Shri Bhairav Ji Aarti Lyrics – श्री भैरव देव जी की आरती | जय भैरव देवा

Bhairav Baba Ki Aarti Lyrics in Hindi – भैरव बाबा जी की आरती

श्री भैरव देव जी की आरती भगवान भैरव को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। सनातन परंपरा में भगवान भैरव को भगवान शिव के एक उग्र एवं रक्षक स्वरूप के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है। भैरव उपासना से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व माना जाता है।

“जय भैरव देवा” आरती में भगवान भैरव के स्वरूप, महिमा और भक्तों के प्रति उनके रक्षक भाव का स्मरण किया जाता है। भक्तजन अपनी धार्मिक परंपरा और श्रद्धा के अनुसार पूजा, आरती तथा विशेष धार्मिक अवसरों पर इसका पाठ करते हैं।

इस पृष्ठ पर Shri Bhairav Ji Aarti Lyrics in Hindi सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत की गई है, ताकि श्रद्धालु आरती के बोल आसानी से पढ़ सकें और अपनी पूजा में शामिल कर सकें।

धार्मिक आरती और पूजा भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पूजा की विधि और आरती का समय अलग-अलग मंदिरों, क्षेत्रों और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकता है।

जय भैरव देवा।

भैरव बाबा जी की आरती Lyrics in Hindi (Bhairav Ji Ki Aarti)

जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा।
जय काली और गौर देवी कृत सेवा॥
॥ जय भैरव देवा…॥

तुम्हीं पाप उद्धारक, दुःख-सिंधु तारक।
भक्तों के सुख कारक, भीषण वपु धारक॥
॥ जय भैरव देवा…॥

वाहन श्वान विराजत, कर त्रिशूल धारी।
महिमा अमित तुम्हारी, जय जय भय हारी॥
॥ जय भैरव देवा…॥

तुम बिन देवा सेवा, सफल नहीं होवे।
चौमुख दीपक दर्शन, दुःख खोवे॥
॥ जय भैरव देवा…॥

तेल चटकी, दधि मिश्रित, भोगावली तेरी।
कृपा कीजिए भैरव, करिए नहीं देरी॥
॥ जय भैरव देवा…॥

पाँव घुँघरू बाजत, अरु डमरू दमकावत।
बटुकनाथ बन बालक, जन मन हरषावत॥
॥ जय भैरव देवा…॥

बटुकनाथ जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहे धरनीधर, नर मनवांछित फल पावे॥
॥ जय भैरव देवा…॥

भैरव बाबा की आरती का महत्व

भैरव बाबा की आरती भगवान भैरव को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। सनातन परंपरा में भगवान भैरव को भगवान शिव के रक्षक स्वरूप के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है। इस आरती में उनके स्वरूप, महिमा और भक्तों के प्रति रक्षक भाव का वर्णन मिलता है।

भगवान भैरव की आराधना से जुड़ी परंपराओं में श्रद्धा, अनुशासन और समर्पण का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भैरव बाबा की पूजा एवं आरती करते हैं।

भैरव बाबा की आरती कब करें?

भक्त अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा के समय भैरव बाबा की आरती कर सकते हैं। काल भैरव जयंती और अन्य धार्मिक अवसरों पर भगवान भैरव की विशेष पूजा और आरती की जाती है।

आरती के समय शांत मन से भगवान भैरव का स्मरण करते हुए श्रद्धा और भक्ति का भाव रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

भैरव बाबा की आरती का धार्मिक महत्व

इस आरती में भगवान भैरव के विभिन्न स्वरूपों और उनके दिव्य गुणों का स्मरण किया गया है। भगवान भैरव को परंपरागत रूप से साहस, सुरक्षा और धर्म की रक्षा से जुड़े स्वरूप के रूप में पूजा जाता है।

भैरव उपासना भारतीय धार्मिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और विभिन्न क्षेत्रों में इसकी पूजा-विधि एवं परंपराएँ अलग-अलग हो सकती हैं।

भैरव बाबा की आरती का पाठ

भैरव बाबा की आरती का पाठ श्रद्धा और अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है। आरती के शब्दों और उनके भाव को समझकर पाठ करना भारतीय भक्ति साहित्य और धार्मिक परंपराओं को बेहतर ढंग से समझने में सहायक हो सकता है।

पूजा और आरती की विधि अलग-अलग मंदिरों, क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती है।

जय भैरव देवा।

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