हिंदू धर्म में वैकुंठ एकादशी को अत्यंत पवित्र और मोक्षदायिनी एकादशी माना गया है। यह व्रत मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है और भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन वैकुंठ लोक के द्वार भक्तों के लिए खुल जाते हैं, इसलिए इसका विशेष आध्यात्मिक महत्व है।
वैकुंठ एकादशी के दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं, भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं और रात्रि जागरण करते हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने और व्रत कथा का पाठ करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और अंततः वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
वैकुंठ एकादशी व्रत कथा में भगवान विष्णु की महिमा, भक्तों की श्रद्धा और मोक्ष प्राप्ति का दिव्य वर्णन मिलता है। यह कथा भक्तों को धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
आइए जानते हैं वैकुंठ एकादशी के पावन दिन पढ़ी जाने वाली वैकुंठ एकादशी व्रत कथा—
एक समय की बात है। एक नगर में एक ब्राह्मण परिवार निवास करता था। वह परिवार सदाचारी और धर्मपरायण था, किंतु ब्राह्मण की पत्नी के मन में एक गहरा दुःख था।
वह अत्यंत धार्मिक, पतिव्रता और भगवान विष्णु की भक्त थी, परंतु उसे संतान सुख की प्राप्ति नहीं हो रही थी। लंबे समय तक प्रयत्न करने के बाद भी जब उसे संतान का वरदान नहीं मिला, तो वह निरंतर भगवान विष्णु से प्रार्थना करने लगी।
एक दिन वह ब्राह्मणी शोक और चिंता में डूबी हुई बैठी थी। तभी भगवान विष्णु ने अपने भक्त के दुःख को जानकर उस रात्रि उसे स्वप्न में दर्शन दिए।
स्वप्न में भगवान विष्णु ने ब्राह्मणी से कहा—
“हे पतिव्रता! तुम अत्यंत पुण्यशालिनी हो। तुम्हारी मनोकामना पूर्ण करने के लिए तुम्हें एक विशेष व्रत का पालन करना होगा। इस व्रत का नाम वैकुंठ एकादशी है। यदि तुम श्रद्धा और विधिपूर्वक इस व्रत को करोगी, तो तुम्हें संतान सुख की प्राप्ति होगी और अंततः मोक्ष भी मिलेगा।”
भगवान विष्णु ने उसे वैकुंठ एकादशी व्रत की संपूर्ण विधि बताई। प्रभु की आज्ञा पाकर ब्राह्मणी ने वैकुंठ एकादशी का व्रत करना आरंभ किया।
अगली वैकुंठ एकादशी को ब्राह्मणी ने पूर्ण विधि-विधान से उपवास रखा और भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रही। उसने यह दिन पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ व्यतीत किया तथा रात्रि भर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया।
व्रत के समापन के पश्चात भगवान विष्णु ने उसे पुनः दर्शन दिए और कहा—
“हे ब्राह्मणी! तुम्हारे व्रत के पुण्य प्रभाव से तुम्हारी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होंगी। तुम्हें संतान सुख की प्राप्ति होगी और तुम्हारे जीवन में सुख-समृद्धि का वास रहेगा।”
भगवान ने उसे यह आशीर्वाद भी दिया कि मृत्यु के पश्चात उसे वैकुंठ लोक की प्राप्ति होगी और वह मोक्ष को प्राप्त करेगी। कुछ समय पश्चात ब्राह्मणी को एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई।
जिस प्रकार भगवान विष्णु ने उस ब्राह्मणी को सुख, समृद्धि और मोक्ष का वरदान दिया, उसी प्रकार वे अपने सभी भक्तों पर कृपा बनाए रखें।
भगवान विष्णु की जय! 🙏



