Shri Navgrah Chalisa | श्री नवग्रह चालीसा पाठ लाभ सहित

Shri Navgrah Chalisa lyrics in Hindi and English with Navagraha Dev image

श्री नवग्रह चालीसा हिंदू धर्म में नवग्रहों — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु — की संयुक्त स्तुति का पावन पाठ है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नवग्रह मानव जीवन के भाग्य, स्वास्थ्य, शिक्षा, विवाह, धन और कर्मफल पर गहरा प्रभाव डालते हैं। श्रद्धा भाव से Shri Navgrah Chalisa का पाठ करने से ग्रह दोषों की शांति होती है और जीवन में संतुलन एवं सकारात्मकता आती है।

नियमपूर्वक श्री नवग्रह चालीसा का पाठ करने से कुंडली में स्थित अशुभ ग्रहों के प्रभाव कम होते हैं तथा शुभ ग्रहों की कृपा बढ़ती है। विशेष रूप से शनिवार, मंगलवार या ग्रह शांति पूजा के समय इस चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह चालीसा भक्तों को मानसिक शांति, आत्मबल और ईश्वर कृपा का अनुभव कराती है।

Shri Navgrah Chalisa Lyrics in Hindi

(श्री नवग्रह चालीसा)

॥ दोहा ॥

श्री गणपति गुरु पद कमल,
प्रेम सहित सिर नाय।
नवग्रह चालीसा कहत,
शारदा होत सहाय॥

जय जय रवि शशि सोम बुध,
जय गुरु भृगु शनि राज।
जयति राहु अरु केतु ग्रह,
करहुं अनुग्रह आज॥


॥ चौपाई ॥

॥ श्री सूर्य स्तुति ॥

प्रथमहि रवि कहँ नावौं माथा,
करहुं कृपा जनि जानि अनाथा।
हे आदित्य दिवाकर भानू,
मैं मति मंद महा अज्ञानू॥
अब निज जन कहँ हरहुं कलेषा,
दिनकर द्वादश रूप दिनेशा।
नमो भास्कर सूर्य प्रभाकर,
अर्क मित्र अघ-मोघ क्षमाकर॥


॥ श्री चन्द्र स्तुति ॥

शशि मयंक रजनीपति स्वामी,
चन्द्र कलानिधि नमो नमामि।
राकापति हिमांशु राकेशा,
प्रणवत जन तन हरहुं कलेशा॥
सोम इन्दु विधु शान्ति सुधाकर,
शीत रश्मि औषधि निशाकर।
तुम्हीं शोभित सुंदर भाल महेशा,
शरणागत जन हरहुं कलेशा॥


॥ श्री मंगल स्तुति ॥

जय जय जय मंगल सुखदाता,
लोहित भौमादिक विख्याता।
अंगारक कुज रुज ऋणहारी,
करहुं दया यही विनय हमारी॥
हे महिसुत छितिसुत सुखराशी,
लोहितांग जय जन अघनाशी।
अगम अमंगल अब हर लीजै,
सकल मनोरथ पूरण कीजै॥


॥ श्री बुध स्तुति ॥

जय शशि नन्दन बुध महाराजा,
करहुं सकल जन कहँ शुभ काजा।
दीजै बुद्धि बल सुमति सुजाना,
कठिन कष्ट हरि करि कल्याणा॥
हे तारासुत रोहिणी नन्दन,
चन्द्रसुवन दुख द्वंद्व निकन्दन।
पूजहिं आस दास कहुँ स्वामी,
प्रणतपाल प्रभु नमो नमामि॥


॥ श्री बृहस्पति स्तुति ॥

जयति जयति जय श्री गुरुदेवा,
करूँ सदा तुम्हरी प्रभु सेवा।
देवाचार्य तुम देव गुरु ज्ञानी,
इन्द्र पुरोहित विद्यादानी॥
वाचस्पति बागीश उदारा,
जीव बृहस्पति नाम तुम्हारा।
विद्या सिन्धु अंगिरा नामा,
करहुं सकल विधि पूरण कामा॥


॥ श्री शुक्र स्तुति ॥

शुक्र देव पद तल जल जाता,
दास निरन्तर ध्यान लगाता।
हे उशना भार्गव भृगु नन्दन,
दैत्य पुरोहित दुष्ट निकन्दन॥
भृगुकुल भूषण दूषण हारी,
हरहुं नेष्ट ग्रह करहुं सुखारी।
तुम्हीं द्विजवर जोशी सिरताजा,
नर शरीर के तुम ही राजा॥


॥ श्री शनि स्तुति ॥

जय श्री शनिदेव रवि नन्दन,
जय कृष्णो सौरी जगवन्दन।
पिंगल मंद रौद्र यम नामा,
वप्र आदि कोणस्थ ललामा॥
वक्र दृष्टि पिप्पल तन साजा,
क्षण में करत रंक क्षण राजा।
ललाट स्वर्ण पद करत निहाला,
हरहुं विपत्ति छाया के लाला॥


