Chhath Puja Vrat Katha | छठ पूजा व्रत कथा

Chhath Puja Vrat Katha worship of Surya Dev and Chhathi Maiya

छठ पूजा व्रत कथा (Chhath Puja Vrat Katha) सनातन परंपरा का एक अत्यंत पावन और कठोर व्रत मानी जाती है। यह महापर्व मुख्य रूप से सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होता है। कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाने वाला यह व्रत श्रद्धा, संयम और परिवार की सुख-समृद्धि का प्रतीक है।

छठ पूजा में व्रती चार दिनों तक नियम, उपवास और शुद्धता का विशेष ध्यान रखते हैं। मान्यता है कि छठ पूजा व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से संतान सुख, आरोग्य, समृद्धि और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इस कथा के बिना छठ व्रत अधूरा माना जाता है।

Chhath Puja Vrat Katha | छठ पूजा व्रत कथा

एक समय की बात है। एक राजा थे जिनका नाम प्रियंवद था। उनकी पत्नी का नाम मालिनी था। विवाह के कई वर्षों बाद भी उन्हें संतान सुख की प्राप्ति नहीं हुई। इस कारण राजा और रानी दोनों अत्यंत चिंतित रहते थे।

संतान प्राप्ति के उपाय हेतु राजा प्रियंवद ने कश्यप ऋषि से परामर्श लिया। ऋषि कश्यप ने उन्हें पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कराने का सुझाव दिया। उनके निर्देशानुसार यज्ञ संपन्न हुआ और यज्ञ के पश्चात ऋषि ने रानी मालिनी को प्रसाद स्वरूप खीर प्रदान की।

खीर ग्रहण करने के प्रभाव से रानी मालिनी गर्भवती हुईं, जिससे राजा प्रियंवद अत्यंत प्रसन्न हुए। समय आने पर रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया, किंतु दुर्भाग्यवश वह बालक मृत अवस्था में उत्पन्न हुआ। यह दृश्य देखकर राजा अत्यंत दुखी हो गए।

गहरे शोक में डूबे राजा अपने पुत्र के शव को लेकर श्मशान पहुँचे और जीवन त्यागने का निश्चय कर लिया। उसी समय एक दिव्य प्रकाश प्रकट हुआ और देवी देवसेना वहाँ अवतरित हुईं। देवी ने राजा से कहा—

“हे राजन! मेरा नाम षष्ठी है। तुम मेरी पूजा करो और लोगों को भी मेरी पूजा करने के लिए प्रेरित करो।”

देवी देवसेना की आज्ञा का पालन करते हुए राजा प्रियंवद ने कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को श्रद्धा और विधि-विधान से छठ पूजा की। उन्होंने यह व्रत पुत्र प्राप्ति की कामना से किया।

छठी मैया के कृपापूर्ण आशीर्वाद से राजा प्रियंवद को पुनः पुत्र की प्राप्ति हुई। तभी से प्रत्येक वर्ष कार्तिक शुक्ल षष्ठी को छठ पूजा का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाने लगा।

मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से छठ पूजा का व्रत रखकर विधिपूर्वक छठी मैया का पूजन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ देवी की कृपा से अवश्य पूर्ण होती हैं।

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