Hawan Prarthana Pujaniya Prabhu Hamare Lyrics in Hindi | हवन प्रार्थना

Hawan Prarthana Pujaniya Prabhu Hamare Lyrics in Hindi

Pujaniya Prabhu Hamare हवन और यज्ञ के अवसर पर गाई जाने वाली एक लोकप्रिय प्रार्थना है। इस प्रार्थना में प्रभु से मन को उज्ज्वल बनाने, छल-कपट से दूर रहने, सत्य का पालन करने और सभी प्राणियों के कल्याण की कामना की जाती है।

हवन और यज्ञ भारतीय धार्मिक परंपराओं में श्रद्धा और सामूहिक प्रार्थना से जुड़े अनुष्ठान हैं। पूजनीय प्रभो हमारे, भाव उज्ज्वल कीजिये प्रार्थना के शब्द व्यक्ति को सत्य, प्रेम, निःस्वार्थ भाव और समाज के कल्याण की भावना का स्मरण कराते हैं।

इस लेख में आपको Hawan Prarthana Pujaniya Prabhu Hamare Lyrics in Hindi, प्रार्थना के संपूर्ण बोल, इसके भक्तिमय भाव, हवन के अवसर पर प्रार्थना का स्थान और इससे जुड़ी सामान्य जानकारी सरल भाषा में मिलेगी।

हवन प्रार्थना का भक्तिमय महत्व

हवन और यज्ञ के दौरान मंत्र, प्रार्थना और श्रद्धा का विशेष स्थान होता है। विभिन्न परिवारों और धार्मिक परंपराओं में हवन की विधि और प्रार्थनाओं का क्रम अलग-अलग हो सकता है।

पूजनीय प्रभो हमारे प्रार्थना में केवल व्यक्तिगत सुख की कामना नहीं, बल्कि पूरे विश्व के कल्याण, रोग और पीड़ा से मुक्ति तथा सभी प्राणियों के प्रति सद्भाव की भावना भी व्यक्त की गई है।

इस प्रार्थना का प्रमुख भाव व्यक्ति को अपने विचारों और व्यवहार में सत्य, प्रेम और निःस्वार्थता अपनाने की प्रेरणा देना है।

Pujaniya Prabhu Hamare Prarthana कब पढ़ें?

भक्त और श्रद्धालु अपनी धार्मिक एवं पारिवारिक परंपरा के अनुसार इस प्रार्थना का पाठ कर सकते हैं।

सामान्य रूप से इसे निम्न अवसरों पर पढ़ा या गाया जा सकता है:

  • हवन या यज्ञ के दौरान
  • यज्ञ की पूर्णाहुति के समय
  • धार्मिक समारोहों में
  • सामूहिक प्रार्थना के दौरान
  • सत्संग और भजन कार्यक्रमों में
  • विशेष धार्मिक अवसरों पर

प्रार्थना और हवन की विधि परिवार, क्षेत्र, संस्था और धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

हवन प्रार्थना – पूजनीय प्रभो हमारे

पूजनीय प्रभो हमारे,
भाव उज्ज्वल कीजिये।
छोड़ देवें छल कपट को,
मानसिक बल दीजिये॥ १॥

वेद की बोलें ऋचाएं,
सत्य को धारण करें।
हर्ष में हो मग्न सारे,
शोक-सागर से तरें॥ २॥

अश्वमेधादिक रचायें,
यज्ञ पर-उपकार को।
धर्म-मर्यादा चलाकर,
लाभ दें संसार को॥ ३॥

नित्य श्रद्धा-भक्ति से,
यज्ञादि हम करते रहें।
रोग-पीड़ित विश्व के,
संताप सब हरते रहें॥ ४॥

भावना मिट जाये मन से,
पाप अत्याचार की।
कामनाएं पूर्ण होवें,
यज्ञ से नर-नारि की॥ ५॥

लाभकारी हो हवन,
हर जीवधारी के लिए।
वायु जल सर्वत्र हों,
शुभ गंध को धारण किये॥ ६॥

स्वार्थ-भाव मिटे हमारा,
प्रेम-पथ विस्तार हो।
‘इदं न मम’ का सार्थक,
प्रत्येक में व्यवहार हो॥ ७॥

प्रेमरस में मग्न होकर,
वंदना हम कर रहे।
‘नाथ’ करुणारूप! करुणा,
आपकी सब पर रहे॥ ८॥

॥ प्रभु की जय ॥

प्रार्थना के शब्दों का भक्तिमय भाव

मन को उज्ज्वल बनाने की प्रार्थना

प्रार्थना की शुरुआत में भक्त प्रभु से अपने भाव और विचारों को उज्ज्वल बनाने की प्रार्थना करता है।

भक्तिमय दृष्टि से इसका भाव मन में सकारात्मकता, विनम्रता और सद्भाव बनाए रखने से जुड़ा हुआ माना जा सकता है।

