जगजननी जय जय – श्री देवीजी की आरती माँ आदिशक्ति और देवी के दिव्य स्वरूपों को समर्पित एक लोकप्रिय भक्तिमय आरती है। इस आरती में माँ को जगजननी, भयहारिणी, भवतारिणी, महामाया, काली, कमला और अन्य अनेक स्वरूपों में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया है।
भारतीय देवी-उपासना परंपरा में देवी को शक्ति, करुणा, ज्ञान और मातृभाव के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। भक्त विभिन्न धार्मिक अवसरों पर माँ के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं और आरती के माध्यम से श्रद्धा एवं समर्पण व्यक्त करते हैं।
इस लेख में आपको Jagjanani Jai Jai Aarti Lyrics in Hindi, श्री देवीजी की संपूर्ण आरती, सरल भावार्थ, देवी के विभिन्न स्वरूपों का अर्थ और आरती से जुड़ी उपयोगी जानकारी एक ही स्थान पर मिलेगी।
जगजननी जय जय आरती का महत्व
“जगजननी” शब्द का अर्थ है संसार की जननी या विश्व की माता। इस आरती में माँ को समस्त सृष्टि की शक्ति और भक्तों की करुणामयी माता के रूप में स्मरण किया गया है।
आरती में देवी के अनेक रूपों और गुणों का वर्णन मिलता है। कहीं माँ को ज्ञान और शक्ति का स्वरूप कहा गया है, तो कहीं उन्हें करुणा और संरक्षण प्रदान करने वाली माता के रूप में स्मरण किया गया है।
भक्त अपनी धार्मिक परंपरा और आस्था के अनुसार इस आरती का पाठ करते हैं। आरती का मुख्य भाव माँ के प्रति श्रद्धा, प्रेम, समर्पण और उनकी शरण में आने की भावना से जुड़ा हुआ है।
श्री देवीजी की आरती – जगजननी जय जय
॥ जय माता दी ॥
॥ जगजननी माँ को कोटि-कोटि नमन ॥
जगजननी जय जय आरती Lyrics
जगजननी जय! जय!!
माँ! जगजननी जय! जय!!।
भयहारिणि, भवतारिणि,
भवभामिनि जय! जय॥
॥ जगजननी जय जय…॥
तू ही सत्-चित्-सुखमय,
शुद्ध ब्रह्मरूपा।
सत्य सनातन सुन्दर,
पर-शिव सुर-भूपा॥
॥ जगजननी जय जय…॥
आदि अनादि अनामय,
अविचल अविनाशी।
अमल अनन्त अगोचर,
अज आनन्दराशी॥
॥ जगजननी जय जय…॥
अविकारी, अघहारी,
अकल, कलाधारी।
कर्ता विधि, भर्ता हरि,
हर संहारकारी॥
॥ जगजननी जय जय…॥
तू विधिवधू, रमा,
तू उमा, महामाया।
मूल प्रकृति विद्या तू,
तू जननी, जाया॥
॥ जगजननी जय जय…॥
राम, कृष्ण तू,
सीता, व्रजरानी राधा।
तू वांछाकल्पद्रुम,
हारिणि सब बाधा॥
॥ जगजननी जय जय…॥
दश विद्या, नव दुर्गा,
नाना शस्त्रकरा।
अष्टमातृका, योगिनि,
नव-नव रूप धरा॥
॥ जगजननी जय जय…॥
तू परधामनिवासिनि,
महाविलासिनि तू।
तू ही श्मशानविहारिणि,
ताण्डवलासिनि तू॥
॥ जगजननी जय जय…॥
सुर-मुनि-मोहिनि सौम्या,
तू शोभाधारा।
विवसन विकट-स्वरूपा,
प्रलयमयी धारा॥
॥ जगजननी जय जय…॥
तू ही स्नेह-सुधामयि,
तू अति गरलमना।
रत्नविभूषित तू ही,
तू ही अस्थि-तना॥
॥ जगजननी जय जय…॥
मूलाधारनिवासिनि,
इह-पर-सिद्धिप्रदे।
कालातीता काली,
कमला तू वरदे॥
॥ जगजननी जय जय…॥
शक्ति शक्तिधर तू ही,
नित्य अभेदमयी।
भेदप्रदर्शिनि वाणी,
विमले! वेदत्रयी॥
॥ जगजननी जय जय…॥
हम अति दीन-दुखी,
माँ! विपत-जाल घेरे।
हैं कपूत अति कपटी,
पर बालक तेरे॥
॥ जगजननी जय जय…॥
निज स्वभाववश जननी!
दयादृष्टि कीजै।
करुणा कर, करुणामयि!
