Shri Shantadurgechi Aarti Lyrics | श्री शांतादुर्गेची आरती

Shri Shantadurgechi Aarti Lyrics in Marathi – श्री शांतादुर्गेची आरती

Shri Shantadurgechi Aarti माँ शांतादुर्गा को समर्पित एक प्रसिद्ध भक्तिमय आरती है। “जय देवी जय देवी जय शांते जननी” से आरंभ होने वाली यह आरती माँ के प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण की भावना व्यक्त करती है।

माँ शांतादुर्गा की आराधना विशेष रूप से गोवा की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी हुई है। विभिन्न क्षेत्रों और परिवारों में देवी पूजा तथा आरती की परंपराओं में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है।

इस लेख में आपको Shri Shantadurgechi Aarti Lyrics, श्री शांतादुर्गेची आरती के संपूर्ण बोल, आरती का भक्तिमय भाव और माँ शांतादुर्गा की आराधना से जुड़ी सामान्य जानकारी सरल भाषा में मिलेगी।

श्री शांतादुर्गेची आरती

जय देवी जय देवी जय शांते जननी।
दुर्गे बहुदुःखदमने रतलो तव भजनी॥

भूकैलासा ऐसी ही कवला नगरी।
शांतादुर्गा तेथे भक्तभवहारी।
असुराते मर्दुनिया सुरवरकैवारी।
स्मरती विधीहरीशंकर सुरगण अंतरी॥

जय देवी जय देवी जय शांते जननी।
दुर्गे बहुदुःखदमने रतलो तव भजनी॥

प्रबोध तुझा नव्हे विश्वाभीतरी।
नेति नेति शब्दे गर्जती पै चारी।
साही शास्त्रे मथिता न कळीसी निर्धारी।
अष्टादश गर्जती परी नेणती तव थोरी॥

जय देवी जय देवी जय शांते जननी।
दुर्गे बहुदुःखदमने रतलो तव भजनी॥

कोटी मदन रूपा ऐसी मुखशोभा।
सर्वांगी भूषणे जांबूनदगाभा।
नासाग्री मुक्ताफळ दिनमणीची प्रभा।
भक्तजनाते अभय देसी तू अंबा॥

जय देवी जय देवी जय शांते जननी।
दुर्गे बहुदुःखदमने रतलो तव भजनी॥

अंबे भक्तांसाठी होसी साकार।
नातरी जगजीवन तू नव्हसी गोचर।
विराटरूपा धरूनी करीसी व्यापार।
त्रिगुणी विरहीत सहीत तुज कैचा पार॥

जय देवी जय देवी जय शांते जननी।
दुर्गे बहुदुःखदमने रतलो तव भजनी॥

त्रितापतापे श्रमलो निजवी निजसदनी।
अंबे सकळारंभे राका शशीवदनी।
अगमे निगमे दुर्गे भक्तांचे जननी।
पद्माजी बाबाजी रमला तव भजनी॥

जय देवी जय देवी जय शांते जननी।
दुर्गे बहुदुःखदमने रतलो तव भजनी॥

॥ जय माँ शांतादुर्गा ॥

माँ शांतादुर्गा की आरती का भक्तिमय महत्व

श्री शांतादुर्गेची आरती में माँ के प्रति श्रद्धा और समर्पण की भावना व्यक्त की जाती है। आरती के शब्दों में देवी के दिव्य स्वरूप, उनकी महिमा और भक्तों के प्रति श्रद्धा का भाव दिखाई देता है।

भक्ति परंपरा में आरती अपने आराध्य के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने का एक माध्यम है। विभिन्न क्षेत्रों और परिवारों में आरती के उच्चारण तथा पूजा की परंपराओं में अंतर हो सकता है।

आरती का मुख्य उद्देश्य केवल शब्दों का पाठ करना नहीं, बल्कि श्रद्धा, विनम्रता और एकाग्रता के साथ देवी का स्मरण करना भी है।

माँ शांतादुर्गा कौन हैं?

माँ शांतादुर्गा को देवी दुर्गा के एक स्वरूप के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।

गोवा की स्थानीय परंपराओं में माँ शांतादुर्गा का विशेष स्थान है। शांता दुर्गा मंदिर कवलें गांव में स्थित है और गोवा की प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है।

माँ शांतादुर्गा से संबंधित धार्मिक कथाएँ और मान्यताएँ स्थानीय परंपराओं तथा व्यक्तिगत आस्था के अनुसार अलग-अलग रूपों में सुनाई जाती हैं।

Shri Shantadurgechi Aarti कब पढ़ें?

भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार माँ शांतादुर्गा की आरती का पाठ या गायन कर सकते हैं।

सामान्य रूप से यह आरती निम्न अवसरों पर की जा सकती है:

  • दैनिक देवी पूजा के समय
  • नवरात्रि के दौरान
  • विशेष धार्मिक अवसरों पर
  • माँ शांतादुर्गा की पूजा के दौरान
  • भजन और कीर्तन के समय
  • अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार विशेष पूजा में

पूजा और आरती का समय तथा विधि परिवार, क्षेत्र और धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

आरती के शब्दों का भक्तिमय भाव

माँ के प्रति श्रद्धा और समर्पण

आरती में भक्त माँ शांतादुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण की भावना व्यक्त करता है।

भक्ति परंपरा में विनम्रता और श्रद्धा के साथ अपने आराध्य का स्मरण महत्वपूर्ण माना जाता है।

देवी के दिव्य स्वरूप का वर्णन

आरती में माँ के सुंदर और दिव्य स्वरूप का भक्तिमय वर्णन मिलता है।

भक्त अपने आराध्य का स्मरण करते हुए प्रेम और श्रद्धा की भावना व्यक्त करते हैं।

भक्ति और सकारात्मकता का संदेश

आरती व्यक्ति को शांत मन से देवी का स्मरण करने और जीवन में धैर्य, विनम्रता तथा सकारात्मकता बनाए रखने की प्रेरणा देती है।

धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताएँ व्यक्तिगत श्रद्धा तथा परंपरा पर आधारित होती हैं।

माँ शांतादुर्गा की आरती कैसे करें?

पूजा और आरती की विधि परिवार तथा धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

सामान्य रूप से भक्त निम्न प्रकार से श्रद्धापूर्वक पूजा कर सकते हैं:

  1. पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
  2. माँ शांतादुर्गा का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।
  3. अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री तैयार करें।
  4. शांत और एकाग्र मन से आरती का पाठ या गायन करें।
  5. आरती पूर्ण होने पर माँ को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें।
  6. अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा पूर्ण करें।

यदि आप किसी विशेष मंदिर, धार्मिक संस्था या पारिवारिक परंपरा का पालन करते हैं, तो उसी परंपरा को प्राथमिकता देना उचित है।

श्री शांतादुर्गेची आरती के बाद क्या करें?

आरती पूर्ण होने के बाद भक्त माँ शांतादुर्गा को श्रद्धापूर्वक प्रणाम कर सकते हैं।

इसके बाद कुछ समय शांत मन से प्रार्थना की जा सकती है।

आप सरल भाव से इस प्रकार प्रार्थना कर सकते हैं:

हे माँ शांतादुर्गा, हमारे मन में श्रद्धा, धैर्य और सकारात्मकता बनाए रखें। हमें सभी के प्रति प्रेम, सम्मान और विनम्रता के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दें।

इसके बाद अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा पूर्ण की जा सकती है।

Shri Shantadurgechi Aarti से जुड़े सामान्य प्रश्न

श्री शांतादुर्गेची आरती किस देवी को समर्पित है?

यह आरती माँ शांतादुर्गा को समर्पित है।

माँ शांतादुर्गा की आरती कब पढ़ी जा सकती है?

भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार दैनिक पूजा, नवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर इस आरती का पाठ या गायन कर सकते हैं।

माँ शांतादुर्गा का प्रसिद्ध मंदिर कहाँ स्थित है?

माँ शांतादुर्गा का प्रसिद्ध मंदिर गोवा के पोंडा तालुका के कवलें क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।

क्या यह आरती घर पर की जा सकती है?

हाँ, भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार घर पर श्रद्धा के साथ माँ शांतादुर्गा की पूजा और आरती कर सकते हैं।

क्या पूजा-विधि सभी जगह एक जैसी होती है?

नहीं। पूजा और आरती की विधि परिवार, क्षेत्र और धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

निष्कर्ष

Shri Shantadurgechi Aarti माँ शांतादुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने वाली एक प्रसिद्ध भक्तिमय आरती है।

“जय देवी जय देवी जय शांते जननी” से आरंभ होने वाली यह आरती माँ के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण का भाव व्यक्त करती है।

भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इस आरती का पाठ या गायन कर सकते हैं और श्रद्धा तथा विनम्रता के साथ माँ शांतादुर्गा का स्मरण कर सकते हैं।

॥ जय माँ शांतादुर्गा ॥
॥ जय माँ दुर्गा ॥
॥ जय माता दी ॥

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माँ शांतादुर्गा के बारे में अधिक जानें

माँ शांतादुर्गा और गोवा के प्रसिद्ध शांता दुर्गा मंदिर से संबंधित सामान्य जानकारी के लिए नीचे दिए गए स्रोत देख सकते हैं।

Government of Goa – Shanta Durga Temple:
https://www.goa.gov.in/places/shanta-durga-temple/

Government of Goa – Temples:
https://www.goa.gov.in/what_to_see/temples/

॥ जय माँ शांतादुर्गा ॥
॥ जय माता दी ॥

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