Maa Durga Pujan Vidhi | माँ दुर्गा पूजा विधि: जानिए संपूर्ण पूजन क्रम और आवश्यक विधियां

Maa Durga Pujan Vidhi – माँ दुर्गा पूजा विधि

Maa Durga Pujan Vidhi: मां दुर्गा की पूजा श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधान के साथ करने से भक्त आध्यात्मिक शांति और सकारात्मकता की कामना करते हैं। नवरात्रि, दुर्गाष्टमी या किसी विशेष अवसर पर देवी दुर्गा के पूजन में ध्यान, आवाहन, आसन, स्नान, वस्त्र, पुष्प, धूप-दीप, नैवेद्य और आरती जैसे विभिन्न चरण शामिल किए जाते हैं। इस लेख में आपको Maa Durga Pujan Vidhi सरल और क्रमबद्ध तरीके से बताई गई है, ताकि पूजा की तैयारी से लेकर समापन तक प्रत्येक चरण को आसानी से समझा जा सके। साथ ही, पूजन में उपयोग होने वाली सामग्री और देवी को अर्पित किए जाने वाले प्रमुख पूजन द्रव्यों की जानकारी भी यहां दी गई है।

माँ दुर्गा पूजा विधि | Maa Durga Pujan Vidhi

मां दुर्गा की पूजा में श्रद्धा, शुद्धता और विधि-विधान का विशेष महत्व माना जाता है। नीचे माँ दुर्गा पूजन विधि को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत किया गया है। पूजा के प्रत्येक चरण में आवश्यक सामग्री अर्पित करते हुए संबंधित मंत्र का जाप किया जा सकता है।

1. देवी दुर्गा का आवाहन

पूजन का आरंभ मां दुर्गा के ध्यान और आवाहन से करें। देवी की प्रतिमा के सामने बैठकर आवाहन मुद्रा बनाएं। दोनों हथेलियों को जोड़कर और अंगूठों को भीतर की ओर मोड़कर आवाहन मुद्रा बनाई जाती है। इसके बाद नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

सर्वमंगला मंगलये शिव सर्वार्थ साधिक।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तु ते॥
ब्रह्मरूपे सदानंद परमानंद स्वरूपिणी।
द्रुत सिद्धिप्रदे देवी नारायणी नमोस्तु ते॥
शरणगतदीनर्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यर्त्तिहारे देवी नारायणी नमोस्तु ते॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
आवाहनं समरपयामी॥

2. देवी को आसन अर्पण

मां दुर्गा का आवाहन करने के पश्चात दोनों हाथों में पांच पुष्प लेकर उन्हें देवी की प्रतिमा के समक्ष अर्पित करें। मंत्र का जाप करते हुए माता को आसन समर्पित करें।

मंत्र:

अनेका रत्नासंयुक्तम् नानमणिगननवितम्।
कार्तस्वरमयम दिव्यासनम् प्रतिगृह्यताम्।
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
आसनम समरपयामी॥

3. पाद्य जल समर्पण

आसन अर्पित करने के बाद मां दुर्गा के चरणों के प्रक्षालन के लिए जल अर्पित करें और निम्न मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

गंगादि सर्वतीर्थेभ्यो माया प्रस्थानायृतम्।
तोयमेतत्सुखस्पर्श पद्यार्थम प्रतिगृह्यतम॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
पद्यम समरपयामी॥

4. अर्घ्य अर्पण

पाद्य के बाद देवी को सुगंधित जल से अर्घ्य दें। इस दौरान निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करें।

मंत्र:

गन्धपुष्पक्षतार्युक्तमर्ग्यम् सम्पादितम् माया।
गृहण त्वं महादेवी प्रसन्ना भव सर्वदा
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
अर्घ्यम समरपयामी॥

5. आचमन के लिए जल

अर्घ्य समर्पित करने के बाद देवी दुर्गा को आचमन के लिए जल अर्पित करें और मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

अचम्यतम त्वय देवी भक्ति में हाइचलम कुरु।
इप्सितं में वरम देही परात्रा चा परम गति॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
अचमनियम जालम समरपयामी॥

6. स्नान एवं अभिषेक

आचमन के बाद देवी दुर्गा को स्नान के लिए जल अर्पित करें। इसके साथ दिए गए मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

पयोदाधि घृतं क्षीराम सीताय चा समन्वितं।
पंचामृतमनेनाद्य कुरु स्नानम दयानिधे
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
सन्नियम जालम समरपयामी॥

7. नवीन वस्त्र अर्पित करें

स्नान के पश्चात मां दुर्गा को नए वस्त्र अथवा मौली अर्पित करें और नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

