Ganesh Chaturthi Puja Vidhi: गणेश चतुर्थी पर कैसे करें गणपति पूजा? जानें संपूर्ण विधि

Ganesh Chaturthi Puja Vidhi – गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा विधि

Ganesh Chaturthi Puja Vidhi में जानें गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर भगवान श्री गणेश की पूजा करने की सरल और पारंपरिक विधि। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। गणेश चतुर्थी पर भक्त श्रद्धापूर्वक गणपति की प्रतिमा स्थापित करके उनका आवाहन, स्नान, श्रृंगार, पूजन, भोग और आरती करते हैं।

इस लेख में गणेश चतुर्थी पूजा की तैयारी, आवश्यक पूजा सामग्री, गणपति स्थापना, पंचामृत अभिषेक, दूर्वा और मोदक अर्पित करने की विधि, मंत्र, आरती तथा पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें आसान भाषा में दी गई हैं। पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त स्थान एवं पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार सही समय देखना उचित है।

गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री और पूजा विधि

Ganesh Chaturthi Pujan Samagri | गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री

गणेश चतुर्थी पर भगवान श्री गणेश की पूजा के लिए अपनी परंपरा और आवश्यकता के अनुसार निम्न पूजन सामग्री तैयार कर सकते हैं:

  • घी
  • कपूर
  • फल
  • पुष्प
  • धतूरा
  • अक्षत
  • सिंदूर
  • हल्दी
  • मोदक
  • पंचामृत
  • कुमकुम
  • बिल्व पत्र
  • दूर्वा घास
  • सिंहासन
  • चंदन का पेस्ट
  • अगरबत्ती
  • आम के पत्ते
  • लाल कपड़ा
  • पान के पत्ते
  • मेवा
  • तुलसी का पत्ता
  • अशोक का पत्ता
  • घी का दीपक और बत्ती
  • छोटा पात्र
  • भगवान श्री गणेश की मूर्ति

Ganesh Chaturthi Puja Vidhi | गणेश चतुर्थी पूजा विधि

गणेश चतुर्थी की पूजा में भगवान श्री गणेश का विधिपूर्वक ध्यान, आवाहन, पूजन, नैवेद्य और आरती की जाती है। पूजा के प्रमुख चरण इस प्रकार हैं:

1. ध्यान

पूजा का आरंभ भगवान श्री गणेश के ध्यान से करें। अपने सामने स्थापित गणेश जी की प्रतिमा के सामने बैठकर शांत मन से उनका स्मरण करें और पूजा के लिए मन को एकाग्र करें।

2. आवाहन

गणेश जी का ध्यान करने के बाद उनके समक्ष श्रद्धापूर्वक मंत्र का जाप करें और आवाहन मुद्रा के माध्यम से भगवान का पूजन में स्वागत करें।

3. पुष्पांजलि

भगवान गणेश का आवाहन करने के बाद दोनों हाथों में पांच पुष्प लें। मंत्र का जाप करते हुए पुष्प गणेश जी की प्रतिमा के सामने अर्पित करें और उन्हें आसन समर्पित करें।

4. स्वागत

पुष्पों से आसन अर्पित करने के बाद हाथ जोड़कर भगवान श्री गणेश का श्रद्धापूर्वक स्वागत करें और उन्हें पूजा स्वीकार करने के लिए प्रार्थना करें।

5. पाद्य

स्वागत के बाद मंत्र का जाप करते हुए भगवान गणेश के चरणों के प्रतीकात्मक प्रक्षालन के लिए जल अर्पित करें।

6. अर्घ्य

पाद्य अर्पित करने के बाद भगवान गणेश को अर्घ्य दें। इस दौरान श्रद्धापूर्वक निम्न मंत्र का जाप किया जा सकता है:

नमस्ते देवा-देवेश! नमस्ते धरणी-धारा!
नमस्ते जगदाधारा, गणेश! अर्घ्यम् गृहाण।
गन्ध-पुष्पाक्षतैर्युक्तं, फल-द्रव्य-समन्वितम्।
गृहाण तोयमर्घ्यार्थं, परमेश्वर वत्सल!
श्री गणेश-देवाय अर्घ्यं स्वाहा॥

7. गंध एवं चंदन समर्पण

अर्घ्य अर्पित करने के बाद मंत्र का जाप करते हुए भगवान श्री गणेश को चंदन अर्पित करें। चंदन को श्रद्धापूर्वक उनके चरणों में या प्रतिमा पर समर्पित करें।

8. पुष्प समर्पण

इसके बाद भगवान गणेश को ताजे और स्वच्छ पुष्प अर्पित करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार पुष्पों के साथ दूर्वा भी अर्पित कर सकते हैं।

9. धूप समर्पण

गणेश मंत्र का जाप करते हुए भगवान श्री गणेश के समक्ष धूप जलाएं और उसे श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।

10. दीप समर्पण

धूप अर्पित करने के बाद घी का दीपक प्रज्वलित करें और भगवान गणेश को दीप समर्पित करें।

11. नैवेद्य समर्पण

अब भगवान श्री गणेश को नैवेद्य अर्पित करें। गणेश जी को मोदक, फल और अन्य सात्त्विक प्रसाद अपनी श्रद्धा के अनुसार अर्पित किया जा सकता है।

12. आचमन एवं जल समर्पण

नैवेद्य अर्पित करने के बाद भगवान गणेश को आचमन के लिए जल समर्पित करें। इसके बाद पूजा की परंपरा के अनुसार जल अर्पित करें।

13. ताम्बूल समर्पण

अगले चरण में मंत्र का जाप करते हुए भगवान श्री गणेश को ताम्बूल यानी पान और सुपारी अर्पित करें।

14. दक्षिणा

पूजा के अगले चरण में श्रद्धापूर्वक भगवान श्री गणेश को दक्षिणा समर्पित करें। दक्षिणा अपनी सामर्थ्य और धार्मिक परंपरा के अनुसार अर्पित की जा सकती है।

15. प्रदक्षिणा

अब भगवान श्री गणेश की प्रतीकात्मक प्रदक्षिणा करें। पूजा की परंपरा के अनुसार फूल अर्पित करते हुए गणेश जी की परिक्रमा का संकल्प किया जा सकता है।

16. साष्टांग प्रणाम

मंत्र का जाप करते हुए भगवान श्री गणेश को साष्टांग प्रणाम करें और उनके चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करें।

17. क्षमा-प्रार्थना

पूजा के दौरान जाने-अनजाने में हुई किसी भी भूल या त्रुटि के लिए भगवान श्री गणेश से विनम्रतापूर्वक क्षमा मांगें।

18. रक्षा प्रार्थना

षोडशोपचार पूजा पूर्ण होने के बाद भगवान श्री गणेश से अपने और अपने परिवार की रक्षा, सुख, शांति और मंगल के लिए प्रार्थना करें। अंत में गणेश जी की आरती करें और प्रसाद सभी भक्तों में वितरित करें।

नोट: गणेश चतुर्थी की पूजा विधि और मंत्रों में क्षेत्र, परिवार तथा धार्मिक परंपरा के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। पूजा करते समय अपनी पारंपरिक विधि और स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें।

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