शेंदुर लाल चढ़ायो आरती भगवान श्री गणेश को समर्पित एक लोकप्रिय भक्तिमय आरती है। यह आरती गणेश जी के सुंदर गजमुख स्वरूप, उनकी महिमा, ज्ञान और मंगलकारी स्वरूप का श्रद्धापूर्वक वर्णन करती है।
भगवान गणेश को हिंदू परंपरा में बुद्धि, विवेक और शुभ आरंभ के देवता के रूप में स्मरण किया जाता है। भक्त उन्हें विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता के रूप में भी श्रद्धापूर्वक पूजते हैं।
“शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुख को” से आरंभ होने वाली यह आरती विशेष रूप से गणेश पूजा और गणेशोत्सव से जुड़ी भक्तिमय परंपराओं में लोकप्रिय है।
इस लेख में आपको Shendur Lal Chadhayo Aarti Lyrics in Hindi, श्री सिद्धिविनायक आरती के संपूर्ण बोल, सरल भावार्थ, गणेश जी के स्वरूप का महत्व और आरती के बाद पढ़े जाने वाले भक्तिमय पाठ एक ही स्थान पर मिलेंगे।
शेंदुर लाल चढ़ायो आरती का महत्व
शेंदुर लाल चढ़ायो आरती में भगवान गणेश के दिव्य स्वरूप का सुंदर वर्णन किया गया है।
आरती की शुरुआत में गणेश जी के गजमुख स्वरूप, लाल शेंदूर और उनके हाथ में गुड़-लड्डू का वर्णन मिलता है। इसके बाद भगवान गणेश को विद्या और सुख प्रदान करने वाले गणराज के रूप में स्मरण किया गया है।
भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान गणेश की पूजा और आरती करते हैं। गणेश जी का स्मरण ज्ञान, विवेक और शुभ कार्यों के आरंभ से जुड़ी धार्मिक भावना के साथ किया जाता है।
शेंदुर लाल चढ़ायो का अर्थ क्या है?
“शेंदुर” शब्द लाल रंग के सिंदूर या शेंदूर से जुड़ा हुआ है।
आरती की पहली पंक्ति भगवान गणेश के उस सुंदर स्वरूप का वर्णन करती है जिसमें उन्हें लाल शेंदूर से सुशोभित देखा जाता है।
आरती में “गजमुख” शब्द भगवान गणेश के हाथी के मुख वाले स्वरूप की ओर संकेत करता है।
इस प्रकार आरती केवल स्तुति ही नहीं करती, बल्कि भगवान गणेश के भक्तिपूर्ण और प्रतीकात्मक स्वरूप का भी वर्णन करती है।
श्री सिद्धिविनायक आरती – शेंदुर लाल चढ़ायो
Shendur Lal Chadhayo Aarti Lyrics in Hindi
शेंदूर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुख को।
दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहर को।
हाथ लिए गुड़लड्डू साईं सुरवर को।
महिमा कहे न जाए, लागत हूँ पाद को॥
जय देव, जय देव॥
जय जय श्री गणराज, विद्या सुखदाता।
धन्य तुम्हारा दर्शन, मेरा मन रमता॥
जय देव, जय देव॥
जय देव, जय देव॥
अष्टौ सिद्धि दासी, संकट के बैरी।
विघ्नविनाशन, मंगल मूरत अधिकारी।
कोटि सूरज प्रकाश, ऐसी छवि तेरी।
गंडस्थल मदमस्तक, झूले शशिबिहारी॥
जय देव, जय देव॥
जय जय श्री गणराज, विद्या सुखदाता।
धन्य तुम्हारा दर्शन, मेरा मन रमता॥
जय देव, जय देव॥
भाव-भगत से कोई शरणागत आवे।
संतत संपत्ति सबही भरपूर पावे।
ऐसे तुम महाराज, मोको अति भावे।
गोसावी नंदन, निशिदिन गुण गावे॥
जय देव, जय देव॥
जय जय श्री गणराज, विद्या सुखदाता।
धन्य तुम्हारा दर्शन, मेरा मन रमता॥
जय देव, जय देव॥
॥ जय श्री गणेश ॥
॥ गणपति बप्पा मोरया ॥
शेंदुर लाल चढ़ायो आरती का सरल भावार्थ
यह आरती भगवान गणेश के दिव्य स्वरूप और उनके गुणों की स्तुति करती है।
अच्छा गजमुख को
“गजमुख” भगवान गणेश के हाथी के मुख वाले स्वरूप को दर्शाता है। यह उनका सबसे प्रमुख और पहचानने योग्य स्वरूप है।
सुत गौरिहर को
इस पंक्ति में भगवान गणेश को माता गौरी और भगवान शिव के पुत्र के रूप में स्मरण किया गया है।
हाथ लिए गुड़लड्डू
लड्डू और मोदक भगवान गणेश से जुड़े लोकप्रिय भोगों में शामिल हैं। आरती में उनके हाथ में गुड़-लड्डू होने का भक्तिपूर्ण वर्णन किया गया है।
विद्या सुखदाता
भगवान गणेश को ज्ञान और बुद्धि से जुड़ा देवता माना जाता है। इसलिए आरती में उन्हें विद्या और सुख प्रदान करने वाले गणराज के रूप में स्मरण किया गया है।
विघ्नविनाशन
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के रूप में भी श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है। भक्त जीवन में आने वाली कठिनाइयों के समय उनका स्मरण करते हैं।
भगवान गणेश का गजमुख स्वरूप
भगवान गणेश का गजमुख स्वरूप हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखता है।
उनका हाथी का मुख ज्ञान और विवेक की धार्मिक प्रतीकात्मक अवधारणाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है।
गणेश जी का स्वरूप भक्तों को धैर्य, समझदारी और सकारात्मक दृष्टिकोण की प्रेरणा भी देता है।
उनके बड़े कानों को सुनने की क्षमता, सूंड को विवेक और विभिन्न परिस्थितियों के अनुसार कार्य करने की क्षमता जैसे प्रतीकात्मक भावों से जोड़ा जाता है।
धार्मिक प्रतीकों की व्याख्या विभिन्न परंपराओं और विचारों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता क्यों कहा जाता है?