स्त्रम् चा सोमा दैवत्यम लज्जयस्तु निवारणम।
माया निवेदितं भक्ति गृहण परमेश्वरी
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
वस्त्रम समरपयामी॥

8. आभूषण समर्पण

वस्त्र अर्पित करने के बाद देवी को आभूषण अर्पित करें।

मंत्र:

हारा कनकना केयूरा मेखला कुंडलादिभिह।
रत्नाध्याम कुंडलोपेटम भूषणम प्रतिगृह्यतम॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
अभूषणं समरपयामी॥

9. चंदन अर्पण

आभूषण समर्पित करने के बाद मां दुर्गा को चंदन अर्पित करें।

मंत्र:

चंदन समर्पण मंत्र हिंदी में
परमानंद सौभाग्यम परिपूर्णम दिगंतरे।
गृहण परमम गंधम कृपाय परमेश्वरी
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
चंदनम समरपयामी॥

10. रोली एवं कुमकुम अर्पण

अब देवी दुर्गा को रोली या कुमकुम अर्पित करें। इसे सौभाग्य के प्रतीक के रूप में समर्पित करते हुए मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

कुमकुम कांतिदं दिव्यं कामिनी काम संभवं।
कुमकुमेनारचिटे देवी प्रसाद परमेश्वरी
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
कुमकुम समरपयामी॥

11. काजल अर्पण

कुमकुम के बाद मां दुर्गा को काजल अर्पित करें और नीचे दिए मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

कज्जलम कज्जलम रामयम सुभगे शांतिकारीके।
करपुरा ज्योतिरुत्पन्नम गृहण परमेश्वरी
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
कज्जलम समरपयामी॥

12. सौभाग्य एवं सुगंधित द्रव्य अर्पण

सौभाग्य सूत्र

काजल अर्पित करने के बाद मां दुर्गा को सौभाग्य सूत्र समर्पित करें।

मंत्र:

सौभाग्यसूत्रम वरदे सुवर्णा मणि संयुक्त।
कंठे बदनामी देवेशी सौभाग्यम् देही में सदा॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
सौभाग्यसूत्रम समरपयामी॥

सुगंधित द्रव्य

इसके बाद देवी को चंदन, अगरु, कपूर अथवा अन्य सुगंधित द्रव्य अर्पित करें।

मंत्र:

चंदनागरु करपुरैः संयुक्तम कुंकुमं तथा।
कस्तूरीदि सुगंधाश्चा सर्वंगेशु विलेपनम्॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
सुगंधिताद्रव्यं समरपयामी॥

हल्दी अर्पण

अब मां दुर्गा को हल्दी समर्पित करें।

मंत्र:

हरिद्रा समर्पण मंत्र हिंदी में
हरिद्ररंजित देवी सुखा सौभाग्यदायिनी।
तस्मत्तवं पुजायमयात्रा सुखाशांतिम प्रयाच मे॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
हरिद्राचूर्णम समरपयामी॥

अक्षत समर्पण

हल्दी के बाद देवी को अक्षत यानी अखंड चावल अर्पित करें।

मंत्र:

अक्षत समर्पण मंत्र हिंदी में
रंजीता कंकुमौद्येन न अक्षतशचतिशोभनः।
ममाइशा देवी दनेना प्रसन्ना भव शोभने॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
अक्षतन समरपयामी॥

13. पुष्पांजलि अर्पण

मां दुर्गा को विभिन्न पुष्पों से पुष्पांजलि अर्पित करें और निम्न मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

मंदरा पारिजातदि पाटली केतकनी चा।
जाति चंपक पुष्पाणी गृहणमणि शोभने॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
पुष्पांजलि समरपयामी॥

14. बिल्वपत्र समर्पित करें

इसके बाद देवी दुर्गा को बिल्वपत्र अर्पित करें।

मंत्र:

अमृतोद्भव श्रीवृक्षो महादेवी ! प्रिया सदा।
बिल्वपत्रम प्रयाचमी पवित्रम् ते सुरेश्वरी॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
बिल्वपत्रानी समरपयामी॥

15. धूप अर्पण

अब मां दुर्गा के समक्ष धूप प्रज्वलित करके देवी को धूप समर्पित करें।

मंत्र:

दशंग गुग्गुल धूपम चंदनागरु संयुक्तम।
समरपिताम् माया भक्त महादेवी! प्रतिगृह्यतम:
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
धूपमघ्रपयामी॥

16. दीप प्रज्वलित करें

धूप के बाद देवी के समक्ष घी का दीपक जलाएं और दीप समर्पित करें।

मंत्र:

घृतवर्त्तिसमायुक्तम महतेजो महोज्जवलम।
दीपम दशयामी देवेशी! सुप्रीता भव सर्वदा
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
दीपम दर्शयामी॥

