Vishwakarma Aarti – विश्वकर्मा आरती Lyrics in Hindi

Vishwakarma Aarti Lyrics in Hindi – विश्वकर्मा आरती

विश्वकर्मा आरती भगवान विश्वकर्मा को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। सनातन परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, शिल्प, वास्तुकला, तकनीक और कारीगरी से जुड़े देवता के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है। विशेष रूप से कारीगर, शिल्पकार, इंजीनियर, तकनीकी कार्यों से जुड़े लोग और विभिन्न व्यवसायों से जुड़े श्रद्धालु भगवान विश्वकर्मा की आराधना करते हैं।

भगवान विश्वकर्मा की पूजा में आरती का विशेष स्थान माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा के समय विश्वकर्मा आरती का पाठ या गायन करते हैं। आरती के माध्यम से भगवान विश्वकर्मा का स्मरण करते हुए कार्य में कुशलता, सद्बुद्धि और सकारात्मक भाव की प्रार्थना की जाती है।

इस पृष्ठ पर Vishwakarma Aarti Lyrics in Hindi सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत की गई है, ताकि पाठक आरती को आसानी से पढ़ सकें और पूजा या धार्मिक अवसरों पर इसका पाठ कर सकें।

धार्मिक आरती भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनका पाठ व्यक्तिगत श्रद्धा, पारिवारिक परंपरा और पूजा-विधि के अनुसार किया जा सकता है।

Vishwakarma Aarti (विश्वकर्मा आरती) – Lyrics in Hindi

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता,
रक्षक स्तुति धर्मा॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा॥

आदि सृष्टि में विधि को,
श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में,
ज्ञान विकास किया॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा॥

ऋषि अंगीरा तप से,
शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का,
सकल सिद्धि आई॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा॥

रोगग्रस्त राजा ने,
जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर,
दूर दुःख कीना॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा॥

जब रथकार दम्पति,
तुम्हारी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना,
विपत सगरी हरी॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा॥

एकानन, चतुरानन,
पंचानन राजे।
त्रिभुज, चतुर्भुज, दशभुज,
सकल रूप साजे॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा॥

ध्यान धरे तब पद का,
सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे,
अटल शक्ति पावे॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा॥

श्री विश्वकर्मा की आरती,
जो कोई गावे।
भजत गजानंद स्वामी,
सुख-संपत्ति पावे॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता,
रक्षक स्तुति धर्मा॥

विश्वकर्मा आरती का महत्व

विश्वकर्मा आरती भगवान विश्वकर्मा को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। सनातन परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को शिल्प, निर्माण, वास्तुकला, कारीगरी और सृजनात्मक कार्यों से जुड़े देवता के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।

भगवान विश्वकर्मा की पूजा विशेष रूप से कारीगरों, शिल्पकारों, तकनीकी कार्यों से जुड़े लोगों, उद्योगों और कार्यस्थलों में की जाती है। आरती के माध्यम से भक्त भगवान विश्वकर्मा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और अपने कार्य में कुशलता, एकाग्रता और सद्बुद्धि की कामना करते हैं।

विश्वकर्मा आरती कब करें?

भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान विश्वकर्मा की पूजा के समय आरती कर सकते हैं। विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर कार्यस्थलों, कारखानों, दुकानों और संस्थानों में विशेष पूजा एवं आरती आयोजित करने की परंपरा है।

आरती के समय शांत मन से भगवान विश्वकर्मा का स्मरण करना और उनके सृजनात्मक स्वरूप का ध्यान करना भक्ति परंपरा का हिस्सा माना जाता है।

भगवान विश्वकर्मा का महत्व

भगवान विश्वकर्मा को भारतीय धार्मिक परंपरा में दिव्य शिल्पकार के रूप में जाना जाता है। उनसे वास्तुकला, निर्माण-कला और विभिन्न प्रकार के शिल्प कार्यों की परंपरा जुड़ी हुई है।

भगवान विश्वकर्मा की आराधना मेहनत, कौशल, रचनात्मकता और अपने कार्य के प्रति समर्पण के महत्व को भी स्मरण कराने का माध्यम मानी जा सकती है।

विश्वकर्मा आरती का पाठ

विश्वकर्मा आरती का पाठ पूजा के दौरान श्रद्धा और अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है। आरती के शब्दों और उनके भाव को समझते हुए पाठ करना धार्मिक साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को बेहतर ढंग से समझने में सहायक हो सकता है।

धार्मिक आरती और पूजा व्यक्तिगत आस्था एवं पारिवारिक परंपराओं से जुड़ी होती हैं। इनकी विधि अलग-अलग स्थानों और परंपराओं में भिन्न हो सकती है।

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु।

Also Read
 Hanuman Ji Ki Aarti
Shiv Ji Ki Aarti Lyrics
Santoshi Maa Aarti
Aarti Kunj Bihari Ki
 Ram Chalisa Lyrics in Hindi & English

Scroll to Top