हिंदू धर्म में गुप्त नवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक और तांत्रिक महत्व माना गया है। यह नवरात्रि वर्ष में दो बार—माघ और आषाढ़ मास में—मनाई जाती है और इसे “गुप्त” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दौरान साधना, जप और पूजन गुप्त रूप से किए जाते हैं। गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से सिद्धि, साधना और शक्ति उपासना के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
गुप्त नवरात्रि के दिनों में श्रद्धालु माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करते हैं और व्रत, मंत्र-जप तथा पूजा के माध्यम से देवी कृपा प्राप्त करते हैं। शास्त्रों के अनुसार गुप्त नवरात्रि व्रत कथा का श्रद्धा से पाठ या श्रवण करने से साधक को मानसिक शांति, आध्यात्मिक बल और जीवन की बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है।
माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि का शुभ आरंभ होता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ-साथ दस महाविद्याओं की विशेष पूजा की जाती है। यह नवरात्रि विशेष रूप से तांत्रिक साधना और गूढ़ उपासना के लिए जानी जाती है, जिसमें विधि-विधान से माँ दुर्गा की आराधना की जाती है।
आइए जानते हैं गुप्त नवरात्रि की पावन व्रत कथा—
गुप्त नवरात्रि व्रत कथा | Gupt Navratri Vrat Katha
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार ऋषि श्रृंगी अपने शिष्यों और भक्तों को दर्शन दे रहे थे। उसी समय भीड़ में से एक स्त्री आगे आई। वह अत्यंत व्यथित और क्रोधित थी। उसने ऋषि से कहा—
“मेरे पति सदैव विकारों में लिप्त रहते हैं। इसी कारण न तो मैं पूजा कर पाती हूँ और न ही धर्म-भक्ति से जुड़ा कोई कार्य कर सकती हूँ।”
उस स्त्री ने आगे कहा—
“मेरे पति मांसाहारी और जुआ खेलने वाले हैं, परंतु मैं माँ दुर्गा की सेवा करना चाहती हूँ। देवी की भक्ति और साधना के माध्यम से मैं अपने तथा अपने परिवार के जीवन का उद्धार करना चाहती हूँ।”
उस स्त्री की गहरी श्रद्धा और भक्ति देखकर ऋषि श्रृंगी अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने उसे स्नेहपूर्वक समझाते हुए उपाय बताया। ऋषि ने कहा कि सामान्यतः लोग वासंतिक और शारदीय नवरात्रि से परिचित होते हैं, किंतु इनके अतिरिक्त दो और नवरात्रियाँ होती हैं, जिन्हें गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि शारदीय नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, जबकि गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की आराधना की जाती है। नवरात्रि की इस प्रमुख देवी को सर्वैश्वर्यकारिणी देवी कहा गया है। गुप्त नवरात्रि के दिनों में जो भक्त श्रद्धा से माँ दुर्गा की पूजा करता है, उस पर देवी अपनी विशेष कृपा बनाए रखती हैं।
ऋषि श्रृंगी ने आगे कहा कि चाहे व्यक्ति लालची हो, कामी हो, नशे या मांसाहार में लिप्त हो, अथवा किसी कारणवश नियमित पूजा न कर पाता हो—यदि वह गुप्त नवरात्रि में सच्चे मन से देवी माँ की उपासना करता है, तो उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आते हैं।
ऋषि श्रृंगी के वचनों पर पूर्ण विश्वास रखते हुए उस स्त्री ने श्रद्धा और नियमपूर्वक गुप्त नवरात्रि की पूजा आरंभ की। माँ दुर्गा उसकी भक्ति से प्रसन्न हुईं और उसके जीवन में धीरे-धीरे परिवर्तन होने लगा।
उसके घर में सुख-शांति का वास हुआ और उसका पति भी गलत मार्ग छोड़कर सही मार्ग पर लौट आया। इस प्रकार देवी माँ की कृपा से उस स्त्री और उसके परिवार का जीवन सफल और मंगलमय हो गया। 🙏



