Shri Hari Stotram Lyrics in Hindi 2026 | श्री हरि स्तोत्रम् | Powerful Lord Vishnu Mantra

Shri Hari Stotram Lyrics in Hindi – भगवान विष्णु की स्तुति

Shri Hari Stotram Lyrics in Hindi का यह विशेष लेख भगवान श्री हरि विष्णु की स्तुति और भक्ति को समर्पित है। श्री हरि स्तोत्रम् को भगवान विष्णु के दिव्य स्वरूप, गुणों और महिमा के स्मरण से जुड़ी एक भक्तिमय स्तुति के रूप में पढ़ा और सुना जाता है।

इस पोस्ट में Shri Hari Stotram, Hari Stotram Lyrics, Lord Vishnu Mantra, Vishnu Stotram और श्री हरि स्तोत्रम् से संबंधित सामग्री को सरल और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया है, ताकि भक्त इसे आसानी से पढ़ सकें और अपनी पूजा या दैनिक आध्यात्मिक दिनचर्या में शामिल कर सकें।

भगवान विष्णु को सनातन परंपरा में जगत के पालनकर्ता के रूप में पूजा जाता है। उनके नाम और स्तुति का स्मरण श्रद्धा, भक्ति और आत्मिक शांति की भावना से जुड़ा माना जाता है। Shri Hari Stotram का पाठ विशेष रूप से विष्णु भक्ति, पूजा और प्रार्थना के समय किया जा सकता है।

यदि आप Shri Hari Stotram Lyrics in Hindi, Lord Vishnu Mantra, Vishnu Ji Ke Stotra, Hari Stotram या भगवान विष्णु की स्तुति खोज रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी भक्तिमय सामग्री प्रस्तुत करता है।

श्रद्धा के साथ श्री हरि विष्णु का स्मरण करें और उनकी दिव्य महिमा को अपने मन में धारण करें।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

श्री हरि स्तोत्रम् — हिंदी लिरिक्स

Shri Hari Stotram Lyrics in Hindi | भगवान विष्णु की भक्तिमय स्तुति

भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित श्री हरि स्तोत्रम् की मूल स्तुति नीचे व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत है। पाठ को साफ-सुथरे प्रारूप में रखा गया है, जबकि मंत्र और श्लोक के मूल शब्दों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

श्री हरि स्तोत्रम्

श्लोक 1

जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालं
शरच्चन्द्रभालं महादैत्यकालं
नभोनीलकायं दुरावारमायं
सुपद्मासहायम् भजेऽहं भजेऽहं॥1॥

श्लोक 2

सदाम्भोधिवासं गलत्पुष्पहासं
जगत्सन्निवासं शतादित्यभासं
गदाचक्रशस्त्रं लसत्पीतवस्त्रं
हसच्चारुवक्त्रं भजेऽहं भजेऽहं॥2॥

श्लोक 3

रमाकण्ठहारं श्रुतिव्रातसारं
जलान्तर्विहारं धराभारहारं
चिदानन्दरूपं मनोज्ञस्वरूपं
ध्रुतानेकरूपं भजेऽहं भजेऽहं॥3॥

श्लोक 4

जराजन्महीनं परानन्दपीनं
समाधानलीनं सदैवानवीनं
जगज्जन्महेतुं सुरानीककेतुं
त्रिलोकैकसेतुं भजेऽहं भजेऽहं॥4॥

श्लोक 5

कृताम्नायगानं खगाधीशयानं
विमुक्तेर्निदानं हरारातिमानं
स्वभक्तानुकूलं जगद्व्रुक्षमूलं
निरस्तार्तशूलं भजेऽहं भजेऽहं॥5॥

श्लोक 6

समस्तामरेशं द्विरेफाभकेशं
जगद्विम्बलेशं ह्रुदाकाशदेशं
सदा दिव्यदेहं विमुक्ताखिलेहं
सुवैकुण्ठगेहं भजेऽहं भजेऽहं॥6॥

श्लोक 7

सुरालिबलिष्ठं त्रिलोकीवरिष्ठं
गुरूणां गरिष्ठं स्वरूपैकनिष्ठं
सदा युद्धधीरं महावीरवीरं
महाम्भोधितीरं भजेऽहं भजेऽहं॥7॥

श्लोक 8

रमावामभागं तलानग्रनागं
कृताधीनयागं गतारागरागं
मुनीन्द्रैः सुगीतं सुरैः संपरीतं
गुणौधैरतीतं भजेऽहं भजेऽहं॥8॥

फलश्रुति

इदं यस्तु नित्यं समाधाय चित्तं
पठेदष्टकं कण्ठहारम् मुरारे:
स विष्णोर्विशोकं ध्रुवं याति लोकं
जराजन्मशोकं पुनर्विन्दते नो ॥9॥

श्री हरि स्तोत्रम् का भक्तिमय पाठ

श्री हरि स्तोत्रम् भगवान विष्णु के स्वरूप, महिमा और दिव्य गुणों की स्तुति करने वाली भक्तिमय रचना है। श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार इसका पाठ पूजा, प्रार्थना या दैनिक आध्यात्मिक साधना के समय कर सकते हैं।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

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