Surya Dev Ki Aarti – सूर्य देव की आरती Lyrics in Hindi

Surya Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi – सूर्य देव की आरती

सूर्य देव की आरती भगवान सूर्य को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। सनातन परंपरा में सूर्य देव को प्रकाश, ऊर्जा और जीवन के प्रमुख स्रोत के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है। सूर्य उपासना भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।

भक्तजन अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार प्रातःकाल सूर्य देव की पूजा और आराधना के समय आरती का पाठ या गायन करते हैं। आरती के माध्यम से भक्त सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए प्रकाश, सकारात्मकता और सद्बुद्धि का स्मरण करते हैं।

इस पृष्ठ पर Surya Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत की गई है, ताकि पाठक आरती को आसानी से पढ़ सकें और अपनी दैनिक पूजा या धार्मिक अवसरों में शामिल कर सकें।

धार्मिक आरती और स्तुति भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा हैं। इनका पाठ व्यक्तिगत श्रद्धा, पारिवारिक परंपरा और पूजा-विधि के अनुसार किया जा सकता है।

Surya Dev Ki Aarti in Hindi

ऊँ जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्र स्वरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान,
ऊँ जय सूर्य भगवान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान…॥

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम,
श्वेत कमलधारी।
तुम चार भुजाधारी॥
अश्व हैं सात तुम्हारे,
कोटि किरण पसारे।
तुम हो देव महान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान…॥

ऊषाकाल में जब तुम,
उदयाचल आते।
सब तब दर्शन पाते॥
फैलाते उजियारा,
जागता तब जग सारा।
करे सब तब गुणगान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान…॥

संध्या में भुवनेश्वर,
अस्ताचल जाते।
गोधन तब घर आते॥
गोधूलि बेला में,
हर घर हर आँगन में।
हो तव महिमा गान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान…॥

देव दनुज नर नारी,
ऋषि मुनिवर भजते।
आदित्य हृदय जपते॥
स्तोत्र ये मंगलकारी,
इसकी है रचना न्यारी।
दे नव जीवनदान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान…॥

तुम हो त्रिकाल रचयिता,
तुम जग के आधार।
महिमा तब अपरंपार॥
प्राणों का सिंचन करके,
भक्तों को अपने देते।
बल, वृद्धि और ज्ञान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान…॥

भूचर, जलचर, खेचर,
सब के हो प्राण तुम्हीं।
सब जीवों के प्राण तुम्हीं॥
वेद पुराण बखाने,
धर्म सभी तुम्हें माने।
तुम ही सर्वशक्तिमान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान…॥

पूजन करती दिशाएँ,
पूजे दश दिक्पाल।
तुम भुवनों के प्रतिपाल॥
ऋतुएँ तुम्हारी दासी,
तुम शाश्वत अविनाशी।
शुभकारी अंशुमान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान…॥

ऊँ जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान।
जगत के नेत्र स्वरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान,
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान…॥

सूर्य देव की आरती का महत्व

सूर्य देव की आरती भगवान सूर्य को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। इसमें सूर्य देव के प्रकाश, ऊर्जा, जीवनदायी स्वरूप और जगत के प्रति उनके महत्व का श्रद्धापूर्वक वर्णन किया गया है। सूर्य उपासना भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान रखती है।

सूर्य देव को प्रकाश और ऊर्जा का प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। उनकी उपासना के माध्यम से भक्त कृतज्ञता, अनुशासन और सकारात्मक जीवन मूल्यों का स्मरण करते हैं।

सूर्य देव की आरती कब करें?

भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार प्रातःकाल सूर्य देव की पूजा के समय आरती कर सकते हैं। सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के बाद आरती का पाठ करना कई परिवारों की धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।

आरती के समय शांत मन से सूर्य देव का स्मरण करना और उनके प्रकाश एवं जीवनदायी स्वरूप के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना भक्ति का भाव माना जाता है।

सूर्य देव की उपासना का महत्व

भारतीय परंपरा में सूर्य देव को जीवन, प्रकाश और ऊर्जा से जोड़ा गया है। सूर्य नमस्कार, सूर्य को अर्घ्य और सूर्य देव की आरती जैसी परंपराएँ दैनिक आध्यात्मिक अभ्यास का हिस्सा रही हैं।

सूर्य उपासना व्यक्ति को नियमितता, अनुशासन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता जैसे मूल्यों का स्मरण कराने का माध्यम भी बन सकती है।

सूर्य देव की आरती का पाठ

सूर्य देव की आरती का पाठ श्रद्धा और अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है। आरती के शब्दों और उनके भाव को समझकर पाठ करना भारतीय धार्मिक साहित्य और सूर्य उपासना की परंपरा को बेहतर ढंग से समझने में सहायक हो सकता है।

धार्मिक आरती और पूजा व्यक्तिगत आस्था एवं पारिवारिक परंपराओं से जुड़ी होती हैं। इनकी विधि अलग-अलग स्थानों और परंपराओं में भिन्न हो सकती है।

ॐ सूर्याय नमः।

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