भगवान गणेश को श्रद्धापूर्वक “विघ्नहर्ता” कहा जाता है।
हिंदू परंपरा में किसी नए या शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश का स्मरण करने की परंपरा व्यापक रूप से प्रचलित है।
भक्त भगवान गणेश से कार्यों में बुद्धि, सही निर्णय और जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
यही कारण है कि विवाह, गृह प्रवेश, पूजा और अन्य शुभ कार्यों के दौरान गणेश पूजन को महत्वपूर्ण माना जाता है।
शेंदूर और भगवान गणेश
शेंदूर या सिंदूर का उल्लेख इस आरती की पहली पंक्ति में मिलता है।
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान गणेश की पूजा में लाल रंग और शेंदूर का विशेष स्थान हो सकता है।
लाल रंग को ऊर्जा और मंगल की धार्मिक भावनाओं से भी जोड़ा जाता है।
पूजा की सामग्री और विधियां मंदिर, क्षेत्र तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
शेंदुर लाल चढ़ायो आरती कब गाई जाती है?
भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार यह आरती विभिन्न अवसरों पर गा सकते हैं।
सामान्य रूप से यह आरती इन अवसरों पर की जा सकती है:
- गणेश चतुर्थी के दौरान
- गणपति पूजा के समय
- बुधवार की पूजा में
- सिद्धिविनायक पूजा के दौरान
- घर में गणेश पूजा के समय
- मंदिर में आरती के दौरान
- किसी शुभ कार्य के आरंभ से पहले
- गणेशोत्सव के अवसर पर
पूजा और आरती की विधि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों की परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती है।
आरती के बाद पढ़े जाने वाले भक्तिमय पाठ
कई भक्त और परिवार अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार गणेश आरती के बाद अतिरिक्त प्रार्थनाएं और भक्तिमय पाठ भी करते हैं।
नीचे दिए गए पाठ आपके वर्तमान पूजा क्रम का हिस्सा हैं।
घालीन लोटांगण
घालीन लोटांगण, वंदिन चरण।
डोळ्यांनी पाहिन रूप तुझे।
प्रेमे आलिंगिन, आनंदे पूजिन।
भावे ओवाळीन, म्हणे नामा॥
त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव माता च पिता त्वमेव।
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव।
त्वमेव सर्वं मम देव देव॥
कायेन वाचा
कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा।
बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात्।
करोमि यद्यत् सकलं परस्मै।
नारायणायेति समर्पयामि॥
अच्युतं केशवं
अच्युतं केशवं रामनारायणं।
कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं।
जानकीनायकं रामचंद्रं भजे॥
महामंत्र
हरे राम हरे राम।
राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण।
कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥
हरे राम हरे राम।
राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण।
कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥
घालीन लोटांगण का भाव
“घालीन लोटांगण” एक भक्तिपूर्ण प्रार्थना है जिसमें भगवान के चरणों में नमन और श्रद्धा व्यक्त करने का भाव मिलता है।
इस पाठ में भक्त भगवान के स्वरूप को प्रेम और आनंद के साथ देखने तथा उनकी पूजा करने की भावना व्यक्त करता है।
यह भक्त और भगवान के बीच समर्पण और प्रेम के भाव को दर्शाने वाली प्रार्थना के रूप में पढ़ा जाता है।
त्वमेव माता च पिता त्वमेव का अर्थ
इस प्रसिद्ध प्रार्थना में भक्त भगवान को अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण सहारा मानते हुए माता, पिता, मित्र और ज्ञान के स्रोत के रूप में स्मरण करता है।
इसका मुख्य भाव पूर्ण श्रद्धा और ईश्वर के प्रति समर्पण से जुड़ा हुआ है।
गणेश आरती के बाद प्रार्थना का महत्व
आरती के बाद प्रार्थना करना विभिन्न धार्मिक और पारिवारिक परंपराओं का हिस्सा हो सकता है।
भक्त पूजा के बाद भगवान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और अपने विचारों तथा कर्मों को सकारात्मक दिशा देने की प्रार्थना करते हैं।
आरती के बाद पढ़े जाने वाले पाठ व्यक्ति को कुछ समय शांत होकर प्रार्थना और आध्यात्मिक चिंतन करने का अवसर भी दे सकते हैं।
गणेश चतुर्थी और शेंदुर लाल चढ़ायो आरती
गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है।
इस अवसर पर घरों और सार्वजनिक स्थानों पर भगवान गणेश की पूजा, भजन और आरती की जाती है।
“शेंदुर लाल चढ़ायो” गणेश भक्ति से जुड़ी लोकप्रिय आरतियों में से एक है और इसे भक्त विभिन्न गणेश पूजा अवसरों पर श्रद्धा के साथ गाते हैं।
गणेशोत्सव की परंपराएं भारत के अलग-अलग राज्यों और समुदायों में विविध रूपों में देखने को मिलती हैं।
श्री सिद्धिविनायक आरती कैसे करें?
