सूर्य अष्टकम (Surya Ashtakam) भगवान सूर्यदेव की स्तुति में रचित एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है। इसमें सूर्यदेव को जीवन, ऊर्जा, तेज, आरोग्य और आत्मबल का परम स्रोत बताया गया है। श्री सूर्य अष्टकम का नियमित पाठ शरीर और मन दोनों को सशक्त बनाता है तथा नकारात्मकता और आलस्य को दूर करता है।
यह स्तोत्र विशेष रूप से प्रातःकाल सूर्योदय के समय, रविवार, रथ सप्तमी और सूर्य ग्रह से संबंधित दोषों की शांति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। Surya Ashtakam Lyrics का श्रद्धा-पूर्वक पाठ साधक के जीवन में स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार करता है।
इस पोस्ट में आप सूर्य अष्टकम के शुद्ध लिरिक्स, उसका आध्यात्मिक महत्व और पाठ से होने वाले लाभों को सरल भाषा में जान पाएँगे।
श्री सूर्य अष्टकम – हिन्दी लिरिक्स
(Shri Surya Ashtakam Lyrics in Hindi)
आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर ।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते ॥1॥
सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम् ।
श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥2॥
लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥3॥
त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥4॥
बृंहितं तेजःपुञ्जं च वायुमाकाशमेव च ।
प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥5॥
बन्धूकपुष्पसंकाशं हारकुण्डलभूषितम् ।
एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥6॥
तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेजःप्रदीपनम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥7॥
तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥8॥
इति श्रीशिवप्रोक्तं सूर्याष्टकं सम्पूर्णम् ॥
सूर्याष्टकं पठेन्नित्यं ग्रहपीडा प्रणाशनम् ।
अपुत्रो लभते पुत्रं दारिद्रो धनवान् भवेत् ॥
अमिषं मधुपानं च यः करोति रवेर्दिने ।
सप्तजन्म भवेद् रोगी जन्मजन्म दरिद्रता ॥
स्त्री-तैल-मधु-मांसानि ये त्यजन्ति रवेर्दिने ।
न व्याधि-शोक-दारिद्र्यं सूर्यलोकं च गच्छति ॥
Shri Surya Ashtakam Lyrics in English
Ādideva namastubhyaṁ
Prasīda mama Bhāskara |
Divākara namastubhyaṁ
Prabhākara namo’stu te ||1||
Saptaśva-rathamārūḍhaṁ
Pracaṇḍaṁ Kaśyapātmajam |
Śvetapadma-dharaṁ devaṁ
Taṁ Sūryaṁ praṇamāmyaham ||2||
Lohitaṁ rathamārūḍhaṁ
Sarvaloka-pitāmaham |
Mahāpāpa-haraṁ devaṁ
Taṁ Sūryaṁ praṇamāmyaham ||3||
Traiguṇyaṁ ca mahāśūraṁ
Brahma-Viṣṇu-Maheśvaram |
Mahāpāpa-haraṁ devaṁ
Taṁ Sūryaṁ praṇamāmyaham ||4||
Bṛṁhitaṁ tejaḥ-puñjaṁ ca
Vāyum ākāśam eva ca |
Prabhuṁ ca sarvalokānāṁ
Taṁ Sūryaṁ praṇamāmyaham ||5||
Bandhūka-puṣpa-saṅkāśaṁ
Hāra-kuṇḍala-bhūṣitam |
Ekacakra-dharaṁ devaṁ
Taṁ Sūryaṁ praṇamāmyaham ||6||
Taṁ Sūryaṁ jagatkartāraṁ
Mahātejaḥ-pradīpanam |
Mahāpāpa-haraṁ devaṁ
Taṁ Sūryaṁ praṇamāmyaham ||7||
Taṁ Sūryaṁ jagatāṁ nāthaṁ
Jñāna-vijñāna-mokṣadam |
Mahāpāpa-haraṁ devaṁ
Taṁ Sūryaṁ praṇamāmyaham ||8||
Iti Śrī Śiva-proktaṁ
Sūryāṣṭakaṁ sampūrṇam ||
Sūryāṣṭakaṁ paṭhen nityaṁ
Graha-pīḍā-praṇāśanam |
Aputro labhate putraṁ
Daridro dhanavān bhavet ||
Āmiṣaṁ madhu-pānaṁ ca
Yaḥ karoti raver dine |
Sapta-janma bhaved rogī
Janma-janma daridratā ||
Strī-taila-madhu-māṁsāni
Ye tyajanti raver dine |
Na vyādhi-śoka-daridryaṁ
Sūrya-lokaṁ ca gacchati ||
❓ FAQs
1. Surya Ashtakam क्या है?
यह भगवान सूर्यदेव की स्तुति में रचित अष्टश्लोकी स्तोत्र है, जिसका पाठ स्वास्थ्य, ऊर्जा और तेज की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
2. Shri Surya Ashtakam का पाठ कब करना चाहिए?
प्रातःकाल सूर्योदय के समय, रविवार, रथ सप्तमी या प्रतिदिन स्नान के बाद इसका पाठ शुभ माना जाता है।
3. Surya Ashtakam के क्या लाभ हैं?
नियमित पाठ से स्वास्थ्य में सुधार, आत्मविश्वास में वृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और ग्रह-दोष शांति मानी जाती है।
4. क्या Surya Ashtakam घर पर पढ़ा जा सकता है?
हाँ, इसे घर पर सूर्यदेव के चित्र के सामने श्रद्धा और शुद्ध मन से पढ़ा जा सकता है।
5. Surya Ashtakam किस भाषा में उपलब्ध है?
यह स्तोत्र संस्कृत में रचित है और आजकल हिंदी व अंग्रेज़ी लिरिक्स में भी पढ़ा जाता है।