सत्य और सदाचार का संदेश

प्रार्थना में सत्य को धारण करने और छल-कपट से दूर रहने की भावना व्यक्त की गई है।

यह व्यक्ति को अपने जीवन और व्यवहार में ईमानदारी तथा सदाचार को महत्व देने का स्मरण कराती है।

विश्व कल्याण की भावना

इस प्रार्थना में रोग और पीड़ा से ग्रस्त विश्व के संताप को दूर करने की कामना की गई है।

यह प्रार्थना केवल व्यक्तिगत हित तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सभी लोगों और जीवधारियों के कल्याण की भावना व्यक्त करती है।

प्रकृति के प्रति सद्भाव

प्रार्थना में वायु और जल के शुभ तथा कल्याणकारी होने की कामना की गई है।

भक्तिमय दृष्टि से यह प्रकृति और समस्त जीव-जगत के प्रति सम्मान और सद्भाव की भावना का स्मरण कराती है।

‘इदं न मम’ का भाव

प्रार्थना में ‘इदं न मम’ का उल्लेख मिलता है, जिसका सामान्य भाव निःस्वार्थता और समर्पण से जोड़ा जाता है।

यह व्यक्ति को केवल अपने स्वार्थ तक सीमित न रहकर दूसरों के कल्याण और प्रेम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

हवन के दौरान प्रार्थना का स्थान

हवन और यज्ञ की विधियां विभिन्न धार्मिक और पारिवारिक परंपराओं में अलग-अलग हो सकती हैं।

सामान्य रूप से हवन के दौरान मंत्रों का उच्चारण, अग्नि में आहुति और प्रार्थना की जाती है। कुछ परंपराओं में हवन के बाद सामूहिक रूप से प्रार्थना या भजन गाया जाता है।

यदि आप किसी विशेष धार्मिक संस्था, मंदिर, परिवार या परंपरा का पालन करते हैं, तो उसी परंपरा के अनुसार हवन और प्रार्थना करना उचित है।

हवन प्रार्थना के बाद क्या करें?

प्रार्थना पूर्ण होने के बाद श्रद्धालु शांत मन से कुछ समय प्रार्थना के भावों पर विचार कर सकते हैं।

हवन या यज्ञ पूर्ण होने के बाद अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है।

आप सरल भाव से इस प्रकार प्रार्थना कर सकते हैं:

हे प्रभु, हमारे मन में सत्य, प्रेम और सद्भाव का भाव बनाए रखें। हमें स्वार्थ से ऊपर उठकर सभी लोगों और जीवधारियों के कल्याण की भावना के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दें।

Pujaniya Prabhu Hamare Hawan Prarthana से जुड़े सामान्य प्रश्न

पूजनीय प्रभो हमारे प्रार्थना कब पढ़ी जाती है?

यह प्रार्थना हवन, यज्ञ, सामूहिक प्रार्थना, सत्संग और अन्य धार्मिक अवसरों पर अपनी परंपरा के अनुसार पढ़ी या गाई जा सकती है।

क्या हवन की विधि सभी जगह एक जैसी होती है?

नहीं। हवन और यज्ञ की विधि परिवार, क्षेत्र, संस्था और धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

‘इदं न मम’ का सामान्य भाव क्या है?

इसका सामान्य भाव निःस्वार्थता और समर्पण से जोड़ा जाता है। धार्मिक परंपराओं में इसकी व्याख्या अलग-अलग संदर्भों में की जा सकती है।

क्या यह प्रार्थना सामूहिक रूप से गाई जा सकती है?

हाँ, अनेक धार्मिक और सामूहिक कार्यक्रमों में प्रार्थनाएं समूह में गाई जाती हैं। इसका क्रम संबंधित धार्मिक या पारिवारिक परंपरा के अनुसार हो सकता है।

प्रार्थना का मुख्य संदेश क्या है?

इस प्रार्थना में सत्य, सदाचार, प्रेम, निःस्वार्थता और सभी के कल्याण की भावना प्रमुख रूप से दिखाई देती है।

निष्कर्ष

Pujaniya Prabhu Hamare Hawan Prarthana हवन और यज्ञ के अवसर पर श्रद्धा के साथ गाई जाने वाली एक लोकप्रिय प्रार्थना है।

इसके शब्द व्यक्ति को अपने विचारों को शुद्ध रखने, सत्य का पालन करने, स्वार्थ से दूर रहने और सभी के कल्याण की भावना रखने का स्मरण कराते हैं।

भक्त और श्रद्धालु अपनी धार्मिक एवं पारिवारिक परंपरा के अनुसार इस प्रार्थना का पाठ कर सकते हैं।

॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः ॥
॥ प्रभु की जय ॥
॥ शांति और सद्भाव की जय ॥

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External Reference

हवन-यज्ञ प्रार्थना और पूजनीय प्रभो हमारे के प्रचलित पाठ का संदर्भ देखने के लिए यह बाहरी स्रोत उपयोग किया जा सकता है:

https://www.bhaktibharat.com/aarti/pujniya-prabhu-hamare

॥ प्रभु की जय ॥
॥ शांति, प्रेम और सद्भाव की जय ॥

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