तुलसी विवाह हिंदू धर्म की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक है, जिसमें माता तुलसी का विवाह भगवान शालिग्राम से कराया जाता है। इसे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से जोड़कर देखा जाता है और कई परिवारों में तुलसी विवाह के अवसर पर विधि-विधान से पूजा, श्रृंगार और विवाह संस्कार संपन्न किए जाते हैं।
इस लेख में Tulsi Vivah Pujan Vidhi को सरल और क्रमवार तरीके से समझाया गया है। यहां आप तुलसी विवाह की तैयारी, आवश्यक पूजन सामग्री, तुलसी माता के श्रृंगार, भगवान शालिग्राम की पूजा, विवाह की रस्मों और आरती से जुड़े प्रमुख चरणों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। पूजा की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती हैं, इसलिए अपनी पारिवारिक एवं स्थानीय मान्यताओं के अनुसार विधि का पालन करें।
तुलसी विवाह पूजन विधि
तुलसी विवाह के अवसर पर पूजा और विवाह की रस्में श्रद्धा एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न की जाती हैं। पूजन की विधि को सरल क्रम में इस प्रकार किया जा सकता है:
1. स्वच्छ वस्त्र धारण करें
तुलसी विवाह के दिन परिवार के सभी सदस्य स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा के लिए तैयार हों।
2. तुलसी माता को स्थापित करें
तुलसी के पौधे को आंगन या पूजा स्थल के बीच में उचित स्थान पर स्थापित करें और आसपास का स्थान स्वच्छ रखें।
3. विवाह मंडप सजाएं
तुलसी माता के लिए बनाए गए मंडप के दोनों ओर गन्ने लगाकर विवाह स्थल को पारंपरिक रूप से सजाएं।
4. सुहाग सामग्री अर्पित करें
अब तुलसी माता को सुहाग से जुड़ी सामग्री जैसे कुमकुम, हल्दी, मेहंदी, चूड़ी आदि श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
5. शालिग्राम जी की स्थापना करें
तुलसी के गमले के समीप एक चौकी रखें और उस पर भगवान शालिग्राम जी की मूर्ति स्थापित करें।
6. कलश स्थापित करें
पूजा स्थल पर कलश की स्थापना करें। कलश में स्वच्छ जल भरकर उसे पूजा की सामग्री के साथ विधिपूर्वक स्थापित करें।
7. कलश को सजाएं
कलश के ऊपर पांच आम के पत्ते रखें। इसके बाद लाल कपड़े में लपेटा हुआ नारियल कलश के ऊपर स्थापित करें।
8. दीपक जलाकर शालिग्राम जी का शुद्धिकरण करें
घी का दीपक प्रज्वलित करें। इसके बाद भगवान शालिग्राम जी पर गंगाजल का छिड़काव करके उन्हें पूजन के लिए शुद्ध करें।
9. पंचामृत से अभिषेक करें
शालिग्राम जी का पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद उन्हें श्रद्धापूर्वक पीले वस्त्र अर्पित करें।
10. हल्दी अर्पित करें
वस्त्र अर्पित करने के बाद तुलसी माता और भगवान शालिग्राम जी को हल्दी का लेप लगाएं।
11. तुलसी माता की परिक्रमा करें
पूजन सामग्री अर्पित करने के बाद भगवान शालिग्राम जी को साथ लेकर तुलसी माता की सात बार परिक्रमा करें। इसे तुलसी विवाह की प्रमुख रस्मों में माना जाता है।
12. शालिग्राम जी को उठाने की परंपरा
परंपरागत मान्यता के अनुसार, परिक्रमा के समय भगवान शालिग्राम जी को घर के किसी पुरुष सदस्य द्वारा उठाया जाता है।
13. आरती और भोग लगाएं
सात परिक्रमा पूरी होने के बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर तुलसी माता और भगवान शालिग्राम जी की आरती करें। इसके बाद श्रद्धानुसार भोग अर्पित करें।
14. मंगल गीत गाएं
यदि परिवार की महिलाओं को तुलसी विवाह या विवाह संस्कार से जुड़े पारंपरिक मंगल गीत आते हैं, तो पूजा और विवाह की रस्मों के दौरान श्रद्धापूर्वक उनका गायन किया जा सकता है।