॥ श्री राहु स्तुति ॥

जय जय राहु गगन प्रविसइया,
तुम ही चन्द्र आदित्य ग्रसइया।
रवि शशि अरि स्वर्भानु धारा,
शिखी आदि बहु नाम तुम्हारा॥
सैहिंकेय तुम निशाचर राजा,
अर्धकाय जग राखहु लाजा।
यदि ग्रह समय पाय हिं आवहु,
सदा शान्ति अरु सुख उपजावहु॥


॥ श्री केतु स्तुति ॥

जय श्री केतु कठिन दुखहारी,
करहुं सुजन हित मंगलकारी।
ध्वजायुत रुंड रूप विकराला,
घोर रौद्रतन अघमन काला॥
शिखी तारिका ग्रह बलवान,
महा प्रताप न तेज ठिकाना।
वाहन मीन महा शुभकारी,
दीजै शान्ति दया उर धारी॥


॥ नवग्रह शांति फल ॥

तीरथराज प्रयाग सुपासा,
बसै राम के सुंदर दासा।
ककरा ग्रामहिं पुरे-तिवारी,
दुर्वासा आश्रम जन दुख हारी॥
नवग्रह शान्ति लिख्यो सुख हेतु,
जन तन कष्ट उतारण सेतु।
जो नित पाठ करै चित लावै,
सब सुख भोगि परम पद पावै॥


॥ दोहा ॥

धन्य नवग्रह देव प्रभु,
महिमा अगम अपार।
चित नव मंगल मोद गृह,
जगत जनन सुखद्वार॥

यह चालीसा नवग्रह,
विरचित सुंदरदास।
पढ़त प्रेम सुत बढ़त सुख,
सर्वानन्द हुलास॥


॥ इति श्री नवग्रह चालीसा ॥

Shri Navgrah Chalisa Lyrics in English

(श्री नवग्रह चालीसा)

॥ Doha ॥

Shri Ganapati Guru Pada Kamala,
Prema Sahita Sira Naaya।
Navagraha Chalisa Kahata,
Sharada Hota Sahaaya॥

Jaya Jaya Ravi Shashi Soma Budha,
Jaya Guru Bhrigu Shani Raaja।
Jayati Rahu Aru Ketu Graha,
Karahu Anugraha Aaja॥


॥ Chaupai ॥

॥ Shri Surya Stuti ॥

Prathamahi Ravi Kahan Naavon Maatha,
Karahu Kripa Jani Jaani Anaatha।
He Aaditya Divakar Bhaanu,
Main Mati Mand Maha Agyaanu॥

Ab Nija Jana Kahan Harahu Kalesha,
Dinakar Dwadasha Roopa Dinesha।
Namo Bhaskar Surya Prabhakar,
Arka Mitra Agha-Moksha Kshamakar॥


॥ Shri Chandra Stuti ॥

Shashi Mayank Rajani Pati Swami,
Chandra Kalaanidhi Namo Namaami।
Raakaa Pati Himaanshu Raakesha,
Pranavata Jana Tana Harahu Kalesha॥

Soma Indu Vidhu Shaanti Sudhakar,
Sheeta Rashmi Aushadhi Nishakar।
Tumhi Shobhita Sundara Bhaala Mahesha,
Sharanaagata Jana Harahu Kalesha॥


॥ Shri Mangal Stuti ॥

Jaya Jaya Mangala Sukha Daata,
Lohita Bhaumaadika Vikhyaata।
Angaaraka Kuja Ruja Rina Haari,
Karahu Daya Yahi Vinaya Hamaari॥

He Mahisuta Chhitisuta Sukha Raashi,
Lohitaanga Jaya Jana Aghanaashi।
Agama Amangala Aba Hara Lijai,
Sakala Manoratha Poorana Kijai॥


॥ Shri Budha Stuti ॥

Jaya Shashi Nandana Budha Mahaaraaja,
Karahu Sakala Jana Kahan Shubha Kaaja।
Dijai Buddhi Bala Sumati Sujaana,
Kathina Kashta Hari Kari Kalyaana॥

He Taaraasuta Rohini Nandana,
Chandra Suvana Dukha Dwanda Nikandana।
Poojahu Aasha Daasa Kahun Swami,
Pranata Paala Prabhu Namo Namaami॥


॥ Shri Brihaspati Stuti ॥

Jayati Jayati Jaya Shri Guru Deva,
Karahu Sada Tumhaari Prabhu Seva।
Devaachaarya Tuma Deva Guru Gyaani,
Indra Purohita Vidya Daanee॥

Vaachaspati Baageesha Udaara,
Jeeva Brihaspati Naama Tumhaara।
Vidya Sindhu Angeeraa Naama,
Karahu Sakala Vidhi Poorana Kaama॥


॥ Shri Shukra Stuti ॥

Shukra Deva Pada Tala Jala Jaata,
Daasa Nirantara Dhyaana Lagaata।
He Ushana Bhaargava Bhrigu Nandana,
Daitya Purohita Dushta Nikandana॥

Bhrigu Kula Bhooshana Dooshana Haari,
Harahu Naishta Graha Karahu Sukhaari।
Tuhi Dwijavara Joshi Sirataaja,
Nara Shareera Ke Tumahi Raaja॥


