Shendur Lal Chadhayo Achchha Gajmukhko भगवान श्री गणेश को समर्पित एक प्रसिद्ध भक्तिमय आरती है। इस आरती में भगवान गणेश के दिव्य स्वरूप, उनकी महिमा और मंगलकारी भाव का वर्णन किया गया है।
इस लेख में आपको Shendur Lal Chadhayo Lyrics in Hindi, संपूर्ण आरती के बोल, इसका भक्तिमय महत्व, आरती कब की जा सकती है और भगवान गणेश की आराधना से संबंधित सामान्य जानकारी सरल भाषा में मिलेगी।
शेंदुर लाल चढ़ायो गणेश आरती का भक्तिमय महत्व
भगवान गणेश को हिंदू परंपरा में श्रद्धा के साथ विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता के रूप में स्मरण किया जाता है। अनेक परिवारों में किसी शुभ कार्य या पूजा के आरंभ में भगवान गणेश का स्मरण करने की परंपरा है।
शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको आरती में भगवान गणेश के सुंदर गजमुख स्वरूप और उनके प्रति भक्त की श्रद्धा का भाव दिखाई देता है।
आरती का मुख्य उद्देश्य केवल शब्दों का पाठ करना नहीं, बल्कि श्रद्धा, विनम्रता और भक्ति के साथ अपने आराध्य का स्मरण करना भी है।
Shendur Lal Chadhayo Ganesh Aarti कब करें?
भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान गणेश की आरती कर सकते हैं।
सामान्य रूप से यह आरती निम्न अवसरों पर की जा सकती है:
- दैनिक गणेश पूजा के समय
- गणेश चतुर्थी के अवसर पर
- बुधवार की पूजा के दौरान
- किसी शुभ कार्य के आरंभ से पहले
- घर में होने वाले भजन या कीर्तन के समय
- विशेष धार्मिक अवसरों पर
पूजा की विधि और आरती का समय परिवार, क्षेत्र और धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको — गणेश आरती
शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको।
दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको॥
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता॥
हाथ लिए गुड़-लड्डू साईं सुरवरको।
महिमा कहे न जाय, लागत हूँ पादको॥१॥
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता॥
अष्टौ सिद्धि दासी, संकट को बैरी।
विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी॥
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता॥
कोटि सूरज प्रकाश, ऐसी छवि तेरी।
गंडस्थल मदमस्तक झूले, शशि बिहारी॥२॥
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता॥
भाव-भगत से कोई शरणागत आवे।
संतत संपत्ति सबही भरपूर पावे॥
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता॥
ऐसे तुम महाराज, मोको अति भावे।
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे॥३॥
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता॥
आरती के शब्दों का भक्तिमय भाव
इस आरती में भगवान गणेश के प्रति भक्त की श्रद्धा और समर्पण व्यक्त किया गया है।
भगवान गणेश का दिव्य स्वरूप
आरती में भगवान गणेश के गजमुख स्वरूप और उनके सुंदर श्रृंगार का वर्णन मिलता है। भक्त अपने आराध्य के स्वरूप का स्मरण करते हुए उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करता है।
विद्या और सद्बुद्धि की प्रार्थना
भगवान गणेश को विद्या और बुद्धि से भी जोड़ा जाता है। इसी कारण अनेक भक्त अध्ययन, नए कार्य और शुभ अवसरों से पहले भगवान गणेश का स्मरण करते हैं।
विघ्नों से मुक्ति की प्रार्थना
धार्मिक परंपरा में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता है। भक्त उनकी आराधना करते हुए जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने के लिए शक्ति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करते हैं।
भगवान गणेश की आरती कैसे करें?
आरती की विधि परिवार और स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सामान्य रूप से भक्त निम्न प्रकार से पूजा कर सकते हैं:
- पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- भगवान गणेश का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।
- अपनी परंपरा के अनुसार दीपक और पूजा सामग्री तैयार करें।
- श्रद्धा के साथ गणेश आरती का पाठ या गायन करें।
- आरती पूर्ण होने पर भगवान गणेश को प्रणाम करें।
- अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार प्रसाद ग्रहण करें।
यदि आप किसी विशेष मंदिर, संप्रदाय या गुरु परंपरा का पालन करते हैं, तो उसी परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित है।
गणेश आरती के बाद क्या करें?
आरती पूर्ण होने के बाद भक्त भगवान गणेश को प्रणाम कर सकते हैं और अपने जीवन तथा परिवार के लिए सद्बुद्धि, शांति और मंगल की प्रार्थना कर सकते हैं।
आप सरल भाव से इस प्रकार प्रार्थना कर सकते हैं:
हे श्री गणेश, हमें सद्बुद्धि और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें। हमारे मन में श्रद्धा, विनम्रता और सकारात्मकता का भाव बनाए रखें।
Shendur Lal Chadhayo Aarti से जुड़े सामान्य प्रश्न
शेंदुर लाल चढ़ायो आरती किस भगवान को समर्पित है?
यह आरती भगवान श्री गणेश को समर्पित है।
गणेश जी की यह आरती कब पढ़ी जा सकती है?
भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार दैनिक पूजा, गणेश चतुर्थी, बुधवार और अन्य शुभ अवसरों पर इस आरती का पाठ या गायन कर सकते हैं।
क्या यह आरती घर पर की जा सकती है?
हाँ, भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार घर पर भगवान गणेश की पूजा और आरती कर सकते हैं।
आरती के बाद क्या करना चाहिए?
आरती के बाद भगवान गणेश को प्रणाम करके प्रार्थना की जा सकती है। इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है।
निष्कर्ष
Shendur Lal Chadhayo Achchha Gajmukhko भगवान श्री गणेश को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। इसके माध्यम से भक्त भगवान गणेश के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करते हैं।
गणेश पूजा, गणेश चतुर्थी या अन्य धार्मिक अवसरों पर भक्त अपनी परंपरा के अनुसार इस आरती का पाठ या गायन कर सकते हैं।
॥ गणपति बप्पा मोरया ॥
॥ मंगल मूर्ति मोरया ॥
॥ श्री गणेश जी महाराज की जय ॥
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