भगवान शिव सनातन धर्म में त्रिदेवों में से एक माने जाते हैं और उन्हें संहार के देवता के साथ-साथ करुणा और कल्याण के प्रतीक के रूप में भी पूजा जाता है। शिवजी को “भोलेनाथ” कहा जाता है, क्योंकि वे अत्यंत सरलता से प्रसन्न हो जाते हैं।
शिव पूजन करने से मन को शांति, जीवन में संतुलन और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। विशेष रूप से सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि और सावन मास में शिव पूजन का अत्यधिक महत्व बताया गया है।
यदि श्रद्धा और विधि-विधान से शिव पूजन किया जाए तो भगवान शिव अपने भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं और जीवन के कष्टों को दूर करते हैं।
🔷 शिव पूजन का महत्व
- भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं।
- शिव पूजन से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
- यह साधक को मानसिक शांति और आत्मिक शक्ति प्रदान करता है।
- दाम्पत्य जीवन और करियर में स्थिरता आती है।
🔷 शिव पूजन के लाभ (Benefits of Shiv Puja)
1️⃣ मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा
शिव पूजन से मन शांत होता है और तनाव कम होता है। नियमित पूजा करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।
2️⃣ कष्टों से मुक्ति
भगवान शिव को “संहारकर्ता” कहा जाता है। वे जीवन की बाधाओं और संकटों को दूर करने की शक्ति रखते हैं।
3️⃣ रोगों से रक्षा
श्रद्धा से किया गया शिव पूजन शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करता है।
4️⃣ आर्थिक स्थिरता
शिव कृपा से व्यक्ति के जीवन में आर्थिक समस्याएँ कम होती हैं और उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
5️⃣ वैवाहिक जीवन में सुख
शिव-पार्वती का दाम्पत्य जीवन आदर्श माना जाता है। शिव पूजन से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है।
शिव पूजा सामग्री सूची
- एक लकड़ी की चौकी (शिवलिंग या भगवान शिव की धातु की मूर्ति रखने के लिए)
- एक शिवलिंग या पंचधातु से बनी मूर्ति अथवा भगवान शिव की चित्र प्रतिमा
- एक तेल का दीपक
- दीपक के लिए तिल का तेल, सरसों का तेल या घी
- माचिस
- कपास की बत्ती
- आरती के लिए कपूर
- गंध (इत्र)
- पुष्प (धतूरा के फूल, सफेद पुष्प, गुलाब, रजनीगंधा या अन्य कोई भी फूल। इनमें से एक या अधिक फूल अर्पित कर सकते हैं।)
- धूप (अगरबत्ती या धूपबत्ती)
- नैवेद्य (प्याज और लहसुन रहित शाकाहारी भोजन)
- फल (केला सहित पाँच या अधिक प्रकार के फल। इच्छानुसार एक फल भी अर्पित कर सकते हैं।)
- बेलपत्र (विल्व पत्र) – यह सबसे महत्वपूर्ण अर्पणों में से एक है।
- सूखे मेवे – जैसे सूखे खजूर एवं अन्य मेवे (वैकल्पिक)
- ताम्बूल – पान, सुपारी, दक्षिणा तथा भूरा नारियल (दो भागों में विभाजित)
- चंदन (चंदन का लेप)
- अक्षत (हल्दी मिश्रित कच्चे चावल)
- विभूति (पवित्र भस्म)
- पंचपात्र (चांदी, पीतल या तांबे का; स्टील का प्रयोग न करें) – आचमन और पूजा के लिए
- प्रसाद रखने के लिए थाली या ट्रे
- जनेऊ (पवित्र धागा)
- कलावा (मौली)
- गुलाल
- तीन स्वच्छ एवं नए कपड़े (अधिमानतः सफेद) –
- एक चौकी ढकने के लिए
- एक भगवान शिव को वस्त्र अर्पित करने के लिए
- एक अभिषेक के बाद मूर्ति पोंछने के लिए
- पंचामृत (वैकल्पिक) – केला, शहद, मिश्री, घी और किशमिश से तैयार
- अभिषेक सामग्री – गंगाजल, शुद्ध जल, शहद, घी, दूध और दही (अभिषेक शिवलिंग या मूर्ति होने पर ही करें)
- पूजा स्थल की शुद्धि के लिए गंगाजल
- विभिन्न अनुष्ठानों हेतु शुद्ध जल
शिव पूजन विधि (षोडशोपचार पूजा)
शिवरात्रि तथा भगवान शिव से संबंधित अन्य पावन अवसरों पर भगवान शिव की पूजा पुराणोक्त मंत्रों एवं सोलह उपचारों के साथ की जाती है। सोलह विधियों से की जाने वाली इस पूजा को षोडशोपचार पूजा कहा जाता है।
