Baba Balaknath Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi | ॐ जय कलाधारी हरे

Baba Balaknath Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi – बाबा बालकनाथ जी की आरती

बाबा बालकनाथ जी की आरती उत्तर भारत की प्रसिद्ध लोक-भक्ति परंपरा से जुड़ी एक लोकप्रिय भक्तिमय आरती है। बाबा बालकनाथ जी को श्रद्धालु सिद्ध बाबा, बालकनाथ और पौणाहारी बाबा जैसे नामों से भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं।

“ॐ जय कलाधारी हरे, स्वामी जय पौणाहारी हरे” से प्रारंभ होने वाली यह आरती बाबा बालकनाथ जी के प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का भाव व्यक्त करती है।

बाबा बालकनाथ जी की आस्था विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश और उत्तर भारत के अनेक क्षेत्रों में देखने को मिलती है। हिमाचल प्रदेश के देओटसिद्ध स्थित बाबा बालकनाथ मंदिर प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।

इस लेख में आपको Baba Balaknath Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi, आरती के संपूर्ण बोल, सरल भाव, बाबा बालकनाथ जी का धार्मिक महत्व, पौणाहारी परंपरा, देओटसिद्ध मंदिर और महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर मिलेंगे।

बाबा बालकनाथ जी की आरती

ॐ जय कलाधारी हरे – Baba Balaknath Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

ॐ जय कलाधारी हरे,
स्वामी जय पौणाहारी हरे।
भक्त जनों की नैया,
भव से पार करे।
ॐ जय कलाधारी हरे॥

बालक उमर सुहानी,
नाम बालक नाथा।
अमर हुए शंकर से,
सुन के अमर गाथा।
ॐ जय कलाधारी हरे॥

शीश पे बाल सुनहरी,
गले रुद्राक्षी माला।
हाथ में झोली, चिमटा,
आसन मृगशाला।
ॐ जय कलाधारी हरे॥

सुंदर सेली, सिंगी,
वैरागन सोहे।
गऊ पालक, रखवालक,
भगतन मन मोहे।
ॐ जय कलाधारी हरे॥

अंग भभूत रमाई,
मूर्ति प्रभु रंगी।
भय भंजन, दुःख नाशक,
भरथरी के संगी।
ॐ जय कलाधारी हरे॥

रोट चढ़त रविवार को,
फल, फूल, मिश्री, मेवा।
धूप-दीप कुण्डन से,
आनंद सिद्ध देवा।
ॐ जय कलाधारी हरे॥

भक्तन हित अवतार लियो,
प्रभु देख के कल्लू काला।
दुष्ट दमन, शत्रुहन,
सबके प्रतिपाला।
ॐ जय कलाधारी हरे॥

श्री बालकनाथ जी की आरती,
जो कोई नित गावे।
कहते हैं सेवक तेरे,
मनवांछित फल पावे।
ॐ जय कलाधारी हरे॥

ॐ जय कलाधारी हरे,
स्वामी जय पौणाहारी हरे।
भक्त जनों की नैया,
भव से पार करे।
ॐ जय कलाधारी हरे॥

बाबा बालकनाथ जी कौन हैं?

बाबा बालकनाथ जी उत्तर भारत की लोक-आस्था और भक्ति परंपरा के प्रमुख श्रद्धा केंद्रों में से एक हैं।

उन्हें विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य क्षेत्रों में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।

धार्मिक परंपराओं में बाबा बालकनाथ जी को तप, साधना और भक्ति से जुड़ा हुआ माना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में उनसे संबंधित कथाएं और धार्मिक परंपराएं अलग रूप में प्रचलित हो सकती हैं।

बाबा बालकनाथ जी को श्रद्धालु प्रेम और सम्मान से निम्न नामों से भी पुकारते हैं:

  • बाबा बालकनाथ
  • सिद्ध बाबा
  • पौणाहारी बाबा
  • बाबा जी

बाबा बालकनाथ जी को पौणाहारी क्यों कहा जाता है?

