गुजरात के वेरावल बंदरगाह के पास स्थित श्री सोमनाथ मंदिर (Shree Somnath Temple) बारह ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है। ऋग्वेद के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण स्वयं चंद्रदेव (सोम) ने किया था। अरब सागर के तट पर स्थित यह मंदिर अपनी अद्वितीय वास्तुकला और गौरवशाली इतिहास के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
यदि आप बाबा सोमनाथ के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो यह लेख आपको आरती के समय, लाइव दर्शन और मंदिर के नियमों की पूरी जानकारी प्रदान करेगा।
सोमनाथ मंदिर लाइव दर्शन (Live Darshan Online)
जो श्रद्धालु व्यक्तिगत रूप से मंदिर नहीं पहुँच सकते, वे श्री सोमनाथ ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से प्रतिदिन लाइव दर्शन कर सकते हैं।
- आधिकारिक वेबसाइट: somnath.org
- लाइव दर्शन समय: सुबह 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक।
सोमनाथ मंदिर आरती और दर्शन समय सारिणी 2026
मंदिर के कपाट सुबह जल्दी खुलते हैं और देर रात तक दर्शन के लिए खुले रहते हैं। यहाँ मुख्य आरतियों का विवरण दिया गया है:
| विवरण | समय |
| मंदिर खुलने का समय | सुबह 06:00 बजे |
| प्रातः आरती (मंगला आरती) | सुबह 07:00 बजे |
| मध्याह्न आरती (भोग आरती) | दोपहर 12:00 बजे |
| सायं आरती (संध्या आरती) | शाम 07:00 बजे |
| मंदिर बंद होने का समय | रात 10:00 बजे |
विशेष आकर्षण: लाइट एंड साउंड शो (Jay Somnath)
प्रतिदिन शाम को मंदिर परिसर में “जय सोमनाथ” लाइट एंड साउंड शो आयोजित किया जाता है।
- समय: रात 08:00 बजे से 09:00 बजे तक।
- विशेषता: इसमें मंदिर के विनाश और पुनर्निर्माण के गौरवशाली इतिहास को लेजर लाइट और ध्वनि के माध्यम से दिखाया जाता है।
सोमनाथ महादेव दर्शन के अद्भुत लाभ (Benefits)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से भक्त को निम्नलिखित फल प्राप्त होते हैं:
- चंद्र दोष से मुक्ति: माना जाता है कि यहाँ दर्शन करने से कुंडली के अशुभ चंद्र दोष समाप्त होते हैं और मानसिक शांति मिलती है।
- पापों का नाश: शिव पुराण के अनुसार, सोमनाथ के दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।
- आरोग्य की प्राप्ति: चंद्रदेव ने अपना क्षय रोग (टीबी) यहीं शिव की आराधना कर ठीक किया था, इसलिए भक्त यहाँ अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ आते हैं।
- मोक्ष की प्राप्ति: यह स्थान ‘प्रभास क्षेत्र’ कहलाता है, जहाँ दर्शन करने से व्यक्ति को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिलती है।
श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण नियम और ड्रेस कोड
- ड्रेस कोड: मंदिर में प्रवेश के लिए शालीन कपड़े पहनना अनिवार्य है। छोटे वस्त्र, हाफ पैंट या बरमूडा पहनकर प्रवेश वर्जित है। पारंपरिक वस्त्र (साड़ी, कुर्ता-पायजामा) पहनना सबसे अच्छा है।
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: मोबाइल फोन, कैमरा और स्मार्ट वॉच मंदिर के अंदर ले जाना सख्त मना है। मंदिर के बाहर निशुल्क क्लॉक रूम की सुविधा उपलब्ध है।
- सुरक्षा जाँच: मुख्य मंदिर में प्रवेश से पहले सभी श्रद्धालुओं को गहन सुरक्षा जाँच से गुजरना पड़ता है।
श्री सोमनाथ मंदिर का गौरवशाली इतिहास (Brief History)
सोमनाथ मंदिर का इतिहास भक्ति, संघर्ष और पुनरुत्थान की एक अद्भुत गाथा है। इसे ‘अविनाशी ज्योतिर्लिंग’ कहा जाता है क्योंकि इसे कई बार नष्ट किया गया, लेकिन हर बार यह और भी भव्य रूप में उठ खड़ा हुआ।
- पौराणिक उत्पत्ति: शिव पुराण के अनुसार, इस मंदिर का पहला निर्माण स्वयं चंद्रदेव (सोम) ने सोने से किया था। बाद में रावण ने चांदी से, भगवान कृष्ण ने चन्दन की लकड़ी से और भीमदेव सोलंकी ने पत्थर से इसका पुनर्निर्माण करवाया।
- विदेशी आक्रमण: अपनी अपार धन-संपदा के कारण यह मंदिर कई विदेशी आक्रांताओं के निशाने पर रहा। सन 1024 में महमूद गजनवी ने मंदिर पर आक्रमण कर इसकी संपत्ति लूटी और शिवलिंग को खंडित किया। इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब जैसे शासकों ने भी इसे भारी क्षति पहुँचाई।
- आधुनिक पुनरुद्धार: भारत की आजादी के बाद, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने इस मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। वर्तमान भव्य मंदिर का निर्माण 1951 में पूर्ण हुआ और भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने यहाँ ज्योतिर्लिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की।



