माँ पार्वती की आरती देवी पार्वती को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। सनातन परंपरा में माँ पार्वती को शक्ति, करुणा, मातृत्व और सौभाग्य के स्वरूप के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है। भगवान शिव के साथ माँ पार्वती की आराधना भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान रखती है।
भक्तजन अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा के समय Parvati Mata Ki Aarti का पाठ या गायन करते हैं। आरती के माध्यम से भक्त माँ पार्वती का स्मरण करते हुए परिवार के कल्याण, सद्बुद्धि, शांति और सकारात्मक भाव की प्रार्थना करते हैं।
इस पृष्ठ पर Parvati Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत की गई है, ताकि पाठक इसे आसानी से पढ़ सकें और अपनी दैनिक पूजा या धार्मिक अवसरों में शामिल कर सकें।
धार्मिक आरती भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनका पाठ व्यक्तिगत श्रद्धा, पारिवारिक परंपरा और पूजा-विधि के अनुसार किया जा सकता है।
पार्वती माता की आरती
जय पार्वती माता,
जय पार्वती माता।
ब्रह्मा सनातन देवी,
शुभ फल की दाता॥
॥ जय पार्वती माता…॥
अरिकुल कंटक नासनि,
निज सेवक त्राता।
जगजननी जगदम्बा,
हरिहर गुण गाता॥
॥ जय पार्वती माता…॥
सिंह को वाहन साजे,
कुंडल है साथा।
देव वधू जस गावत,
नृत्य करत ता-था॥
॥ जय पार्वती माता…॥
सतयुग रूप शील अतिसुंदर,
नाम सती कहलाता।
हेमाचल घर जन्मी,
सखियाँ संग राता॥
॥ जय पार्वती माता…॥
शुम्भ-निशुम्भ विदारे,
हेमाचल स्थाता।
सहस्र भुजा तनु धरि के,
चक्र लियो हाथा॥
॥ जय पार्वती माता…॥
सृष्टि रूप तुही है जननी,
शिव संग रंगराता।
नन्दी भृंगी बीन लही,
सारा जग मदमाता॥
॥ जय पार्वती माता…॥
देवन अरज करत हम,
चरण ध्यान लाता।
तेरी कृपा रहे तो,
मन नहीं भरमाता॥
॥ जय पार्वती माता…॥
मैया जी की आरती,
भक्ति भाव से जो नर गाता।
नित्य सुखी रह करके,
सुख-संपत्ति पाता॥
॥ जय पार्वती माता…॥
जय पार्वती माता,
जय पार्वती माता।
ब्रह्मा सनातन देवी,
शुभ फल की दाता॥
॥ जय पार्वती माता…॥
माँ पार्वती की आरती का महत्व
माँ पार्वती की आरती देवी पार्वती को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। इसमें माँ पार्वती के मातृशक्ति, करुणा, शक्ति और कल्याणकारी स्वरूप का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया है। सनातन परंपरा में माँ पार्वती की आराधना भगवान शिव के साथ विशेष रूप से की जाती है।
माँ पार्वती को शक्ति और सृजन की दिव्य ऊर्जा से जोड़ा जाता है। उनकी पूजा भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
माँ पार्वती की आरती कब करें?
भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार माँ पार्वती की पूजा के समय आरती कर सकते हैं। सोमवार, शिव-पार्वती से जुड़े धार्मिक अवसरों और विशेष पूजा के दौरान भी श्रद्धालु आरती का पाठ करते हैं।
आरती के समय शांत मन से माँ पार्वती का स्मरण करना और उनके प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता का भाव रखना भक्ति परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
माँ पार्वती का धार्मिक महत्व
माँ पार्वती को सनातन परंपरा में शक्ति, करुणा, मातृत्व और सौभाग्य के स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। उनके विभिन्न स्वरूप भारतीय धार्मिक साहित्य और परंपराओं में वर्णित हैं।
माँ पार्वती की आराधना भक्तों को शक्ति, धैर्य, करुणा और सकारात्मक जीवन मूल्यों का स्मरण कराने का माध्यम भी मानी जाती है।
माँ पार्वती की आरती का पाठ
माँ पार्वती की आरती का पाठ श्रद्धा और अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है। आरती के शब्दों और उनके भाव को समझकर पाठ करना धार्मिक साहित्य और भारतीय भक्ति परंपरा को बेहतर ढंग से समझने में सहायक हो सकता है।
धार्मिक आरती और पूजा व्यक्तिगत आस्था एवं पारिवारिक परंपराओं से जुड़ी होती हैं। इनकी विधि अलग-अलग स्थानों और परंपराओं में भिन्न हो सकती है।
जय माँ पार्वती।
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