बाबा बालकनाथ जी से जुड़ी भक्ति परंपरा में “पौणाहारी” नाम विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

यह नाम उनकी तपस्वी और सरल जीवन से जुड़ी लोक-परंपराओं से संबंधित माना जाता है।

“ॐ जय कलाधारी हरे, स्वामी जय पौणाहारी हरे” आरती की प्रमुख पंक्ति भी इसी लोकप्रिय श्रद्धा-परंपरा को दर्शाती है।

भारत की लोक-भक्ति परंपराओं में संतों और सिद्ध पुरुषों के साथ स्थानीय नाम और श्रद्धापूर्ण संबोधन जुड़ते रहे हैं। बाबा बालकनाथ जी के लिए “पौणाहारी” ऐसा ही एक लोकप्रिय नाम है।

बाबा बालकनाथ जी की आरती का महत्व

बाबा बालकनाथ जी की आरती भक्तों के लिए अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने का माध्यम है।

आरती में बाबा के कई प्रमुख स्वरूपों और विशेषताओं का वर्णन मिलता है, जैसे:

  • तपस्वी स्वरूप
  • रुद्राक्ष की माला
  • झोली और चिमटा
  • भभूत धारण करने का स्वरूप
  • भक्तों के प्रति संरक्षण का भाव
  • सरल और वैराग्यपूर्ण जीवन का प्रतीक

भक्ति परंपरा में आरती का मुख्य उद्देश्य श्रद्धा, एकाग्रता और सकारात्मक भाव के साथ भगवान या पूजनीय स्वरूप का स्मरण करना है।

ॐ जय कलाधारी हरे आरती का भाव

“ॐ जय कलाधारी हरे” आरती में बाबा बालकनाथ जी के प्रति गहरी श्रद्धा का भाव व्यक्त किया गया है।

आरती में भक्त बाबा से जीवन में साहस, धैर्य और सकारात्मकता की प्रार्थना करते हैं।

इस आरती का भाव भक्तों को निम्न जीवन मूल्यों की प्रेरणा भी दे सकता है:

  • धैर्य
  • सादगी
  • सेवा
  • श्रद्धा
  • अनुशासन
  • आत्मविश्वास
  • सकारात्मक सोच

बाबा बालकनाथ मंदिर देओटसिद्ध

बाबा बालकनाथ मंदिर, देओटसिद्ध, हिमाचल प्रदेश का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है।

यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के देओटसिद्ध क्षेत्र से जुड़ा हुआ है और उत्तर भारत के अनेक श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं।

हिमाचल प्रदेश सरकार और हिमाचल पर्यटन की जानकारी के अनुसार, देओटसिद्ध स्थित बाबा बालकनाथ मंदिर एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है।

मंदिर और आसपास के क्षेत्र से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में श्रद्धालुओं की विशेष आस्था दिखाई देती है।

बाबा बालकनाथ और हिमाचल प्रदेश की भक्ति परंपरा

हिमाचल प्रदेश को भारत के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में से एक माना जाता है।

यहां अनेक देवी-देवताओं, सिद्ध पुरुषों और स्थानीय धार्मिक परंपराओं से जुड़े प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं।

बाबा बालकनाथ जी की भक्ति भी हिमाचल की इसी समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

देओटसिद्ध मंदिर में विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

रविवार का महत्व

बाबा बालकनाथ जी की भक्ति परंपरा में रविवार का विशेष महत्व माना जाता है।

हिमाचल प्रदेश पर्यटन से संबंधित जानकारी के अनुसार, रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा बालकनाथ मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।

आरती में भी रविवार और “रोट” के प्रसाद का उल्लेख मिलता है।

हालांकि पूजा-विधि और धार्मिक परंपराएं अलग-अलग परिवारों तथा क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं।

बाबा बालकनाथ जी को रोट का प्रसाद

बाबा बालकनाथ जी की परंपरा में रोट का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।

रोट एक पारंपरिक मीठी रोटी या मीठे आटे से बना प्रसाद होता है, जिसे कई श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार अर्पित करते हैं।

हिमाचल प्रदेश पर्यटन से संबंधित जानकारी में भी देओटसिद्ध मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा रोट अर्पित करने की परंपरा का उल्लेख मिलता है।

धार्मिक प्रसाद और पूजा की विधि परिवार तथा स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

बाबा बालकनाथ जी की आरती कब करें?

भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार बाबा बालकनाथ जी की आरती कर सकते हैं।

सामान्य रूप से आरती इन अवसरों पर की जा सकती है:

  • दैनिक पूजा के समय
  • रविवार को
  • विशेष धार्मिक अवसरों पर
  • घर में पूजा के दौरान
  • बाबा बालकनाथ जी के भजन या सत्संग के समय
  • व्यक्तिगत प्रार्थना के दौरान

पूजा का समय और विधि परिवार एवं स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

घर पर बाबा बालकनाथ जी की पूजा कैसे करें?

