Ravi Dev Ki Aarti भगवान सूर्य देव को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। “जय जय जय रविदेव” से आरंभ होने वाली यह आरती भगवान रवि देव के प्रति श्रद्धा, समर्पण और भक्ति की भावना व्यक्त करती है।
भारतीय धार्मिक परंपराओं में भगवान सूर्य को विशेष श्रद्धा के साथ स्मरण किया जाता है। सूर्य को प्रकाश और ऊर्जा के प्राकृतिक स्रोत के रूप में भी देखा जाता है, जबकि धार्मिक परंपराओं में सूर्य देव की पूजा का अपना विशेष महत्व है।
इस लेख में आपको Ravi Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi, जय जय जय रविदेव आरती के संपूर्ण बोल, आरती का भक्तिमय भाव और सूर्य देव की आराधना से जुड़ी सामान्य जानकारी सरल भाषा में मिलेगी।
रवि देव की आरती | जय जय जय रविदेव
जय जय जय रविदेव,
जय जय जय रविदेव।
रजनीपति मदहारी,
शतदल जीवनदाता॥
षटपद मन मुदकारी,
हे दिनमणि दाता।
जग के हे रविदेव,
जय जय जय रविदेव॥
जय जय जय रविदेव,
जय जय जय रविदेव॥
नभ मंडल के वासी,
ज्योति प्रकाशक देवा।
निजजन हित सुखराशी,
तेरी हम सब सेवा॥
करते हैं रविदेव,
जय जय जय रविदेव।
जय जय जय रविदेव,
जय जय जय रविदेव॥
कनक बदन मन मोहित,
रुचिर प्रभा प्यारी।
निज मंडल से मंडित,
अजर अमर छविधारी॥
हे सुरवर रविदेव,
जय जय जय रविदेव।
जय जय जय रविदेव,
जय जय जय रविदेव॥
॥ जय श्री सूर्य देव ॥
॥ जय जय रविदेव ॥
रवि देव की आरती का भक्तिमय महत्व
रवि देव की आरती में भगवान सूर्य के प्रति श्रद्धा और समर्पण की भावना व्यक्त की जाती है। आरती के शब्दों में प्रकाश, ज्योति और भगवान रवि देव के दिव्य स्वरूप का स्मरण किया जाता है।
भक्तिमय परंपरा में आरती अपने आराध्य के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने का एक माध्यम है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में सूर्य पूजा तथा आरती की परंपराओं में कुछ अंतर हो सकता है।
आरती का मुख्य उद्देश्य केवल शब्दों का पाठ करना नहीं, बल्कि श्रद्धा, विनम्रता और एकाग्रता के साथ भगवान का स्मरण करना भी है।
भगवान रवि देव और सूर्य देव
रवि देव भगवान सूर्य के लिए प्रयुक्त एक श्रद्धापूर्ण नाम है। भारतीय परंपराओं में सूर्य देव को अनेक नामों से स्मरण किया जाता है।
धार्मिक साहित्य और पूजा परंपराओं में सूर्य, रवि, भास्कर, आदित्य और दिनकर जैसे नाम प्रचलित हैं।
प्राकृतिक दृष्टि से सूर्य पृथ्वी पर प्रकाश और ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। धार्मिक दृष्टि से सूर्य देव की आराधना भारतीय परंपराओं में लंबे समय से की जाती रही है।
Ravi Dev Ki Aarti कब पढ़ें?
भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान रवि देव की आरती का पाठ या गायन कर सकते हैं।
सामान्य रूप से भक्त निम्न अवसरों पर सूर्य देव का स्मरण कर सकते हैं:
- दैनिक पूजा के समय
- रविवार के दिन
- सूर्य पूजा के दौरान
- विशेष धार्मिक अवसरों पर
- भजन और कीर्तन के समय
- अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार विशेष पूजा के दौरान
पूजा और आरती का समय तथा विधि परिवार, क्षेत्र और धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
आरती के शब्दों का भक्तिमय भाव
प्रकाश और ज्योति का स्मरण
आरती में भगवान रवि देव को ज्योति और प्रकाश से जोड़कर स्मरण किया गया है।
भक्तिमय दृष्टि से प्रकाश को ज्ञान, सकारात्मकता और आशा के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।
श्रद्धा और सेवा की भावना
आरती के शब्द भगवान के प्रति श्रद्धा और सेवा का भाव व्यक्त करते हैं।
भक्ति परंपरा में सेवा और विनम्रता को महत्वपूर्ण भाव माना जाता है।
भगवान के दिव्य स्वरूप का वर्णन
आरती में भगवान रवि देव के सुंदर और दिव्य स्वरूप का भक्तिमय वर्णन किया गया है।
भक्त अपने आराध्य का स्मरण करते हुए श्रद्धा और प्रेम की भावना व्यक्त करता है।
रवि देव की आरती कैसे करें?
