Shri Balaji Ki Aarti – श्री बालाजी की आरती Lyrics in Hindi

Shri Balaji Ki Aarti Lyrics in Hindi – श्री बालाजी आरती

श्री बालाजी की आरती भगवान बालाजी को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। सनातन परंपरा में बालाजी नाम से भगवान हनुमान की आराधना विशेष रूप से की जाती है। भक्तजन श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान बालाजी का स्मरण करते हुए आरती का पाठ करते हैं।

इस आरती में भगवान बालाजी के प्रति श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का भाव व्यक्त किया जाता है। भक्त अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा, आरती और अन्य धार्मिक अवसरों पर इसका पाठ या गायन कर सकते हैं।

इस पृष्ठ पर Shri Balaji Ki Aarti Lyrics in Hindi सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत की गई है, ताकि श्रद्धालु आरती को आसानी से पढ़ सकें और अपनी पूजा में शामिल कर सकें।

धार्मिक आरती भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनका पाठ व्यक्तिगत श्रद्धा, पारिवारिक परंपरा और पूजा-विधि के अनुसार किया जा सकता है।

जय श्री बालाजी महाराज।

श्री बालाजी आरती – ॐ जय हनुमत वीरा

ॐ जय हनुमत वीरा,
स्वामी जय हनुमत वीरा।
संकट मोचन स्वामी,
तुम हो रणधीरा॥
॥ ॐ जय हनुमत वीरा…॥

पवन पुत्र अंजनी सुत,
महिमा अति भारी।
दुःख-दारिद्र मिटाओ,
संकट सब हारी॥
॥ ॐ जय हनुमत वीरा…॥

बाल समय में तुमने,
रवि को भक्ष लिया।
देवन स्तुति कीन्ही,
तुरतहिं छोड़ दिया॥
॥ ॐ जय हनुमत वीरा…॥

कपि सुग्रीव राम संग,
मैत्री करवाई।
अभिमानी बाली मेटयो,
कीर्ति रही छाई॥
॥ ॐ जय हनुमत वीरा…॥

जारी लंक सिय-सुधि ले आए,
वानर हर्षाए।
कारज कठिन सुधारे,
रघुबर मन भाए॥
॥ ॐ जय हनुमत वीरा…॥

शक्ति लगी लक्ष्मण को,
भारी सोच भयो।
लाय संजीवन बूटी,
दुःख सब दूर कियो॥
॥ ॐ जय हनुमत वीरा…॥

रामहि ले अहिरावण,
जब पाताल गयो।
ताहि मारी प्रभु लाय,
जय-जयकार भयो॥
॥ ॐ जय हनुमत वीरा…॥

राजत मेहंदीपुर में,
दर्शन सुखकारी।
मंगल और शनिश्चर,
मेला है जारी॥
॥ ॐ जय हनुमत वीरा…॥

श्री बालाजी की आरती,
जो कोई नर गावे।
कहत इन्द्र हर्षित,
मनवांछित फल पावे॥
॥ ॐ जय हनुमत वीरा…॥

श्री बालाजी की आरती का महत्व

श्री बालाजी की आरती भगवान हनुमान को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। इसमें भगवान हनुमान के पराक्रम, भक्ति, सेवा और संकटों से रक्षा करने वाले स्वरूप का स्मरण किया गया है। आरती में रामायण से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से हनुमान जी की महिमा का वर्णन भी मिलता है।

भगवान हनुमान को सनातन परंपरा में श्रीराम के परम भक्त और साहस, शक्ति, सेवा तथा समर्पण के प्रतीक के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।

श्री बालाजी की आरती कब करें?

भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा के समय श्री बालाजी की आरती कर सकते हैं। मंगलवार और शनिवार को भगवान हनुमान की आराधना करने की विशेष धार्मिक परंपरा है। मंदिरों में आरती का समय और पूजा-विधि अलग-अलग हो सकती है।

आरती के समय शांत मन से भगवान बालाजी का स्मरण करना और उनके प्रति श्रद्धा एवं भक्ति का भाव रखना पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

श्री बालाजी आरती का धार्मिक महत्व

इस आरती में भगवान हनुमान के जीवन और श्रीराम के प्रति उनकी भक्ति से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का वर्णन मिलता है। लंका में जाकर माता सीता की खोज, संजीवनी बूटी लाना और श्रीराम के कार्यों में सहायता करना हनुमान जी की सेवा और समर्पण के प्रसिद्ध प्रसंग हैं।

हनुमान जी की आराधना भारतीय भक्ति परंपरा में साहस, अनुशासन, निष्ठा और सेवा जैसे जीवन मूल्यों से भी जुड़ी हुई है।

श्री बालाजी की आरती का पाठ

श्री बालाजी की आरती का पाठ श्रद्धा और अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है। आरती के शब्दों और उनके भाव को समझते हुए पाठ करना भारतीय धार्मिक साहित्य और हनुमान भक्ति की परंपरा को बेहतर ढंग से समझने में सहायक हो सकता है।

धार्मिक आरती और पूजा व्यक्तिगत आस्था एवं पारिवारिक परंपराओं से जुड़ी होती हैं। इनकी विधि अलग-अलग स्थानों और परंपराओं में भिन्न हो सकती है।

जय श्री बालाजी महाराज।

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