Saraswati Stotram (Yagnavalkya Krutam) देवी सरस्वती की अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तुति है, जिसकी रचना महान ऋषि याज्ञवल्क्य द्वारा की गई मानी जाती है। यह स्तोत्र ज्ञान, बुद्धि, वाणी, स्मरण शक्ति और विद्या की प्राप्ति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
इस स्तोत्र का नियमित पाठ विद्यार्थियों, शिक्षकों, लेखकों और ज्ञान साधकों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। सरस्वती स्तोत्रम (याज्ञवल्क्य कृतम्) का पाठ मन को एकाग्र करता है, वाणी को शुद्ध करता है और साधक को विद्या के मार्ग पर आगे बढ़ाता है।
इस पोस्ट में आप Saraswati Stotram Lyrics को संस्कृत, हिंदी अर्थ और सरल भावार्थ के साथ पढ़ पाएँगे, जिससे पाठ का आध्यात्मिक प्रभाव और भी गहरा हो जाता है।
॥ श्री सरस्वती स्तोत्रम् | याज्ञवल्क्य उवाच ॥
Shri Saraswati Stotram (Yajnavalkya Uvaacha)
कृपां कुरु जगन्मातर्मामेवं हततेजसम्।
गुरुशापात्स्मृतिभ्रष्टं विद्याहीनं च दुःखितम् ॥1॥
ज्ञानं देहि स्मृतिं देहि विद्यां देहि देवते।
प्रतिष्ठां कवितां देहि शक्तं शिष्यप्रबोधिकाम् ॥2॥
ग्रन्थनिर्मितिशक्तिं च सच्छिष्यं सुप्रतिष्ठितम्।
प्रतिभां सत्सभायां च विचारक्षमतां शुभाम् ॥3॥
लुप्तां सर्वां दैववशान्नवं कुरु पुनः पुनः।
यथाङ्कुरं जनयति भगवान् योगमायया ॥4॥
ब्रह्मस्वरूपा परमा ज्योति:रूपा सनातनी।
सर्वविद्याधिदेवी तस्यै वाण्यै नमो नमः ॥5॥
यया विना जगत्सर्वं शश्वज्जीवन्मृतं सदा।
ज्ञानाधिदेवी या तस्यै सरस्वत्यै नमो नमः ॥6॥
यया विना जगत्सर्वं मूकमुन्मत्तवत्सदा।
वागधिष्ठातृदेवी तस्यै वाण्यै नमो नमः ॥7॥
हिमचन्दनकुन्देन्दुकुमुदाम्भोजसंनिभा।
वर्णाधिदेवी तस्यै चाक्षरायै नमो नमः ॥8॥
विसर्गबिन्दुमात्राणां यदधिष्ठानमेव च।
इत्थं त्वं गीयसे सद्भिर्भारत्यै ते नमो नमः ॥9॥
यया विनाऽत्र संख्याकृत् संख्यां कर्तुं न शक्नुते।
कालसंख्यास्वरूपा तस्यै देव्यै नमो नमः ॥10॥
व्याख्यास्वरूपा या देवी व्याख्याधिष्ठातृदेवता।
भ्रमसिद्धान्तरूपा तस्यै देव्यै नमो नमः ॥11॥
स्मृतिशक्तिर्ज्ञानशक्तिर्बुद्धिशक्तिस्वरूपिणी।
प्रतिभाकल्पनाशक्तिर्या तस्यै नमो नमः ॥12॥
सनत्कुमारो ब्रह्माणं ज्ञानं पप्रच्छ यत्र वै।
बभूव जडवत्सोऽपि सिद्धान्तं कर्तुमक्षमः ॥13॥
तदाऽऽजगाम भगवानात्मा श्रीकृष्ण ईश्वरः।
उवाच स च तं स्तौहि वाणीमिति प्रजापते ॥14॥
स च तुष्टाव तां ब्रह्मा चाज्ञया परमात्मनः।
चकार तत्प्रसादेन तदा सिद्धान्तमुत्तमम् ॥15॥
यदाप्यनन्तं पप्रच्छ ज्ञानमेकं वसुन्धरा।
बभूव मूकवत्सोऽपि सिद्धान्तं कर्तुमक्षमः ॥16॥
तदा त्वां च स तुष्टाव सन्त्रस्तः कश्यपाज्ञया।
ततश्चकार सिद्धान्तं निर्मलं भ्रमभञ्जनम् ॥17॥