🔹 ध्यानम्
पूजा की शुरुआत भगवान शिव के ध्यान से करनी चाहिए। शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा के समक्ष बैठकर निम्न मंत्र का जप करें —
ध्यान मंत्र:
ध्यानिनित्यं महेशं राजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसम्।
रत्नकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्॥
पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृतिं वसानम्।
विश्वाद्यं विश्ववन्द्यं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
🔹 आवाहनम्
आवाहनं समर्पयामि
अगच्छ भगवन् देव स्थानं चात्र स्थिरो भव।
यावत् पूजां करिष्यामि तावत् त्वं सन्निधौ भव॥
🔹 पाद्यम्
पाद्यं समर्पयामि
महादेव महेशान महादेव परात्पर।
पाद्यं गृहाण मच्छक्त्या पार्वतीसहितेश्वर॥
🔹 अर्घ्यम्
अर्घ्यं समर्पयामि
त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
अर्घ्यं गृहाण देवेश साम्ब सर्वार्थदायक॥
🔹 आचमनीयम्
आचमनीयं समर्पयामि
त्रिपुरान्तक दीनार्ति नाशन श्रीकण्ठ शाश्वत।
गृहाण आचमनीयं च पवित्रोदककल्पितम्॥
🔹 स्नान विधि (अभिषेक क्रम)
गोदुग्ध स्नानम्
गोदुग्ध स्नानं समर्पयामि
दधि स्नानम्
दधि स्नानं समर्पयामि
घृत स्नानम्
घृत स्नानं समर्पयामि
मधु स्नानम्
मधु स्नानं समर्पयामि
शर्करा स्नानम्
शर्करा स्नानं समर्पयामि
शुद्धोदक स्नानम्
शुद्धोदक स्नानं समर्पयामि
गंगा च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
🔹 वस्त्र
वस्त्रं समर्पयामि
सर्वभूषाधिके सौम्ये लोकलज्जानिवारिणे।
मयोपपादितं वस्त्रं गृहाण परमेश्वर॥
🔹 यज्ञोपवीत
यज्ञोपवीतं समर्पयामि
यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।
आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥
🔹 गन्ध
गन्धं समर्पयामि
श्रीखण्डचन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम्।
विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रतिगृह्यताम्॥
🔹 अक्षत
अक्षतान् समर्पयामि
अक्षताः सुरश्रेष्ठाः शुभ्रा धौताश्च निर्मलाः।
मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वर॥
🔹 पुष्प
पुष्पाणि समर्पयामि
नानासुगन्धिपुष्पाणि यथाकालोद्भवानि च।
पुष्पाणि समर्पयामि गृहाण परमेश्वर॥
🔹 बिल्वपत्र
बिल्वपत्राणि समर्पयामि
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम्।
त्रिजन्मपापसंहारं एकबिल्वं शिवर्पणम्॥
🔹 धूप
धूपं आघ्रापयामि
वनस्पतिरसोद्भूतं गन्धाढ्यं सुमनोहरम्।
आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥
🔹 दीप
दीपं दर्शयामि
साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया।
दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम्॥
🔹 नैवेद्य
नैवेद्यं निवेदयामि
शर्कराघृतसंयुक्तं मधुरं स्वादुचोत्तमम्।
उपहारसमायुक्तं नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम्॥
🔹 ताम्बूल
ताम्बूलं समर्पयामि
पूगीफलसमायुक्तं नागवल्लीदलैर्युतम्।
एलाचूर्णादिसंयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यताम्॥
🔹 दक्षिणा
दक्षिणां समर्पयामि
हिरण्यगर्भगर्भस्थं हेमबीजं विभावसुः।
अनन्तपुण्यफलदम् शान्तिं प्रयच्छ मे॥
🔹 आरती
आरार्तिक्यं समर्पयामि
कर्पूरगौरं करुणावतारं
संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे
भवं भवानीसहितं नमामि॥
🔹 प्रदक्षिणा
प्रदक्षिणां समर्पयामि
यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च।
तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणे पदे पदे॥
🔹 मंत्र पुष्पांजलि
मंत्रपुष्पांजलिं समर्पयामि
नानासुगन्धिपुष्पाणि यथाकालोद्भवानि च।
पुष्पांजलिं मया दत्तां गृहाण परमेश्वर॥
🔹 क्षमाप्रार्थना
आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम।
तस्मात् करुण्यभावेन रक्षस्व परमेश्वर॥
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