Chitragupt Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi | ॐ जय चित्रगुप्त हरे आरती

Chitragupt Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi – चित्रगुप्त जी की आरती

भगवान श्री चित्रगुप्त जी की आरती भगवान चित्रगुप्त जी को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। सनातन परंपरा में भगवान चित्रगुप्त जी को कर्मों के लेखा-जोखा और न्याय से जुड़े देवता के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।

“ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे” से प्रारंभ होने वाली यह आरती भगवान चित्रगुप्त जी के प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का भाव व्यक्त करती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान चित्रगुप्त जी मनुष्य के कर्मों का लेखा रखते हैं। इसलिए उनकी पूजा सत्य, अच्छे कर्म, जिम्मेदारी और आत्मचिंतन जैसे मूल्यों से भी जुड़ी हुई है।

इस लेख में आपको Chitragupt Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi, भगवान चित्रगुप्त जी का धार्मिक महत्व, चित्रगुप्त पूजा, यम द्वितीया, कलम-दवात पूजा और महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर मिलेंगे।

चित्रगुप्त जी की आरती

ॐ जय चित्रगुप्त हरे – Chitragupt Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

ॐ जय चित्रगुप्त हरे,
स्वामी जय चित्रगुप्त हरे।
भक्तजनों के इच्छित,
फल को पूर्ण करे॥

॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

विघ्न विनाशक, मंगलकर्ता,
संतन सुखदायी।
भक्तों के प्रतिपालक,
त्रिभुवन यश छायी॥

॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरत,
पीताम्बर राजै।
मातु इरावती, दक्षिणा,
वाम अंग साजै॥

॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

कष्ट निवारक, दुष्ट संहारक,
प्रभु अंतर्यामी।
सृष्टि संहारन, जन दुःख हारन,
प्रकट भये स्वामी॥

॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

कलम, दवात, शंख, पत्रिका,
कर में अति सोहै।
वैजयन्ती वनमाला,
त्रिभुवन मन मोहै॥

॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

विश्व न्याय का कार्य सम्भाला,
ब्रह्मा हर्षाये।
कोटि-कोटि देवता तुम्हारे,
चरणन में धाये॥

॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

नृप सुदास अरु भीष्म पितामह,
याद तुम्हें कीन्हा।
वेग, विलम्ब न कीन्हौं,
इच्छित फल दीन्हा॥

॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

दारा, सुत, भगिनी,
सब अपने स्वार्थ के कर्ता।
जाऊँ कहाँ, शरण में किसकी,
तुम तज मैं भर्ता॥

॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

बन्धु, पिता तुम स्वामी,
शरण गहूँ किसकी।
तुम बिन और न दूजा,
आस करूँ जिसकी॥

॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

जो जन चित्रगुप्त जी की आरती,
प्रेम सहित गावैं।
चौरासी से निश्चित छूटैं,
इच्छित फल पावैं॥

॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

न्यायाधीश बैकुंठ निवासी,
पाप-पुण्य लिखते।
‘नानक’ शरण तिहारे,
आसन दूजी करते॥

ॐ जय चित्रगुप्त हरे,
स्वामी जय चित्रगुप्त हरे।
भक्तजनों के इच्छित,
फल को पूर्ण करे॥

भगवान चित्रगुप्त जी कौन हैं?

भगवान चित्रगुप्त जी हिंदू धार्मिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

धार्मिक मान्यताओं में उन्हें कर्मों का लेखा रखने वाले देवता के रूप में स्मरण किया जाता है। उनके हाथ में कलम, दवात और लेखा-पत्रिका का प्रतीकात्मक उल्लेख भी इसी परंपरा से जुड़ा हुआ है।

भगवान चित्रगुप्त जी से जुड़ी मान्यताएं मनुष्य को अपने कर्मों और जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देती हैं।

चित्रगुप्त जी की पूजा विशेष रूप से कायस्थ समुदाय में महत्वपूर्ण मानी जाती है। बिहार सरकार की सांस्कृतिक जानकारी और धार्मिक परंपराओं में चित्रगुप्त पूजा को कायस्थ समुदाय के प्रमुख पर्वों में शामिल किया जाता है।

भगवान चित्रगुप्त जी का धार्मिक महत्व

भगवान चित्रगुप्त जी का धार्मिक महत्व कर्म और न्याय की अवधारणा से जुड़ा हुआ है।

सनातन परंपरा में कर्म को व्यक्ति के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।

चित्रगुप्त जी से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं हमें यह प्रेरणा देती हैं कि व्यक्ति को:

  • सत्य का पालन करना चाहिए
  • अच्छे कर्म करने चाहिए
  • अपने कार्यों के प्रति जिम्मेदार रहना चाहिए
  • दूसरों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करना चाहिए
  • जीवन में ईमानदारी बनाए रखनी चाहिए

इस प्रकार भगवान चित्रगुप्त जी की पूजा केवल धार्मिक श्रद्धा का विषय नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन और जिम्मेदार जीवन के संदेश से भी जुड़ी हुई है।

चित्रगुप्त जी की आरती का महत्व

चित्रगुप्त जी की आरती भक्तों के लिए भगवान के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक माध्यम है।

आरती में भगवान चित्रगुप्त जी के स्वरूप, गुणों और उनके धार्मिक महत्व का स्मरण किया जाता है।

भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान से प्रार्थना कर सकते हैं:

  • जीवन में सत्य के मार्ग पर चलने के लिए
  • अच्छे कर्म करने की प्रेरणा के लिए
  • सही निर्णय लेने की शक्ति के लिए
  • परिवार के सुख और शांति के लिए
  • जीवन में सकारात्मकता के लिए

आरती का मुख्य भाव श्रद्धा, भक्ति और आत्मिक एकाग्रता से जुड़ा होता है।

चित्रगुप्त पूजा क्या है?

