Krishna Janmashtami Pujan Vidhi: जन्माष्टमी की रात ऐसे करें लड्डू गोपाल का पूजन, जानें पूजा सामग्री से लेकर जन्म आरती तक

Krishna Janmashtami Pujan Vidhi – कृष्ण जन्माष्टमी पर बाल गोपाल की पूजा

Krishna Janmashtami Pujan Vidhi जानना चाहते हैं? जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का पावन पर्व है, जिसे भक्त उपवास, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा के साथ मनाते हैं। इस दिन घर के मंदिर में बाल गोपाल की स्थापना कर उनका पंचामृत से अभिषेक, सुंदर श्रृंगार और भोग लगाया जाता है। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के समय विशेष पूजा और आरती करने की परंपरा भी प्रचलित है।

इस लेख में जन्माष्टमी की पूजा सामग्री, पूजा स्थल की तैयारी, लड्डू गोपाल के अभिषेक और श्रृंगार, भोग अर्पण, मंत्र जाप, मध्यरात्रि पूजा तथा जन्म आरती से जुड़ी पूरी जानकारी सरल भाषा में दी गई है। जन्माष्टमी की पूजा और व्रत की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों एवं परिवारों में भिन्न हो सकती हैं, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि

यहां श्री कृष्ण जन्माष्टमी पूजन विधि (Janmashtami Complete Pujan Vidhi) के 16 प्रमुख चरण सरल भाषा में दिए गए हैं। भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा और श्रद्धा के अनुसार इन चरणों का पालन कर सकते हैं।

Janmashtami Puja Ki Samagri | जन्माष्टमी पूजा सामग्री

जन्माष्टमी की पूजा से पहले आवश्यक सामग्री एकत्र कर लें:

  • दही
  • दूध
  • शक्कर
  • शुद्ध घी
  • चंदन
  • पंचमेवा
  • ऋतुफल
  • आभूषण
  • सप्तधान्य
  • शहद (मधु)
  • खड़ा धनिया
  • पीतांबर वस्त्र
  • सप्तमृत्तिका
  • नैवेद्य एवं मिठाई
  • छोटी इलायची
  • श्रीफल (नारियल)
  • हल्दी की गांठ
  • धान्य (चावल, गेहूं)
  • आधा मीटर लाल कपड़ा
  • आधा मीटर सफेद कपड़ा
  • गुलाब और लाल कमल के फूल

Krishna Janmashtami Pujan Vidhi | कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि

1. ध्यान

पूजन आरंभ करने से पहले भगवान श्रीकृष्ण का शांत मन से ध्यान करें। उनकी प्रतिमा या तस्वीर के सामने बैठकर कुछ क्षण भगवान का स्मरण करें और इसके बाद पूजा की शुरुआत करें।

मंत्र:
वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्।
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥

2. आवाहन

ध्यान के बाद भगवान श्रीकृष्ण का विधिवत आवाहन करें। नीचे दिए गए मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र के सामने श्रद्धापूर्वक आवाहन करें।

मंत्र:
अनादिमाद्यं पुरुषोत्तमोत्तमं श्रीकृष्णचन्द्रं निजभक्तवत्सलम्।
स्वयं त्वसंख्याण्डपतिं परात्परं राधापतिं त्वां शरणं व्रजाम्यहम्॥

इसके बाद हाथ में तिल या जौ लेकर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सामने अर्पित करें।

3. अर्घ्य

अब भगवान श्रीकृष्ण को अर्घ्य अर्पित करें। हाथ में थोड़ा जल लेकर नीचे दिए गए मंत्र का श्रद्धापूर्वक उच्चारण करें।

मंत्र:
अर्घ्यं गृहाण देवेश गन्धपुष्पाक्षतैः सह।
करुणां कुरु मे देव! गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते॥

4. आचमन

अर्घ्य अर्पित करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण को आचमन के लिए जल समर्पित करें और इस मंत्र का जाप करें।

मंत्र:
सर्वतीर्थसमायुक्तं सुगन्धं निर्मलं जलम्।
आचम्यतां मया दत्तं गृहत्वा परमेश्वर॥

5. जल स्नान

आचमन के बाद भगवान श्रीकृष्ण को स्वच्छ जल से स्नान कराएं। इस दौरान निम्न मंत्र का जाप किया जा सकता है।

मंत्र:
गंगा सरस्वती रेवा पयोष्णी नर्मदाजलैः।
स्नापितोऽसि मया देव तथा शान्तिं कुरुष्व मे॥

6. पंचामृत अभिषेक

अब दूध, दही, घी, शहद और शक्कर को मिलाकर पंचामृत तैयार करें। इससे भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक करें और नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें।

मंत्र:
पञ्चामृतं मयानीतं पयो दधि घृतं मधु।
शर्करा च समायुक्तं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥

पंचामृत अभिषेक के बाद भगवान श्रीकृष्ण को पुनः स्वच्छ जल से स्नान कराएं।

7. वस्त्र अर्पण

स्नान के बाद भगवान श्रीकृष्ण को स्वच्छ पीले वस्त्र अर्पित करें। वस्त्र समर्पित करते समय निम्न मंत्र का जाप करें।

मंत्र:
शीतवातोष्णसंत्राणं लज्जाया रक्षणं परम्।
देहालङ्करणं वस्त्रमतः शान्तिं प्रयच्छ मे॥

8. यज्ञोपवीत

वस्त्र अर्पित करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण को यज्ञोपवीत समर्पित करें।

मंत्र:
यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।
आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥

9. इत्र अर्पण

इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण को सुगंधित द्रव्य जैसे इत्र अर्पित करें। इसे श्रद्धापूर्वक भगवान के श्रृंगार में समर्पित करें।

10. आभूषण अर्पण

भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का सुंदर श्रृंगार करें। उन्हें वस्त्रों के साथ मुकुट, हार और अन्य उपलब्ध आभूषण श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।

11. चंदन अर्पण

अब भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा पर चंदन अर्पित करें और निम्न मंत्र का जाप करें।

मंत्र:
श्रीखण्डचन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम्।
विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रतिगृह्यताम्॥

12. पुष्प समर्पण

चंदन अर्पित करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण को सुगंधित और ताजे पुष्प चढ़ाएं। अपनी श्रद्धा के अनुसार गुलाब और कमल के फूल भी अर्पित किए जा सकते हैं।

13. धूप और दीप

अब भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष धूप और दीप प्रज्वलित करें। श्रद्धापूर्वक धूप-दीप अर्पित करते हुए भगवान का स्मरण करें।

14. नैवेद्य

धूप और दीप अर्पित करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण को नैवेद्य और मिठाई अर्पित करें। नैवेद्य समर्पित करते समय निम्न मंत्र का जाप करें।

मंत्र:
इदं नानाविधि नैवेद्यानि ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
देवकीसुतं समर्पयामि॥

15. आरती

पूजन के अंतिम चरण में परिवार के सदस्यों के साथ भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें। आरती के बाद भगवान से परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

16. क्षमाप्रार्थना

पूजा पूर्ण होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष अपनी भूल-चूक के लिए विनम्रतापूर्वक क्षमा मांगें।

मंत्र:

आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥

इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण को प्रणाम करें और श्रद्धापूर्वक पूजा का समापन करें।

नोट: जन्माष्टमी की पूजा विधि, मंत्र और अनुष्ठानों में क्षेत्रीय एवं पारिवारिक परंपरा के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। पूजा करते समय अपनी परंपरा तथा स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें।

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