चरण-शरण दीजै॥
॥ जगजननी जय जय…॥
॥ जय माता दी ॥
जगजननी जय जय आरती का सरल भावार्थ
यह आरती माँ देवी के व्यापक और दिव्य स्वरूप का वर्णन करती है। आरती में देवी को केवल एक रूप तक सीमित नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें शक्ति, ज्ञान, करुणा और सृष्टि की मूल प्रकृति के रूप में स्मरण किया गया है।
जगजननी
“जगजननी” का अर्थ संसार की माता है। भक्त माँ को समस्त प्राणियों के प्रति करुणा और संरक्षण की भावना से जुड़े मातृस्वरूप के रूप में स्मरण करते हैं।
भयहारिणि और भवतारिणि
“भयहारिणि” शब्द देवी के उस स्वरूप को दर्शाता है जिसे भक्त भय और संकट के समय स्मरण करते हैं।
“भवतारिणि” शब्द संसार के संघर्षों और आध्यात्मिक यात्रा से जुड़े भाव को व्यक्त करता है। भक्त अपनी आस्था के अनुसार माँ से मार्गदर्शन और शक्ति की प्रार्थना करते हैं।
सत्-चित्-सुखमय
आरती में देवी को सत्य, चेतना और आनंद से संबंधित दिव्य स्वरूप के रूप में वर्णित किया गया है। यह भाव भारतीय आध्यात्मिक दर्शन में परम सत्य और चेतना की अवधारणाओं से जुड़ा हुआ है।
आरती में देवी के विभिन्न स्वरूप
इस आरती की विशेषता यह है कि इसमें माँ के अनेक स्वरूपों का स्मरण किया गया है।
महामाया
महामाया को सृष्टि की दिव्य शक्ति और प्रकृति के व्यापक स्वरूप से जोड़ा जाता है।
उमा
उमा नाम माता पार्वती के प्रमुख नामों में से एक है। यह स्वरूप शिव परिवार और शक्ति परंपरा से जुड़ा हुआ है।
रमा
“रमा” नाम माता लक्ष्मी से संबंधित है। यह समृद्धि और मंगल की धार्मिक अवधारणाओं से जुड़ा हुआ है।
काली
माँ काली को शक्ति परंपरा में एक महत्वपूर्ण देवी स्वरूप माना जाता है। उनका स्वरूप समय, परिवर्तन और शक्ति की धार्मिक अवधारणाओं से जुड़ा हुआ है।
कमला
कमला नाम देवी लक्ष्मी के स्वरूपों से जुड़ा हुआ है और इसे समृद्धि एवं मंगल की भावना से जोड़ा जाता है।
आरती में इन विभिन्न स्वरूपों का उल्लेख देवी के व्यापक और अनेक रूपों वाले स्वरूप को दर्शाता है।
दश महाविद्या और नवदुर्गा का उल्लेख
आरती में “दश विद्या” और “नव दुर्गा” का उल्लेख मिलता है।
देवी-उपासना परंपरा में दश महाविद्याओं और नवदुर्गा के स्वरूपों का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
नवदुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान की जाती है। देवी के अलग-अलग स्वरूप शक्ति, ज्ञान, साहस, करुणा और अन्य आध्यात्मिक गुणों से जुड़े माने जाते हैं।
यह आरती देवी के विभिन्न स्वरूपों का सामूहिक स्मरण करने वाली भक्तिमय रचना के रूप में देखी जा सकती है।
जगजननी जय जय आरती कब गाई जाती है?
भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इस आरती का पाठ या गायन विभिन्न अवसरों पर कर सकते हैं।
सामान्य रूप से यह आरती निम्न अवसरों पर गाई जा सकती है:
- नवरात्रि के दौरान
- दुर्गा पूजा के अवसर पर
- देवी जागरण में
- घर में देवी पूजा के समय
- मंदिर में आरती के दौरान
- भजन और कीर्तन कार्यक्रमों में
- अन्य देवी-उपासना से जुड़े धार्मिक अवसरों पर
पूजा और आरती की विधि विभिन्न परिवारों और क्षेत्रों की धार्मिक परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है।
जगजननी जय जय आरती कैसे करें?
