवान हनुमान को श्रद्धापूर्वक प्रणाम कर सकते हैं।

इसके बाद भक्त अपने जीवन में साहस, धैर्य, विनम्रता और सेवा भावना बनाए रखने की प्रार्थना कर सकते हैं।

आप सरल भाव से इस प्रकार प्रार्थना कर सकते हैं:

हे प्रभु हनुमान, हमें साहस, धैर्य और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें। हमारे जीवन में सेवा, विनम्रता और सकारात्मकता का भाव बनाए रखें।

इसके बाद अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा पूर्ण की जा सकती है।

Trimurtidham Hanuman Ji Ki Aarti से जुड़े सामान्य प्रश्न

त्रिमूर्तिधाम हनुमान जी की आरती किस भगवान को समर्पित है?

यह आरती भगवान श्री हनुमान जी को समर्पित है।

यह आरती कब पढ़ी जा सकती है?

भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार सुबह या शाम की पूजा, मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती तथा अन्य धार्मिक अवसरों पर इसका पाठ या गायन कर सकते हैं।

क्या यह आरती घर पर की जा सकती है?

हाँ, भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार घर पर श्रद्धा के साथ भगवान हनुमान की पूजा और आरती कर सकते हैं।

क्या पूजा की विधि सभी स्थानों पर समान होती है?

नहीं। पूजा की विधि, आरती का समय और धार्मिक परंपराएँ परिवार, क्षेत्र और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

आरती के बाद क्या करना चाहिए?

आरती के बाद भगवान हनुमान को प्रणाम करके श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जा सकती है। इसके बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा पूर्ण की जा सकती है।

निष्कर्ष

Trimurtidham Hanuman Ji Ki Aarti भगवान श्री हनुमान जी के प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण व्यक्त करने वाली एक भक्तिमय आरती है।

आरती में हनुमान जी के पराक्रम, श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति और सेवा भावना से जुड़े धार्मिक प्रसंगों का स्मरण किया जाता है।

भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इस आरती का पाठ या गायन कर सकते हैं। भक्ति का मुख्य भाव श्रद्धा, विनम्रता, सेवा और अपने आराध्य के प्रति समर्पण है।

॥ जय श्री राम ॥
॥ जय बजरंगबली ॥
॥ श्री हनुमान जी महाराज की जय ॥

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External Reference

भगवान हनुमान से जुड़े भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक जानकारी के लिए भारत सरकार के आधिकारिक पर्यटन मंच पर Hanuman Garhi, Ayodhya की जानकारी भी पढ़ सकते हैं।

॥ जय श्री राम ॥
॥ जय बजरंगबली ॥

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