॥ Shri Shani Stuti ॥

Jaya Shri Shani Deva Ravi Nandana,
Jaya Krishno Sauri Jaga Vandana।
Pingala Manda Raudra Yama Naama,
Vapra Aadi Konastha Lalaama॥

Vakra Drishti Pippala Tana Saaja,
Kshana Mahan Karata Ranka Kshana Raaja।
Lalaata Swarna Pada Karata Nihaala,
Harahu Vipatti Chhaaya Ke Laala॥


॥ Shri Rahu Stuti ॥

Jaya Jaya Rahu Gagana Pravisaiya,
Tumhi Chandra Aaditya Grasaiya।
Ravi Shashi Ari Svarbhaanu Dhaara,
Shikhi Aadi Bahu Naama Tumhaara॥

Saihikey Tum Nishaachara Raaja,
Ardhakaaya Jaga Raakhahu Laaja।
Yadi Graha Samaya Paaya Kahin Aavahu,
Sada Shaanti Aru Sukha Upajaavahu॥


॥ Shri Ketu Stuti ॥

Jaya Shri Ketu Kathina Dukha Haari,
Karahu Sujana Hita Mangala Kaari।
Dhwajaayukta Runda Roopa Vikaraala,
Ghora Raudratana Aghamana Kaala॥

Shikhi Taarika Graha Balavaana,
Maha Prataapa Na Teja Thikaana।
Vaahana Meena Maha Shubhakaari,
Dijai Shaanti Daya Ura Dhaari॥


॥ Navagraha Shaanti Phala ॥

Teeratha Raaja Prayaaga Supaasa,
Basai Raama Ke Sundara Daasa।
Kakara Graamahi Pure-Tiwaari,
Durvaasa Aashrama Jana Dukha Haari॥

Navagraha Shaanti Likhyo Sukha Hetu,
Jana Tana Kashta Utaarana Setu।
Jo Nita Paatha Karai Chita Laavai,
Saba Sukha Bhogi Parama Pada Paavai॥


॥ Doha ॥

Dhanya Navagraha Deva Prabhu,
Mahima Agama Apaar।
Chitta Nava Mangala Moda Griha,
Jagata Janana Sukha Dwaar॥

Yaha Chalisa Navagraha,
Virachita Sundardaasa।
Padhata Premayuta Badhata Sukha,
Sarvaananda Hulaasa॥


॥ Iti Shri Navagraha Chalisa ॥

hri Navgrah Chalisa का नियमित पाठ करने से नवग्रहों की कृपा प्राप्त होती है। Shri Navgrah Chalisa विशेष रूप से ग्रह दोष शांति और जीवन में संतुलन के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जाती है। जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ Shri Navgrah Chalisa का पाठ करता है, उसे मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल की अनुभूति होती है।

❓ Shri Navgrah Chalisa – FAQs

1. Shri Navgrah Chalisa क्या है?

श्री नवग्रह चालीसा नवग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु) की संयुक्त स्तुति का पावन पाठ है, जिसे ग्रह शांति और जीवन संतुलन के लिए पढ़ा जाता है।


2. नवग्रह चालीसा का पाठ क्यों किया जाता है?

नवग्रह चालीसा का पाठ कुंडली में स्थित अशुभ ग्रह प्रभावों को शांत करने, शुभ फल बढ़ाने और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए किया जाता है।


3. नवग्रह चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?

इस चालीसा का पाठ प्रातःकाल या संध्या समय करना उत्तम माना जाता है। विशेष रूप से शनिवार, मंगलवार, या ग्रह शांति पूजा के समय पाठ करना फलदायी होता है।


4. नवग्रह चालीसा के पाठ से क्या लाभ होते हैं?

नियमित पाठ से ग्रह दोष शांति, मानसिक शांति, स्वास्थ्य में सुधार, धन एवं कार्यों में स्थिरता तथा भाग्य वृद्धि मानी जाती है।


5. क्या महिलाएँ और बच्चे नवग्रह चालीसा का पाठ कर सकते हैं?

हाँ, महिलाएँ और बच्चे भी श्रद्धा और नियम के साथ नवग्रह चालीसा का पाठ कर सकते हैं। यह सभी आयु वर्ग के लिए उपयुक्त है।


6. नवग्रह चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

सामान्यतः एक बार प्रतिदिन या सप्ताह में एक बार पाठ पर्याप्त होता है। विशेष संकल्प के लिए 11 या 108 बार पाठ भी किया जाता है।


7. क्या नवग्रह चालीसा को हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में पढ़ा जा सकता है?

हाँ, नवग्रह चालीसा को हिंदी या अंग्रेज़ी (Roman) दोनों में पढ़ा जा सकता है। भावना और श्रद्धा अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।


8. नवग्रह चालीसा का पाठ कहाँ करना श्रेष्ठ होता है?

घर के पूजा स्थान, मंदिर या किसी शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठकर पाठ करना श्रेष्ठ माना जाता है।

नवग्रहों, ग्रह शांति और ज्योतिषीय तिथियों से संबंधित प्रमाणिक जानकारी के लिए आप Drik Panchang वेबसाइट भी देख सकते हैं।

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