व्यासः पुराणसूत्रं च पप्रच्छ वाल्मिकिं यदा।
मौनीभूतः स सस्मार त्वामेव जगदम्बिकाम् ॥18॥
तदा चकार सिद्धान्तं त्वद्वरेण मुनीश्वरः।
स प्राप निर्मलं ज्ञानं प्रमादध्वंसकारणम् ॥19॥
पुराणसूत्रं श्रुत्वा स व्यासः कृष्णकलोद्भवः।
त्वां सिषेवे च दध्यौ तं शतवर्षं च पुष्करे ॥20॥
तदा त्वत्तो वरं प्राप्य स कवीन्द्रो बभूव ह।
तदा वेदविभागं च पुराणानि चकार ह ॥21॥
यदा महेन्द्रे पप्रच्छ तत्त्वज्ञानं शिवा शिवम्।
क्षणं त्वामेव सञ्चिन्त्य तस्यै ज्ञानं दधौ विभुः ॥22॥
पप्रच्छ शब्दशास्त्रं च महेन्द्रश्च बृहस्पतिम्।
दिव्यं वर्षसहस्रं च स त्वां दध्यौ च पुष्करे ॥23॥
तदा त्वत्तो वरं प्राप्य दिव्यं वर्षसहस्रकम्।
उवाच शब्दशास्त्रं च तदर्थं च सुरेश्वरम् ॥24॥
अध्यापिताश्च यैः शिष्याः यैरधीतं मुनीश्वरैः।
ते च त्वां परिसञ्चिन्त्य प्रवर्तन्ते सुरेश्वरि ॥25॥
त्वं संस्तुता पूजिता च मुनीन्द्रमनुमानवैः।
दैत्यैश्च सुरैश्चापि ब्रह्मविष्णुशिवादिभिः ॥26॥
जडीभूतः सहस्रास्यः पञ्चवक्त्रश्चतुर्मुखः।
यां स्तोतुं किमहं स्तौमि तामेकास्येन मानवः ॥27॥
इत्युक्त्वा याज्ञवल्क्यश्च भक्तिनम्रात्मकन्धरः।
प्रणनाम निराहारो रुरोद च मुहुर्मुहुः ॥28॥
तदा ज्योतिःस्वरूपा सा तेनाऽदृष्टाऽप्युवाच तम्।
सुकवीन्द्रो भवेत्युक्त्वा वैकुण्ठं च जगाम ह ॥29॥
महामूर्खश्च दुर्मेधा वर्षमेकं च यः पठेत्।
स पण्डितश्च मेधावी सुकविश्च भवेद्ध्रुवम् ॥30॥
॥ इति श्रीब्रह्मवैवर्ते महापुराणे प्रकृतिखण्डे
नारदनारायणसंवादे
याज्ञवल्क्योक्तं वाणीस्तवनं नाम
पञ्चमोऽध्यायः सम्पूर्णम् ॥
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❓ FAQs
1. Saraswati Stotram (Yagnavalkya Krutam) क्या है?
Saraswati Stotram ऋषि याज्ञवल्क्य द्वारा रचित देवी सरस्वती की स्तुति है, जो ज्ञान, बुद्धि और स्मरण शक्ति की प्राप्ति के लिए जानी जाती है।
2. Saraswati Stotram का पाठ कब करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ प्रातःकाल, बसंत पंचमी, परीक्षा से पहले या प्रतिदिन अध्ययन के समय करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
3. Saraswati Stotram के क्या लाभ हैं?
इस स्तोत्र के नियमित पाठ से:
- स्मरण शक्ति बढ़ती है
- ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है
- वाणी शुद्ध होती है
- अध्ययन में एकाग्रता आती है
4. Saraswati Stotram कौन पढ़ सकता है?
विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, प्रतियोगी परीक्षार्थी और कोई भी ज्ञान-साधक इसका पाठ कर सकता है।
5. क्या Saraswati Stotram घर पर पढ़ा जा सकता है?
हाँ, इसे घर पर देवी सरस्वती के चित्र या पुस्तक के सामने श्रद्धा से पढ़ा जा सकता है।