आरती की विधि व्यक्तिगत और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकती है। सामान्य रूप से भक्त श्रद्धा और स्वच्छ वातावरण में देवी का स्मरण करते हैं।
1. पूजा स्थान को स्वच्छ रखें
आरती से पहले पूजा स्थान को साफ और व्यवस्थित रखा जा सकता है।
2. माँ देवी का स्मरण करें
अपने आराध्य देवी स्वरूप का शांत मन से स्मरण करें।
3. दीपक प्रज्वलित करें
अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार दीपक या ज्योति प्रज्वलित की जा सकती है।
4. श्रद्धा से आरती गाएं
“जगजननी जय जय” आरती को श्रद्धा और एकाग्रता के साथ पढ़ें या गाएं।
5. प्रार्थना करें
आरती के बाद माँ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए जीवन में सद्बुद्धि, शांति और सकारात्मकता की प्रार्थना करें।
नवरात्रि और देवी उपासना
नवरात्रि भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है। इस अवधि में अनेक श्रद्धालु देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं।
नवरात्रि के दौरान पूजा, भजन, आरती, धार्मिक पाठ और देवी के स्वरूपों का स्मरण किया जाता है।
“जगजननी जय जय” जैसी आरतियां भक्तों को देवी-उपासना की भावना से जोड़ती हैं। हालांकि पूजा की विधियां और परंपराएं क्षेत्र और परिवार के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।
जगजननी जय जय आरती में शक्ति का भाव
आरती में देवी को शक्ति के रूप में स्मरण किया गया है। भारतीय धार्मिक परंपरा में “शक्ति” को सृजन, संरक्षण और परिवर्तन से जुड़ी दिव्य शक्ति के रूप में देखा जाता है।
देवी के विभिन्न रूपों में कभी मातृभाव, कभी ज्ञान, कभी करुणा और कभी शक्ति का स्वरूप दिखाई देता है।
इस आरती में भी यही व्यापक भाव दिखाई देता है कि देवी के अनेक स्वरूप हैं और भक्त श्रद्धा के साथ उन सभी दिव्य गुणों का स्मरण करते हैं।
जगजननी जय जय आरती पढ़ने का महत्व
भक्त अपनी धार्मिक आस्था और परंपरा के अनुसार इस आरती का पाठ करते हैं।
आरती के दौरान देवी के गुणों और स्वरूपों का स्मरण किया जाता है। शांत वातावरण में आरती और प्रार्थना करने से व्यक्ति को कुछ समय अपने विचारों को सकारात्मक और आध्यात्मिक भावों की ओर केंद्रित करने का अवसर मिल सकता है।
आरती का मुख्य उद्देश्य श्रद्धा और समर्पण की भावना के साथ देवी का स्मरण करना है।
Jagjanani Jai Jai Aarti – Frequently Asked Questions
जगजननी जय जय आरती किसकी है?
जगजननी जय जय आरती माँ देवी या आदिशक्ति के विभिन्न दिव्य स्वरूपों को समर्पित भक्तिमय आरती है।
जगजननी का क्या अर्थ है?
जगजननी का अर्थ संसार की जननी या विश्व की माता है।
जगजननी जय जय आरती कब गाई जाती है?
इसे नवरात्रि, दुर्गा पूजा, देवी जागरण, घर की पूजा और अन्य देवी-उपासना से जुड़े अवसरों पर अपनी परंपरा के अनुसार गाया जा सकता है।
क्या यह माँ दुर्गा की आरती है?
यह आरती देवी के व्यापक स्वरूपों का गुणगान करती है और इसे देवी या शक्ति-उपासना से जुड़े अवसरों पर गाया जाता है। इसमें नवदुर्गा और देवी के विभिन्न स्वरूपों का उल्लेख मिलता है।
आरती में महामाया, काली और कमला का उल्लेख क्यों है?
आरती में देवी के विभिन्न स्वरूपों और धार्मिक नामों का स्मरण किया गया है, जो शक्ति, ज्ञान, करुणा और समृद्धि जैसी अलग-अलग धार्मिक अवधारणाओं से जुड़े हैं।
क्या घर पर जगजननी जय जय आरती गा सकते हैं?
हाँ। श्रद्धालु अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार घर में पूजा के समय यह आरती पढ़ या गा सकते हैं।
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माँ देवी और शक्ति परंपरा के बारे में अधिक जानकारी
देवी-उपासना, शक्ति परंपरा और “जगजननी जय जय” आरती के बारे में अधिक जानकारी के लिए निम्न स्रोत उपयोगी हो सकते हैं:
निष्कर्ष
जगजननी जय जय – श्री देवीजी की आरती | Jagjanani Jai Jai Aarti Lyrics in Hindi माँ आदिशक्ति के विभिन्न दिव्य स्वरूपों को समर्पित एक लोकप्रिय भक्तिमय आरती है।
इस आरती में माँ को जगजननी, शक्ति, महामाया, उमा, रमा, काली और अन्य अनेक स्वरूपों में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया है।
भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार नवरात्रि, दुर्गा पूजा, देवी जागरण और अन्य पूजा अवसरों पर इस आरती का पाठ या गायन कर सकते हैं।
श्रद्धा, करुणा, सकारात्मकता और समर्पण के भाव के साथ देवी का स्मरण करना इस आरती का प्रमुख भक्तिमय संदेश है।
॥ जगजननी जय जय ॥
॥ जय माता दी ॥