पूजा और आरती की विधि परिवार तथा धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
सामान्य रूप से भक्त निम्न प्रकार से श्रद्धापूर्वक पूजा कर सकते हैं:
- पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- भगवान सूर्य या रवि देव का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।
- अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री तैयार करें।
- शांत और एकाग्र मन से आरती का पाठ या गायन करें।
- आरती पूर्ण होने पर भगवान को प्रणाम करें।
- अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा पूर्ण करें।
यदि आप किसी विशेष मंदिर, धार्मिक संस्था या पारिवारिक परंपरा का पालन करते हैं, तो उसी परंपरा को प्राथमिकता देना उचित है।
रवि देव की आरती के बाद क्या करें?
आरती पूर्ण होने के बाद भक्त भगवान रवि देव को श्रद्धापूर्वक प्रणाम कर सकते हैं।
इसके बाद कुछ समय शांत मन से प्रार्थना की जा सकती है।
आप सरल भाव से इस प्रकार प्रार्थना कर सकते हैं:
हे भगवान सूर्य देव, हमारे जीवन में ज्ञान, सकारात्मकता और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें। हमारे मन में धैर्य, विनम्रता और सभी के प्रति सम्मान की भावना बनाए रखें।
इसके बाद अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा पूर्ण की जा सकती है।
Ravi Dev Ki Aarti से जुड़े सामान्य प्रश्न
रवि देव किसे कहा जाता है?
रवि देव भगवान सूर्य के लिए प्रयुक्त एक श्रद्धापूर्ण नाम है।
रवि देव की आरती किस भगवान को समर्पित है?
यह आरती भगवान सूर्य देव या रवि देव को समर्पित है।
Ravi Dev Ki Aarti कब पढ़ी जा सकती है?
भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार दैनिक पूजा, रविवार और अन्य धार्मिक अवसरों पर इस आरती का पाठ या गायन कर सकते हैं।
क्या रवि देव की आरती घर पर की जा सकती है?
हाँ, भक्त अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार घर पर श्रद्धा के साथ भगवान सूर्य देव की पूजा और आरती कर सकते हैं।
क्या सूर्य पूजा की विधि सभी जगह एक जैसी होती है?
नहीं। पूजा और आरती की विधि परिवार, क्षेत्र और धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
निष्कर्ष
Ravi Dev Ki Aarti भगवान सूर्य देव के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने वाली एक भक्तिमय आरती है।
“जय जय जय रविदेव” से आरंभ होने वाली यह आरती भगवान रवि देव के दिव्य स्वरूप और उनके प्रति भक्त की श्रद्धा का भाव व्यक्त करती है।
भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इस आरती का पाठ या गायन कर सकते हैं और श्रद्धा तथा विनम्रता के साथ भगवान सूर्य देव का स्मरण कर सकते हैं।
॥ जय श्री सूर्य देव ॥
॥ जय जय रविदेव ॥
॥ जय आदित्य देव ॥
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भगवान सूर्य और सौर विज्ञान के बारे में अधिक जानें
भगवान सूर्य से जुड़ी धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ सूर्य और हमारे सौर मंडल के बारे में वैज्ञानिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए स्रोत देख सकते हैं।
NASA – Sun and Solar System Information:
https://science.nasa.gov/sun/
Indian Space Research Organisation (ISRO):
https://www.isro.gov.in/
॥ जय श्री सूर्य देव ॥
॥ जय जय रविदेव ॥



