श्री बांके बिहारी जी की आरती भगवान श्री कृष्ण के बांके बिहारी स्वरूप को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। वृंदावन में भगवान श्री कृष्ण की भक्ति और आराधना की समृद्ध परंपरा रही है, जिसमें भजन, कीर्तन और आरती का विशेष स्थान है।
श्री बांके बिहारी जी का स्वरूप भगवान श्री कृष्ण की बाल एवं मनमोहक छवि से जुड़ा हुआ है। भक्तजन अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा के समय आरती का पाठ या गायन करते हैं। आरती के माध्यम से भक्त भगवान श्री बांके बिहारी का स्मरण करते हुए प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक भाव व्यक्त करते हैं।
इस पृष्ठ पर Shri Banke Bihari Aarti Lyrics in Hindi सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत की गई है, ताकि श्रद्धालु इसे आसानी से पढ़ सकें और अपनी पूजा एवं भक्ति में शामिल कर सकें।
धार्मिक आरती भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनका पाठ व्यक्तिगत श्रद्धा, पूजा-विधि और पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है।
जय श्री बांके बिहारी लाल।
Shri Banke Bihari Aarti Lyrics in Hindi
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ,
हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ।
आरती गाऊँ प्यारे आपको रिझाऊँ,
श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊँ।
॥ श्री बांके बिहारी…॥
मोर मुकुट प्यारे शीश पे सोहे,
प्यारी बंसी मेरो मन मोहे।
देख छवि बलिहारी मैं जाऊँ।
॥ श्री बांके बिहारी…॥
चरणों से निकली गंगा प्यारी,
जिसने सारी दुनिया तारी।
मैं उन चरणों के दर्शन पाऊँ।
॥ श्री बांके बिहारी…॥
दास अनाथ के नाथ आप हो,
दुःख-सुख जीवन प्यारे साथ आप हो।
हरि चरणों में शीश झुकाऊँ।
॥ श्री बांके बिहारी…॥
श्री हरिदास के प्यारे तुम हो,
मेरे मोहन जीवन-धन हो।
देख युगल छवि बलि-बलि जाऊँ।
॥ श्री बांके बिहारी…॥
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ,
हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ।
आरती गाऊँ प्यारे आपको रिझाऊँ,
श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊँ॥
श्री बांके बिहारी जी की आरती का महत्व
श्री बांके बिहारी जी की आरती भगवान श्री कृष्ण के बांके बिहारी स्वरूप की भक्ति और आराधना से जुड़ी एक भक्तिमय रचना है। इसमें भगवान के मनमोहक स्वरूप, मुरली, मोर मुकुट और उनके चरणों का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया है।
भक्तजन अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा के समय श्री बांके बिहारी जी की आरती का पाठ या गायन करते हैं। आरती के माध्यम से भक्त भगवान श्री कृष्ण के प्रति अपनी भक्ति और प्रेम व्यक्त करते हैं।
श्री बांके बिहारी जी की आरती कब करें?
भक्त अपनी सुविधा और पूजा की परंपरा के अनुसार सुबह या शाम की आराधना के समय आरती कर सकते हैं। मंदिरों में आरती की अपनी निर्धारित पूजा-विधि और समय हो सकते हैं।
आरती के दौरान शांत मन से भगवान श्री बांके बिहारी का स्मरण करना और आरती के भाव को समझना भक्ति परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
श्री बांके बिहारी जी का धार्मिक महत्व
श्री बांके बिहारी जी भगवान श्री कृष्ण के प्रसिद्ध स्वरूपों में से एक हैं और वृंदावन की भक्ति परंपरा से विशेष रूप से जुड़े हुए हैं। भगवान श्री कृष्ण की आराधना में प्रेम, भक्ति, संगीत, भजन और कीर्तन का विशेष स्थान है।
श्री बांके बिहारी जी की आरती भी इसी भक्ति परंपरा का हिस्सा है, जिसके माध्यम से श्रद्धालु भगवान के दिव्य स्वरूप का स्मरण करते हैं।
श्री बांके बिहारी जी की आरती का पाठ
इस आरती का पाठ श्रद्धा और अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है। आरती के शब्दों के भाव को समझकर पाठ करने से धार्मिक साहित्य और भक्ति परंपरा को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिलती है।
धार्मिक आरती और पूजा व्यक्तिगत आस्था एवं पारिवारिक परंपराओं से जुड़ी होती हैं। इनकी विधि अलग-अलग स्थानों और परंपराओं में भिन्न हो सकती है।
जय श्री बांके बिहारी लाल।
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