अहोई माता की आरती अहोई माता को समर्पित एक पारंपरिक भक्तिमय आरती है। अहोई अष्टमी के अवसर पर माताएँ और परिवार अहोई माता की पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा संतान के कल्याण की कामना के साथ धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं।
“जय अहोई माता” आरती में अहोई माता के प्रति श्रद्धा, भक्ति और प्रार्थना का भाव व्यक्त किया जाता है। अहोई अष्टमी की पूजा में क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा-विधि, व्रत और आरती के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं।
इस पृष्ठ पर Ahoi Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत की गई है, ताकि पाठक आरती के बोल आसानी से पढ़ सकें और अहोई अष्टमी की पूजा के दौरान अपनी परंपरा के अनुसार इसका पाठ कर सकें।
अहोई अष्टमी भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन की पूजा परिवार, श्रद्धा और पारंपरिक मान्यताओं से संबंधित होती है।
जय अहोई माता।
अहोई माता की आरती Lyrics in Hindi (Ahoi Mata Ki Aarti)
जय अहोई माता,
जय अहोई माता।
तुमको नितदिन ध्यावत,
हरि विष्णु विधाता॥
॥ ॐ जय अहोई माता॥
ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमला,
तू ही है जगमाता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता॥
॥ ॐ जय अहोई माता॥
माता रूप निरंजन,
सुख-संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत,
नित मंगल पाता॥
॥ ॐ जय अहोई माता॥
तू ही पाताल बसंती,
तू ही है शुभदाता।
कर्म-प्रभाव प्रकाशक,
जगनिधि से त्राता॥
॥ ॐ जय अहोई माता॥
जिस घर थारो वासा,
वाही में गुण आता।
कर न सके सोई कर ले,
मन नहीं घबराता॥
॥ ॐ जय अहोई माता॥
तुम बिन सुख न होवे,
न कोई पुत्र पाता।
खान-पान का वैभव,
तुम बिन नहीं आता॥
॥ ॐ जय अहोई माता॥
शुभ गुण सुंदर युक्ता,
क्षीर निधि जाता।
रतन चतुर्दश तोकू,
कोई नहीं पाता॥
॥ ॐ जय अहोई माता॥
श्री अहोई माँ की आरती,
जो कोई गाता।
उर उमंग अति उपजे,
पाप उतर जाता॥
ॐ जय अहोई माता,
मैया जय अहोई माता॥
अहोई माता की आरती का महत्व
अहोई माता की आरती अहोई माता को समर्पित एक पारंपरिक भक्तिमय आरती है। अहोई अष्टमी के अवसर पर माताएँ अहोई माता की पूजा और आरती करती हैं तथा परिवार और संतान के सुख-कल्याण की प्रार्थना करती हैं। यह पर्व भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान रखता है।
अहोई माता की आरती कब करें?
अहोई माता की आरती मुख्य रूप से अहोई अष्टमी की पूजा के दौरान की जाती है। भक्त अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार पूजा के बाद आरती का पाठ कर सकते हैं।
अहोई अष्टमी की पूजा-विधि और व्रत से जुड़ी परंपराएँ अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती हैं।
अहोई अष्टमी में अहोई माता का महत्व
अहोई अष्टमी भारतीय परंपरा में संतान के कल्याण और परिवार की सुख-समृद्धि से जुड़ा पर्व है। इस अवसर पर अहोई माता की पूजा श्रद्धा और विश्वास के साथ की जाती है।
आरती में अहोई माता के प्रति भक्ति और प्रार्थना का भाव व्यक्त किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भक्त इस अवसर पर माता का स्मरण कर परिवार के लिए सुख, शांति और मंगल की कामना करते हैं।
अहोई माता की आरती का पाठ
अहोई माता की आरती का पाठ श्रद्धा और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है। आरती के शब्दों और उनके भाव को समझकर पाठ करना भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को बेहतर ढंग से समझने में सहायक हो सकता है।
पूजा, व्रत और आरती की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती है।
जय अहोई माता।
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