17. नैवेद्य अर्पण

अब मां दुर्गा को श्रद्धापूर्वक नैवेद्य अर्पित करें और मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

अन्नम चतुर्विद्म् स्वदु रसैः शद्भिः समन्वयम्।
नैवेद्य गृह्यतम देवी! भक्ति में हयाचल कुरु
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
नैवेद्यम निवेदयामी॥

18. ऋतु फल अर्पित करें

मां दुर्गा को उपलब्ध मौसमी फलों का भोग लगाएं।

मंत्र:

द्राक्षखरजुरा कदलीफला समरकपित्तकम।
नारीकेलेक्षुजंबादी फलानी प्रतिगृह्यताम्॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
ऋतुफलानी समरपयामी॥

19. पुनः आचमन जल अर्पण

नैवेद्य और फल अर्पित करने के बाद देवी को आचमन के लिए जल समर्पित करें।

मंत्र:

कमरीवल्लभे देवी करवाचामनमंबाइक।
निरंतरमहं वंदे चरणौ तवा चंडीके
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
अचमनियम जालम समरपयामी॥

20. नारियल अर्पण

अब मां दुर्गा को नारियल अर्पित करें और नीचे दिए मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

नरिकेलम चा नारंगिम कलिंगमंजीराम तवा।
उर्वरुका चा देवेशी फलनयतनी गह्यतम॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
नारीकेलम समरपयामी॥

21. ताम्बूल अर्पित करें

देवी को सुपारी के साथ ताम्बूल अर्थात पान अर्पित करें।

मंत्र:

एलावंगम कस्तूरी करपुरैह पुष्पवसीतम।
विटिकम् मुखवसार्थ समरपयामी सुरेश्वरी॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
तंबुलम समरपयामी॥

22. दक्षिणा समर्पित करें

पूजन के इस चरण में मां दुर्गा को श्रद्धानुसार दक्षिणा अर्पित करें।

मंत्र:

पूजा फला समृद्धिअर्थ तवाग्रे स्वर्णमेश्वरी।
स्थपितं तेना में प्रीता पूर्णन कुरु मनोरमम॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
दक्षिणम समरपयामी॥

23. पुस्तक, दीप एवं कन्या पूजन

पुस्तक पूजन

दक्षिणा अर्पित करने के बाद दुर्गा पूजा में उपयोग की गई धार्मिक पुस्तकों का पूजन करें।

मंत्र:

नमो देवयै महादेवयै शिवायै सत्तम नमः।
नमः प्रकृतिै भद्रायै नियतः प्रणतः स्मातम:
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
पुस्तक पुजायामी॥

दीप पूजन

पुस्तक पूजन के बाद पूजा में प्रज्वलित दीपक का पूजन करें।

मंत्र:

शुभम भवतु कल्याणमारोग्यम पुष्टिवर्धनम्।
आत्मतत्त्व प्रबोधय दीपज्योतिर्नामोस्तु ते॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
दीपम पुजायामी॥

कन्या पूजन

दुर्गा पूजा में कन्या पूजन की परंपरा भी विशेष मानी जाती है। कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भोजन कराने के बाद उन्हें दक्षिणा या उपहार अर्पित करें।

मंत्र:

सर्वस्वरूपे! सर्वेशे सर्वशक्ति स्वरुपिणी।
पूजम गृहण कुमारी! जगनमातरनामोस्तु ते
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
कन्या पुजायामी॥

24. मां दुर्गा की आरती

पूजन के अंत में मां दुर्गा की आरती करें और नीचे दिए मंत्र का जाप करते हुए कपूर से आरती समर्पित करें।

मंत्र:

निरजनं सुमंगलम करपुरेण समन्वितम्।
चन्द्रकवाहनी सद्रिशं महादेवी ! नमोस्तु ते॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
कर्पूरा निरजनम समरपयामी॥

25. देवी की प्रदक्षिणा

अब फूलों के माध्यम से मां दुर्गा की प्रतीकात्मक प्रदक्षिणा करें और निम्न मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

प्रदक्षिणं त्रयं देवी प्रायत्नेन प्राकल्पितम्।
पश्याद्य पवने देवी अंबिकायै नमोस्तु ते॥
Om भुर्भुवाह स्वाः दुर्गादेवयै नमः
प्रदक्षिणं समरपयामी॥

26. पूजा में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा-प्रार्थना

अंत में मां दुर्गा के समक्ष पूजा के दौरान हुई किसी भी ज्ञात या अज्ञात भूल के लिए क्षमा-याचना करें।

मंत्र:

अपराधा शतम देवी मातक्रितम चा दिन भोजन।
क्षम्यतम पवने देवी-देवेश नमोस्तु ते॥

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