पूजा की विधि हर परिवार में अलग हो सकती है। इसलिए अपनी पारिवारिक और स्थानीय परंपरा को प्राथमिकता देना उचित है।

सामान्य रूप से भक्त निम्न प्रकार से श्रद्धापूर्वक पूजा कर सकते हैं।

1. पूजा स्थान को स्वच्छ रखें

पूजा से पहले पूजा स्थान को साफ और व्यवस्थित रखें।

2. बाबा बालकनाथ जी का ध्यान करें

शांत मन से बाबा बालकनाथ जी का स्मरण करें।

3. दीपक प्रज्वलित करें

अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार दीपक प्रज्वलित किया जा सकता है।

4. भजन या स्तुति का पाठ करें

भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार बाबा बालकनाथ जी से संबंधित भजन या प्रार्थना कर सकते हैं।

5. बाबा बालकनाथ जी की आरती करें

“ॐ जय कलाधारी हरे” आरती को श्रद्धा और एकाग्रता के साथ पढ़ें या गाएं।

बाबा बालकनाथ जी की भक्ति और सकारात्मक जीवन मूल्य

भक्ति परंपराएं केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं होतीं। वे जीवन में सकारात्मक विचारों और अच्छे व्यवहार की प्रेरणा भी दे सकती हैं।

बाबा बालकनाथ जी की भक्ति से जुड़े प्रमुख सकारात्मक भाव हैं:

सादगी

सरल जीवन और विनम्र व्यवहार व्यक्ति के जीवन में संतुलन ला सकते हैं।

सेवा

धार्मिक परंपराओं में सेवा और दूसरों की सहायता को महत्वपूर्ण माना गया है।

धैर्य

जीवन की कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना आवश्यक है।

श्रद्धा

श्रद्धा व्यक्ति को सकारात्मक सोच और आत्मिक संतुलन की दिशा में प्रेरित कर सकती है।

अनुशासन

नियमित प्रार्थना और अच्छे कर्म जीवन में अनुशासन विकसित करने में सहायक हो सकते हैं।

Baba Balaknath Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi – FAQs

बाबा बालकनाथ जी की लोकप्रिय आरती कौन सी है?

“ॐ जय कलाधारी हरे, स्वामी जय पौणाहारी हरे” बाबा बालकनाथ जी की लोकप्रिय आरतियों में से एक है।

बाबा बालकनाथ जी को पौणाहारी क्यों कहा जाता है?

पौणाहारी बाबा बालकनाथ जी का लोकप्रिय और श्रद्धापूर्ण नाम है, जो उनसे जुड़ी तपस्वी और लोक-भक्ति परंपराओं से संबंधित है।

बाबा बालकनाथ मंदिर कहां स्थित है?

बाबा बालकनाथ का प्रसिद्ध मंदिर देओटसिद्ध, हिमाचल प्रदेश में स्थित है।

बाबा बालकनाथ जी की पूजा किस दिन की जाती है?

बाबा बालकनाथ जी की पूजा भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार कर सकते हैं। रविवार को विशेष श्रद्धा से जुड़ा दिन माना जाता है।

बाबा बालकनाथ जी को कौन सा प्रसाद चढ़ाया जाता है?

कई श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार रोट सहित अन्य प्रसाद अर्पित करते हैं।

क्या घर पर बाबा बालकनाथ जी की आरती की जा सकती है?

हाँ। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार घर पर बाबा बालकनाथ जी का स्मरण और आरती कर सकते हैं।

बाबा बालकनाथ जी की आरती का मुख्य भाव क्या है?

आरती का मुख्य भाव बाबा बालकनाथ जी के प्रति श्रद्धा, समर्पण और जीवन में सकारात्मकता की प्रार्थना करना है।

Also Read

बाबा बालकनाथ जी और देओटसिद्ध मंदिर के बारे में अधिक जानकारी

बाबा बालकनाथ जी, देओटसिद्ध मंदिर और हिमाचल प्रदेश की धार्मिक परंपरा के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप निम्न स्रोत देख सकते हैं:

निष्कर्ष

Baba Balaknath Ji Ki Aarti – ॐ जय कलाधारी हरे बाबा बालकनाथ जी के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने वाली एक लोकप्रिय आरती है।

बाबा बालकनाथ जी की भक्ति विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश और उत्तर भारत की लोक-धार्मिक परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। देओटसिद्ध मंदिर, पौणाहारी परंपरा और रविवार की विशेष श्रद्धा इस भक्ति परंपरा के प्रमुख पहलू हैं।

भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार बाबा बालकनाथ जी का स्मरण कर सकते हैं और “ॐ जय कलाधारी हरे” आरती को श्रद्धा एवं एकाग्रता के साथ पढ़ या गा सकते हैं।

॥ ॐ जय कलाधारी हरे ॥

॥ जय बाबा बालकनाथ जी ॥

Scroll to Top