Jagannath Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi | श्री जगन्नाथ जी की आरती

Shri Jagannath Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi – श्री जगन्नाथ जी की आरती

Jagannath Ji Ki Aarti भगवान श्री जगन्नाथ को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। भगवान जगन्नाथ को भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता है और उनकी आराधना भारतीय वैष्णव परंपरा में विशेष स्थान रखती है। “जगन्नाथ मंगलकारी” जैसे भक्तिमय भाव भगवान के मंगलकारी और करुणामय स्वरूप का स्मरण कराते हैं।

इस पोस्ट में आपको Jagannath Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi के संपूर्ण बोल सरल और व्यवस्थित रूप में मिलेंगे। भक्त अपनी धार्मिक एवं पारिवारिक परंपरा के अनुसार इस आरती का पाठ दैनिक पूजा, मंदिर आराधना, रथ यात्रा, जगन्नाथ पूजा और अन्य शुभ अवसरों पर श्रद्धापूर्वक कर सकते हैं।

श्री जगन्नाथ जी की आरती का भक्तिमय भाव

भगवान जगन्नाथ को भक्त प्रेम से जगन्नाथ, जगत के नाथ और श्रीकृष्ण के स्वरूप के रूप में स्मरण करते हैं। उनकी आरती में भगवान के प्रति प्रेम, श्रद्धा, सेवा और समर्पण की भावना व्यक्त की जाती है।

जगन्नाथ भक्ति में भगवान के साथ उनके बड़े भाई बलभद्र जी और बहन सुभद्रा जी का भी विशेष रूप से स्मरण किया जाता है। आरती का पाठ भक्त को भगवान के दिव्य स्वरूप का ध्यान करने और मन को भक्ति में एकाग्र करने का अवसर देता है।

Jagannath Ji Ki Aarti कब पढ़ें?

Jagannath Ji Ki Aarti अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार सुबह या शाम की पूजा के समय पढ़ी जा सकती है। इसे विशेष रूप से रथ यात्रा, जगन्नाथ पूजा, मंदिर आराधना, जन्माष्टमी और अन्य वैष्णव धार्मिक अवसरों पर श्रद्धापूर्वक गाया जाता है।

पूजा की विधि और सामग्री परिवार तथा क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। आरती का मुख्य उद्देश्य श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान जगन्नाथ का स्मरण करना है।

नीचे आपको श्री जगन्नाथ जी की आरती के संपूर्ण बोल मिलेंगे, जिन्हें आप पूजा के दौरान श्रद्धापूर्वक पढ़ या गा सकते हैं।

॥ जय जगन्नाथ ॥
॥ जय श्री जगन्नाथ जी महाराज ॥
॥ जय बलभद्र जी ॥
॥ जय माता सुभद्रा ॥

श्री जगन्नाथ जी की आरती – श्री जगन्नाथ मंगलकारी

आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी।

मंगलकारी नाथ आपदा हरि,
कंचन को धूप दीप ज्योत जगमगी,
अगर कपूर बाती भव से धारी।

आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी।

घर-घरन बजता बाजे बाँसुरी,
घर-घरन बजता बाजे बाँसुरी,
झाँझ या मृदंग बाजे, ताल खंजरी।

आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी।

निरखत मुखारविंद, परसोत चरणारविंद, आपदा हरि,
जगन्नाथ स्वामी के आताको चढ़े वेद की ध्वनि,
जगन्नाथ स्वामी के भोग लागो बैकुंठपुरी।

आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी।

इंद्र दमन सिंह गजे, रोहिणी खड़ी,
इंद्र दमन सिंह गजे, रोहिणी खड़ी,
मार्कंडेय स्व गंगा आनंद भरि।

आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी।

शरणार मुनि द्वारे तदे ब्रह्म वेद भानी,
शरणार मुनि द्वारे तदे ब्रह्म वेद भानी,
धन-धन ओह सुर स्वामी आनंद गढ़ी।

आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी।

आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी।

मंगलकारी नाथ आपदा हरि,
कंचन को धूप दीप ज्योत जगमगी,
अगर कपूर बाती भव से धारी।

आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी।

श्री जगन्नाथ जी की आरती – भक्तिमय भाव

श्री जगन्नाथ जी की आरती भगवान जगन्नाथ को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। इसमें भगवान के मंगलकारी स्वरूप, उनके चरणों की महिमा और भक्तों द्वारा की जाने वाली पूजा-अर्चना का सुंदर वर्णन मिलता है। “जगन्नाथ मंगलकारी” का भाव भगवान को संसार के नाथ और भक्तों के कल्याणकारी आराध्य के रूप में स्मरण करने से जुड़ा है।

श्री जगन्नाथ जी की आरती का भाव

इस आरती में धूप, दीप, कपूर और आरती की ज्योति के माध्यम से भगवान जगन्नाथ की पूजा का वर्णन किया गया है। साथ ही बाँसुरी, मृदंग, झाँझ और खंजरी जैसे वाद्ययंत्रों के माध्यम से होने वाले भक्तिमय वातावरण का भी उल्लेख मिलता है।

भगवान जगन्नाथ की भक्ति में श्रद्धा, सेवा और समर्पण का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त आरती के माध्यम से भगवान के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं और उनके मंगलकारी स्वरूप का स्मरण करते हैं।

Jagannath Ji Ki Aarti कब पढ़ें?

Jagannath Ji Ki Aarti अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार सुबह या शाम की पूजा के समय पढ़ी जा सकती है। इसे जगन्नाथ पूजा, रथ यात्रा, मंदिर आरती, विशेष धार्मिक अवसरों और वैष्णव पूजा के दौरान श्रद्धापूर्वक गाया जा सकता है।

पूजा की विधि और सामग्री परिवार तथा क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। आरती का मुख्य उद्देश्य भक्ति और श्रद्धा के साथ भगवान जगन्नाथ का स्मरण करना है।

आरती का आध्यात्मिक संदेश

श्री जगन्नाथ जी की आरती भक्त को भगवान के प्रति श्रद्धा, सेवा, प्रेम और समर्पण की भावना से जोड़ती है। भगवान के नाम और स्वरूप का स्मरण धार्मिक परंपराओं में मन को भक्ति की ओर केंद्रित करने का माध्यम माना जाता है।

धार्मिक आरती से जुड़े आध्यात्मिक लाभ आस्था और परंपरागत मान्यताओं पर आधारित होते हैं। इस आरती का मुख्य भाव भगवान जगन्नाथ के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना और उनके मंगलकारी स्वरूप का स्मरण करना है।

॥ जय जगन्नाथ ॥
॥ श्री जगन्नाथ स्वामी की जय ॥
॥ जय बलभद्र जी ॥
॥ जय माता सुभद्रा ॥

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