बृहस्पति देव की आरती: सम्पूर्ण अर्थ, महत्व और पाठ करने के अद्भुत लाभ

हिंदू धर्म में बृहस्पतिवार (Thursday) का दिन देवताओं के गुरु, भगवान बृहस्पति को समर्पित है। गुरु को ज्ञान, धर्म, और सौभाग्य का अधिष्ठाता माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बृहस्पति ग्रह की शुभ दृष्टि से व्यक्ति का जीवन सुख-सुविधाओं और मानसिक शांति से भर जाता है।

गुरुवार के व्रत और पूजा के अंत में बृहस्पति देव की आरती करना अनिवार्य माना गया है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि गुरु देव की आरती का क्या महत्व है और इसे करने से जीवन में क्या सकारात्मक बदलाव आते हैं।

बृहस्पति देव की आरती: एक परिचय (Introduction)

बृहस्पति देव, जिन्हें ‘गुरु’ या ‘जीवा’ भी कहा जाता है, ऋषियों और देवताओं के परामर्शदाता हैं। उनकी आरती—“जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा…”—उनके दिव्य स्वरूप और उनकी असीम कृपा का वर्णन करती है। आरती के माध्यम से भक्त गुरु देव से अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश देने की प्रार्थना करते हैं।

भगवान विष्णु के स्वरूप माने जाने वाले बृहस्पति देव की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है, जो शुद्धता और सात्विकता का प्रतीक है।


बृहस्पति देव की आरती करने के चमत्कारी लाभ (Benefits)

शास्त्रों के अनुसार, श्रद्धापूर्वक बृहस्पति देव की आरती का पाठ करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • बौद्धिक विकास: विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए यह आरती अत्यंत लाभकारी है। यह बुद्धि को तीव्र करती है और स्मृति शक्ति (Memory) बढ़ाती है।
  • शीघ्र विवाह के योग: जिन जातकों के विवाह में बाधाएं आ रही हैं, उनके लिए गुरुवार के दिन गुरु देव की पूजा और आरती करना रामबाण उपाय माना जाता है।
  • धन और समृद्धि: गुरु को धन का कारक माना गया है। उनकी कृपा से व्यापार में उन्नति होती है और रुका हुआ धन वापस मिलने के योग बनते हैं।
  • स्वास्थ्य और दीर्घायु: नियमित आरती और ध्यान से मानसिक तनाव कम होता है, जिससे शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार आता है।
  • गुरु दोष से मुक्ति: जिनकी कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर स्थिति में है, उन्हें प्रतिदिन या प्रत्येक गुरुवार को यह आरती अवश्य करनी चाहिए।

जय बृहस्पति देवा,
ऊं जय बृहस्पति देवा।
छिन छिन भोग लगाऊं,
कदली फल मेवा॥

ऊं जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा॥

तुम पूरण परमात्मा,
तुम अन्तर्यामी।
जगत्पिता जगदीश्वर,
तुम सबके स्वामी॥

ऊं जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा॥

चरणामृत निज निर्मल,
सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक,
कृपा करो भर्ता॥

ऊं जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा॥

तन मन धन अर्पण कर,
जो जन शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकर,
आकर द्वार खड़े॥

ऊं जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा॥

दीनदयाल दयानिधि,
भक्तहितकारी।
पाप दोष सब हर्ता,
भवभंधन हारी॥

ऊं जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा॥

सकल मनोरथ दायक,
सब संशय हारो।
विषय विकार मिटाओ,
संतन सुखकारी॥

ऊं जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा॥

जो कोई आरती तेरी,
प्रेम सहित गावे।
जेठानंद आनंदकर,
सो निश्चय पावे॥

ऊं जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा॥

सब बोलो विष्णु भगवान की जय!
बोलो बृहस्पतिदेव भगवान की जय!!

बृहस्पति देव की आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपने भीतर के गुरु तत्व को जगाने का माध्यम है। यदि आप जीवन में सफलता, शांति और स्थिरता चाहते हैं, तो गुरुवार के दिन पूर्ण निष्ठा के साथ गुरु देव की आराधना करें।

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