पूजा की विधि व्यक्तिगत और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
सामान्य रूप से भक्त निम्न प्रकार से आरती कर सकते हैं:
1. पूजा स्थान को स्वच्छ रखें
पूजा से पहले स्थान को साफ और व्यवस्थित रखा जा सकता है।
2. भगवान गणेश का स्मरण करें
शांत मन से भगवान गणेश का स्मरण करें।
3. दीपक प्रज्वलित करें
अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार दीपक प्रज्वलित किया जा सकता है।
4. आरती गाएं
“शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुख को” आरती को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ पढ़ें या गाएं।
5. प्रार्थना करें
आरती के बाद भगवान गणेश के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और जीवन में सद्बुद्धि, विवेक और सकारात्मकता की प्रार्थना करें।
शेंदुर लाल चढ़ायो आरती से जुड़े सामान्य प्रश्न
शेंदुर लाल चढ़ायो किसकी आरती है?
शेंदुर लाल चढ़ायो भगवान श्री गणेश को समर्पित लोकप्रिय आरती है।
शेंदुर लाल का क्या अर्थ है?
“शेंदुर” शब्द लाल सिंदूर या शेंदूर से जुड़ा हुआ है। आरती में भगवान गणेश के शेंदूर से सुशोभित स्वरूप का वर्णन किया गया है।
शेंदुर लाल चढ़ायो आरती कब गाई जाती है?
इसे गणेश चतुर्थी, गणपति पूजा, बुधवार और अन्य गणेश भक्ति से जुड़े अवसरों पर अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार गाया जा सकता है।
आरती में गणराज किसे कहा गया है?
“गणराज” भगवान गणेश के लिए श्रद्धापूर्वक प्रयुक्त नाम है।
भगवान गणेश को विद्या सुखदाता क्यों कहा गया है?
भगवान गणेश को हिंदू परंपरा में बुद्धि और ज्ञान से जुड़ा देवता माना जाता है। इसी भक्तिभाव के कारण आरती में उन्हें विद्या सुखदाता कहा गया है।
क्या घर पर शेंदुर लाल चढ़ायो आरती कर सकते हैं?
हाँ। श्रद्धालु अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार घर पर भगवान गणेश का स्मरण और आरती कर सकते हैं।
गणेश आरती के बाद कौन से पाठ पढ़े जा सकते हैं?
यह व्यक्तिगत और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है। कई भक्त आरती के बाद घालीन लोटांगण, त्वमेव माता च पिता त्वमेव और अन्य भक्तिमय प्रार्थनाओं का पाठ करते हैं।
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भगवान गणेश और शेंदुर लाल चढ़ायो आरती के बारे में अधिक जानकारी
श्री गणेश और इस लोकप्रिय आरती के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप निम्न स्रोत देख सकते हैं:
- Saregama – Shendur Lal Chadhayo Ganesh Aarti Lyrics
- BhaktiRas – Shendur Lal Chadhayo Aarti Meaning and Significance
निष्कर्ष
शेंदुर लाल चढ़ायो आरती – श्री सिद्धिविनायक आरती भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा और भक्तिभाव व्यक्त करने वाली लोकप्रिय आरती है।
इस आरती में भगवान गणेश के गजमुख स्वरूप, उनकी महिमा, ज्ञान और मंगलकारी स्वरूप का वर्णन किया गया है।
आरती के बाद घालीन लोटांगण, त्वमेव माता च पिता त्वमेव और अन्य भक्तिमय प्रार्थनाओं का पाठ भी कई धार्मिक और पारिवारिक परंपराओं में किया जाता है।
भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार भगवान गणेश का स्मरण करते हुए इस आरती का पाठ कर सकते हैं।
॥ जय श्री गणेश ॥
॥ गणपति बप्पा मोरया ॥



