माँ नर्मदा जी की आरती पवित्र नर्मदा नदी को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में नर्मदा नदी का विशेष महत्व माना जाता है और इसे श्रद्धा के साथ माँ नर्मदा के रूप में पूजा जाता है।
नर्मदा आरती में माँ नर्मदा के प्रति श्रद्धा, भक्ति और कृतज्ञता का भाव व्यक्त किया जाता है। नर्मदा तट पर होने वाली पूजा और आरती स्थानीय धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार माँ नर्मदा का स्मरण करते हैं।
इस पृष्ठ पर Maa Narmada Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत की गई है, ताकि श्रद्धालु आरती के बोल आसानी से पढ़ सकें और अपनी पूजा या धार्मिक अवसरों में शामिल कर सकें।
नर्मदा नदी भारतीय संस्कृति और प्राकृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक आस्था के साथ नदियों की स्वच्छता और संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी रखना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
नर्मदे हर।
आरती: माँ नर्मदा जी की Lyrics in Hindi (Narmada Ji Ki Aarti)
ॐ जय जगदानंदी,
मैया जय आनंदकंदी।
ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा
शिव हरि शंकर, रुद्रौ पालंती॥
॥ ॐ जय जगदानंदी…॥
देवी नारद सारद, तुम वरदायक,
अभिनव पदमंडी।
सुर नर मुनिजन सेवत,
शारद पद वाचंती॥
॥ ॐ जय जगदानंदी…॥
देवी धूमक वाहन राजत,
वीणा वादयंती।
झुमकत-झुमकत-झुमकत,
झननन झमकत रमती राजंती॥
॥ ॐ जय जगदानंदी…॥
देवी बाजत ताल मृदंगा,
सुर मंडल रमती।
तोड़ीतान-तोड़ीतान-तोड़ीतान,
तुरड़ड़ रमती सुरवंती॥
॥ ॐ जय जगदानंदी…॥
देवी सकल भुवन पर आप विराजत,
निशदिन आनंदी।
गावत गंगा शंकर, सेवत रेवा,
शंकर तुम भट मेटंती॥
॥ ॐ जय जगदानंदी…॥
मैयाजी को कंचन थार विराजत,
अगर कपूर बाती।
अमर कंठ में विराजत,
घाटन घाट बिराजत,
कोटि रतन ज्योति॥
॥ ॐ जय जगदानंदी…॥
मैयाजी की आरती,
निशदिन पढ़ गावै।
हो रेवा जुग-जुग नर गावै।
भजत शिवानंद स्वामी,
जपत हरि नंद स्वामी, मनवांछित पावे॥
ॐ जय जगदानंदी,
मैया जय आनंदकंदी।
ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा
शिव हरि शंकर, रुद्रौ पालंती॥
माँ नर्मदा जी की आरती का महत्व
माँ नर्मदा जी की आरती नर्मदा नदी को समर्पित एक पारंपरिक भक्तिमय आरती है। भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में नर्मदा नदी को श्रद्धा के साथ माँ नर्मदा के रूप में पूजा जाता है। इस आरती में माँ नर्मदा की महिमा, पवित्रता और दिव्य स्वरूप का भक्तिभाव से स्मरण किया गया है।
माँ नर्मदा की आरती कब करें?
भक्त अपनी श्रद्धा और स्थानीय परंपरा के अनुसार माँ नर्मदा की पूजा के समय आरती कर सकते हैं। नर्मदा तट पर होने वाली दैनिक पूजा और आरती कई धार्मिक स्थलों की परंपरा का हिस्सा है।
विशेष धार्मिक अवसरों, नर्मदा जयंती और नर्मदा से जुड़े अन्य पर्वों पर भी माँ नर्मदा की आराधना की जाती है।
नर्मदा नदी का धार्मिक महत्व
नर्मदा भारत की प्रमुख पवित्र नदियों में से एक है। सनातन परंपरा में नर्मदा को देवी स्वरूप मानकर श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है। नर्मदा तट से जुड़े अनेक तीर्थ और धार्मिक स्थल भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखते हैं।
माँ नर्मदा की आरती के माध्यम से भक्त नदी के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। धार्मिक आस्था के साथ नदियों की स्वच्छता और संरक्षण के प्रति जागरूक रहना भी आवश्यक है।
माँ नर्मदा जी की आरती का पाठ
माँ नर्मदा जी की आरती का पाठ श्रद्धा और अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है। आरती के शब्दों और उनके भाव को समझकर पाठ करना नर्मदा से जुड़ी भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को बेहतर ढंग से समझने में सहायक हो सकता है।
पूजा और आरती की विधि अलग-अलग स्थानों, मंदिरों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती है।
नर्मदे हर।
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