चित्रगुप्त पूजा भगवान चित्रगुप्त जी को समर्पित धार्मिक अवसर है।

यह पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से जुड़ी हुई मानी जाती है और कई स्थानों पर यम द्वितीया या भाई दूज के अवसर के साथ भी इसका संबंध देखा जाता है।

चित्रगुप्त पूजा विशेष रूप से कायस्थ समुदाय में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इस अवसर पर कई परिवार अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान चित्रगुप्त जी की पूजा करते हैं और कलम, दवात तथा लेखा से जुड़ी वस्तुओं का भी पूजन करते हैं।

चित्रगुप्त पूजा को कलम-दवात पूजा क्यों कहा जाता है?

चित्रगुप्त पूजा को कई स्थानों पर कलम-दवात पूजा या Kalam Dawat Puja भी कहा जाता है।

इसका संबंध भगवान चित्रगुप्त जी के उस धार्मिक स्वरूप से है, जिसमें उन्हें कर्मों का लेखा रखने वाला माना जाता है।

इस अवसर पर श्रद्धालु अपनी पारंपरिक पूजा-विधि के अनुसार:

  • कलम
  • दवात
  • पुस्तकों
  • लेखा-बही
  • अध्ययन और कार्य से जुड़ी वस्तुओं

का पूजन कर सकते हैं।

यह परंपरा ज्ञान, शिक्षा, जिम्मेदारी और अपने कार्य के प्रति सम्मान के भाव को भी दर्शाती है।

यम द्वितीया और चित्रगुप्त पूजा

चित्रगुप्त पूजा का संबंध कई परंपराओं में यम द्वितीया से भी जोड़ा जाता है।

यह दिन दीपावली के बाद आने वाले महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों में से एक माना जाता है।

भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में इस दिन से जुड़ी पूजा और धार्मिक परंपराएं भिन्न हो सकती हैं।

कई श्रद्धालु इस अवसर पर भगवान यमराज और भगवान चित्रगुप्त जी का स्मरण करते हैं।

चित्रगुप्त पूजा की तिथि और समय हिंदू पंचांग के अनुसार निर्धारित होते हैं, इसलिए अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख हर वर्ष बदलती है।

भगवान चित्रगुप्त जी और कर्म का संदेश

भगवान चित्रगुप्त जी से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का सबसे महत्वपूर्ण संदेश कर्मों के प्रति जागरूकता है।

मनुष्य के जीवन में हर कार्य का महत्व होता है।

इस धार्मिक अवधारणा से हमें प्रेरणा मिल सकती है कि:

अच्छे कर्म करें

हमारे कार्यों का प्रभाव केवल हमारे जीवन पर ही नहीं बल्कि परिवार और समाज पर भी पड़ सकता है।

सत्य का पालन करें

सत्य और ईमानदारी जीवन में विश्वास और सम्मान का आधार बनते हैं।

जिम्मेदारी से कार्य करें

अपने कार्यों और निर्णयों की जिम्मेदारी लेना एक महत्वपूर्ण जीवन मूल्य है।

आत्मचिंतन करें

समय-समय पर अपने कार्यों और व्यवहार पर विचार करना व्यक्ति को बेहतर बनने में सहायता कर सकता है।

भगवान चित्रगुप्त जी और कायस्थ समुदाय

भगवान चित्रगुप्त जी को कायस्थ समुदाय में विशेष श्रद्धा के साथ पूजा जाता है।

कई धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में उन्हें कायस्थ समुदाय के आराध्य देवता के रूप में माना जाता है।

चित्रगुप्त पूजा के अवसर पर परिवार एक साथ पूजा और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।

यह पर्व धार्मिक श्रद्धा के साथ-साथ पारिवारिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करता है।

पटना का आदि चित्रगुप्त मंदिर

पटना स्थित आदि चित्रगुप्त मंदिर, जिसे कायस्थ धाम के नाम से भी जाना जाता है, भगवान चित्रगुप्त जी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।

बिहार पर्यटन विभाग के अनुसार यह मंदिर भगवान चित्रगुप्त जी को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है और यहां चित्रगुप्त पूजा विशेष श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।

यह मंदिर भगवान चित्रगुप्त जी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े प्रमुख स्थलों में से एक माना जाता है।

भारत सरकार के पर्यटन मंच Incredible India पर भी पटना के आदि चित्रगुप्त मंदिर को भगवान चित्रगुप्त जी की आस्था और कायस्थ परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण स्थल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

चित्रगुप्त जी की पूजा कब करें?

भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान चित्रगुप्त जी की पूजा कर सकते हैं।

विशेष रूप से चित्रगुप्त पूजा के अवसर पर भगवान का स्मरण, पूजन और आरती करने की परंपरा है।

भक्त अन्य अवसरों पर भी श्रद्धा के साथ भगवान चित्रगुप्त जी का स्मरण कर सकते हैं।

पूजा की विधि और समय अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में भिन्न हो सकते हैं।

घर पर चित्रगुप्त जी की पूजा कैसे करें?

पूजा की विधि परिवार और स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

सामान्य रूप से श्रद्धालु सरल और श्रद्धापूर्ण तरीके से भगवान चित्रगुप्त जी का स्मरण कर सकते हैं।

1. पूजा स्थान को स्वच्छ रखें

पूजा से पहले स्थान को साफ और व्यवस्थित करें।

2. भगवान चित्रगुप्त जी का ध्यान करें

शांत मन से भगवान चित्रगुप्त जी का स्मरण करें।

3. दीपक प्रज्वलित करें

अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार दीपक प्रज्वलित किया जा सकता है।

4. पूजा से संबंधित वस्तुएं रखें

चित्रगुप्त पूजा की परंपरा में कई परिवार कलम, दवात या लेखन से जुड़ी वस्तुओं को श्रद्धा के साथ पूजा में शामिल करते हैं।

5. चित्रगुप्त जी की आरती करें

“ॐ जय चित्रगुप्त हरे” आरती को श्रद्धा और एकाग्रता के साथ पढ़ें या गाएं।

चित्रगुप्त जी की भक्ति और सकारात्मक जीवन मूल्य

भगवान चित्रगुप्त जी से जुड़ी परंपराएं व्यक्ति को कई सकारात्मक जीवन मूल्यों की प्रेरणा देती हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • ईमानदारी
  • जिम्मेदारी
  • सत्य
  • अच्छे कर्म
  • आत्मचिंतन
  • न्यायपूर्ण व्यवहार
  • अनुशासन

धार्मिक आस्था के साथ इन मूल्यों को जीवन में अपनाना व्यक्ति और समाज दोनों के लिए सकारात्मक हो सकता है।

Chitragupt Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi – FAQs

चित्रगुप्त जी की लोकप्रिय आरती कौन सी है?

“ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे” भगवान चित्रगुप्त जी को समर्पित लोकप्रिय आरतियों में से एक है।

भगवान चित्रगुप्त जी किससे जुड़े हुए हैं?

धार्मिक मान्यताओं में भगवान चित्रगुप्त जी को कर्मों के लेखा-जोखा और न्याय से जुड़े देवता के रूप में स्मरण किया जाता है।

चित्रगुप्त पूजा कब होती है?

चित्रगुप्त पूजा हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से जुड़ी होती है। इसकी अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख हर वर्ष बदलती है।

चित्रगुप्त पूजा को कलम-दवात पूजा क्यों कहा जाता है?

भगवान चित्रगुप्त जी को धार्मिक परंपरा में लेखा और कर्मों के अभिलेख से जोड़ा जाता है। इसलिए इस पूजा में कलम, दवात और लेखन से जुड़ी वस्तुओं के पूजन की परंपरा भी मिलती है।

भगवान चित्रगुप्त जी की पूजा कौन करता है?

भगवान चित्रगुप्त जी की पूजा विभिन्न श्रद्धालु करते हैं, जबकि कायस्थ समुदाय में उनकी विशेष श्रद्धा और पूजा परंपरा देखने को मिलती है।

क्या घर पर चित्रगुप्त जी की आरती की जा सकती है?

हाँ। श्रद्धालु अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार घर पर भगवान चित्रगुप्त जी का स्मरण और आरती कर सकते हैं।

चित्रगुप्त जी की आरती का मुख्य संदेश क्या है?

आरती का मुख्य भाव भगवान चित्रगुप्त जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना और सत्य, अच्छे कर्म तथा जिम्मेदारी के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त करना है।

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भगवान चित्रगुप्त जी और चित्रगुप्त पूजा के बारे में अधिक जानकारी

भगवान चित्रगुप्त जी, चित्रगुप्त पूजा और उनसे जुड़ी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप निम्न स्रोत देख सकते हैं:

निष्कर्ष

Chitragupt Ji Ki Aarti – ॐ जय चित्रगुप्त हरे भगवान चित्रगुप्त जी के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने वाली एक लोकप्रिय आरती है।

भगवान चित्रगुप्त जी से जुड़ी धार्मिक परंपराएं कर्म, सत्य, न्याय और जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण जीवन मूल्यों की याद दिलाती हैं।

चित्रगुप्त पूजा और कलम-दवात पूजा की परंपरा भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भक्त अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान चित्रगुप्त जी का स्मरण कर सकते हैं और “ॐ जय चित्रगुप्त हरे” आरती को श्रद्धा एवं एकाग्रता के साथ पढ़ या गा सकते हैं।

॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे ॥

॥ जय श्री चित्रगुप्त जी महाराज ॥

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