भगवान श्री चित्रगुप्त जी की आरती भगवान चित्रगुप्त जी को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। सनातन परंपरा में भगवान चित्रगुप्त जी को लेखा-जोखा और न्याय से जुड़े देवता के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है। विशेष रूप से चित्रगुप्त पूजा और धार्मिक अवसरों पर भक्त उनकी आराधना करते हैं।
इस आरती में भगवान चित्रगुप्त जी के प्रति श्रद्धा, भक्ति और प्रार्थना का भाव व्यक्त किया जाता है। भक्त अपनी पारिवारिक एवं धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा के समय चित्रगुप्त जी की आरती का पाठ या गायन करते हैं।
इस पृष्ठ पर Chitragupt Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत की गई है, ताकि श्रद्धालु आरती के बोल आसानी से पढ़ सकें और अपनी पूजा में शामिल कर सकें।
चित्रगुप्त जी से जुड़ी पूजा-विधि और धार्मिक परंपराएँ अलग-अलग क्षेत्रों एवं परिवारों में भिन्न हो सकती हैं। इसलिए पूजा और आरती करते समय अपनी स्थानीय या पारिवारिक परंपरा का पालन करना उचित है।
जय श्री चित्रगुप्त जी महाराज।
चित्रगुप्त जी की आरती Lyrics in Hindi (Chitragupt Ji Ki Aarti)
ॐ जय चित्रगुप्त हरे,
स्वामी जय चित्रगुप्त हरे।
भक्तजनों के इच्छित,
फल को पूर्ण करे॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
विघ्न विनाशक, मंगलकर्ता,
संतन सुखदायी।
भक्तों के प्रतिपालक,
त्रिभुवन यश छायी॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरत,
पीताम्बर राजै।
मातु इरावती, दक्षिणा,
वाम अंग साजै॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
कष्ट निवारक, दुष्ट संहारक,
प्रभु अंतर्यामी।
सृष्टि संहारन, जन दुःख हारन,
प्रकट भये स्वामी॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
कलम, दवात, शंख, पत्रिका,
कर में अति सोहै।
वैजयन्ती वनमाला,
त्रिभुवन मन मोहै॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
विश्व न्याय का कार्य सम्भाला,
ब्रह्मा हर्षाये।
कोटि-कोटि देवता तुम्हारे,
चरणन में धाये॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
नृप सुदास अरु भीष्म पितामह,
याद तुम्हें कीन्हा।
वेग, विलम्ब न कीन्हौं,
इच्छित फल दीन्हा॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
दारा, सुत, भगिनी,
सब अपने स्वार्थ के कर्ता।
जाऊँ कहाँ, शरण में किसकी,
तुम तज मैं भर्ता॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
बन्धु, पिता तुम स्वामी,
शरण गहूँ किसकी।
तुम बिन और न दूजा,
आस करूँ जिसकी॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
जो जन चित्रगुप्त जी की आरती,
प्रेम सहित गावैं।
चौरासी से निश्चित छूटैं,
इच्छित फल पावैं॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
न्यायाधीश बैकुंठ निवासी,
पाप-पुण्य लिखते।
‘नानक’ शरण तिहारे,
आसन दूजी करते॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे,
स्वामी जय चित्रगुप्त हरे।
भक्तजनों के इच्छित,
फल को पूर्ण करे॥
चित्रगुप्त जी की आरती का महत्व
चित्रगुप्त जी की आरती भगवान श्री चित्रगुप्त जी को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। सनातन परंपरा में भगवान चित्रगुप्त जी को न्याय, धर्म और कर्मों के लेखा-जोखा से जुड़े देवता के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है। चित्रगुप्त पूजा के अवसर पर भक्त उनकी आराधना और आरती करते हैं।
चित्रगुप्त जी की आरती कब करें?
भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान चित्रगुप्त जी की पूजा के दौरान आरती कर सकते हैं। चित्रगुप्त पूजा के अवसर पर विशेष रूप से भगवान का स्मरण, पूजन और आरती करने की परंपरा है।
पूजा की विधि और आरती का समय अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों की परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकता है।
भगवान चित्रगुप्त जी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं में भगवान चित्रगुप्त जी को कर्मों का लेखा रखने और न्याय से संबंधित देवता माना जाता है। उनकी पूजा में सत्य, धर्म, सदाचार और अपने कर्मों के प्रति जिम्मेदारी जैसे भावों को महत्व दिया जाता है।
चित्रगुप्त जी की आरती में उनके स्वरूप, गुणों और भक्तों के प्रति कृपा का स्मरण किया गया है। भक्त श्रद्धा के साथ आरती का पाठ करके भगवान के प्रति अपनी भक्ति और प्रार्थना व्यक्त करते हैं।
चित्रगुप्त जी की आरती का पाठ
ऊपर दी गई चित्रगुप्त जी की आरती को श्रद्धा और अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार पढ़ा या गाया जा सकता है। आरती के शब्दों के साथ उनके भाव को समझना भी भक्ति और धार्मिक परंपरा को समझने में सहायक होता है।
धार्मिक पूजा-पद्धति अलग-अलग स्थानों और परिवारों में भिन्न हो सकती है, इसलिए पूजा करते समय अपनी स्थानीय एवं पारिवारिक परंपराओं का पालन करना उचित है।
जय श्री चित्रगुप्त जी महाराज।
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