सूर्य नमस्कार के मंत्र और उनका अर्थ I Surya Namaskar Mantra & Meaning in Hindi

सूर्य नमस्कार के मंत्र और अर्थ हिंदी में

सूर्य नमस्कार एक संपूर्ण योग प्रक्रिया है, जिसे प्रतिदिन आदर्श रूप से 13 बार किया जाना चाहिए। प्रत्येक चरण में सूर्य नमस्कार मंत्रों का श्रद्धापूर्वक उच्चारण करने से इसका आध्यात्मिक और शारीरिक प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
अन्य योगासनों की तुलना में सूर्य नमस्कार को श्रेष्ठ इसलिए माना गया है क्योंकि इसमें शरीर, श्वास और मन — तीनों का संतुलित अभ्यास होता है।

यदि सूर्य नमस्कार को नियमित दिनचर्या में शामिल किया जाए, तो यह सौर चक्र (Solar Plexus) को सक्रिय करता है। इससे व्यक्ति की रचनात्मकता, निर्णय क्षमता, आत्मविश्वास और सहज बुद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही मानसिक स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।

📜 शास्त्रों में सूर्य नमस्कार का महत्व

शास्त्रों में सूर्य नमस्कार की महिमा बताते हुए यह श्लोक वर्णित है—

आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने।
आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ॥

अर्थ:
जो व्यक्ति प्रतिदिन श्रद्धा से सूर्य नमस्कार करता है, उसकी आयु, बुद्धि, शक्ति, ओज और तेज में वृद्धि होती है। साथ ही नियमित सूर्य नमस्कार से त्वचा से संबंधित अनेक विकार भी दूर होते हैं।


🔱 सूर्य नमस्कार के 12 मंत्र और उनके भावार्थ

1️⃣ ॐ मित्राय नमः

मित्र स्वरूप सूर्य को नमन
‘मित्र’ का अर्थ है सखा या शुभचिंतक। सूर्य देव समस्त जीवों के सच्चे मित्र माने गए हैं। इस मंत्र द्वारा हम सूर्य से मैत्रीभाव स्थापित करते हैं और यह भावना विकसित करते हैं कि हमें भी सभी के प्रति मित्रवत व्यवहार रखना चाहिए।


2️⃣ ॐ रवये नमः

स्वयं प्रकाशित तेजस्वी को प्रणाम
‘रवि’ वह शक्ति है जो स्वयं प्रकाशमान होकर समस्त जगत को आलोकित करती है। इस मंत्र के माध्यम से हम सूर्य से प्राप्त दिव्य ऊर्जा और जीवनदायिनी प्रकाश शक्ति को स्वीकार करते हैं।


3️⃣ ॐ सूर्याय नमः

सभी क्रियाओं के प्रेरक को नमन
सूर्य को सृष्टि की गतिशील शक्ति माना गया है। वेदों में सूर्य को सात अश्वों वाले रथ पर आरूढ़ दर्शाया गया है, जो चेतना की सात अवस्थाओं के प्रतीक हैं। यह मंत्र हमें चेतना के उच्च स्तर की ओर प्रेरित करता है।


4️⃣ ॐ भानवे नमः

अज्ञान नाशक प्रकाश को प्रणाम
सूर्य को गुरु तत्व का प्रतीक माना जाता है। जैसे सूर्य अंधकार को दूर करता है, वैसे ही ज्ञान अज्ञान को समाप्त करता है। इस मंत्र के माध्यम से हम आंतरिक अंधकार के नाश की प्रार्थना करते हैं।


5️⃣ ॐ खगाय नमः

आकाश में विचरण करने वाले को नमन
सूर्य की गति के आधार पर ही काल और समय की गणना होती है। यह मंत्र उस शक्ति के प्रति सम्मान प्रकट करता है जो हमें समय का बोध कराती है और जीवन को अनुशासित बनाती है।


6️⃣ ॐ पूष्णे नमः

पालनकर्ता को प्रणाम
सूर्य समस्त जीवन का पोषण करता है। यह मंत्र हमें सूर्य की उस शक्ति से जोड़ता है जो हमें शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से समर्थ बनाती है।


7️⃣ ॐ हिरण्यगर्भाय नमः

सृष्टि के मूल कारण को नमन
हिरण्यगर्भ को सृष्टि का बीज माना गया है। सम्पूर्ण ब्रह्मांड इसी दिव्य ऊर्जा से उत्पन्न हुआ है। इस मंत्र द्वारा हम रचनात्मक शक्ति के जागरण की प्रार्थना करते हैं।


8️⃣ ॐ मरीचये नमः

सूर्य किरणों को प्रणाम
‘मरीचि’ का अर्थ किरण है, साथ ही यह मृगमरीचिका का संकेत भी देता है। यह मंत्र हमें सत्य और असत्य के भेद को समझने की विवेक शक्ति प्रदान करने की कामना से जुड़ा है।


9️⃣ ॐ आदित्याय नमः

अदिति पुत्र को नमन
अदिति को अनंत शक्ति की जननी माना गया है। आदित्य उसी दिव्य शक्ति के प्रतीक हैं। इस मंत्र से हम उस अनंत सृजनात्मक ऊर्जा को प्रणाम करते हैं।


🔟 ॐ सवित्रे नमः

जागृति प्रदान करने वाले को प्रणाम
सविता उगते सूर्य का स्वरूप है, जो जड़ता को समाप्त कर हमें कर्मशील बनाता है। यह मंत्र जीवन में उत्साह और सक्रियता का संचार करता है।


1️⃣1️⃣ ॐ अर्काय नमः

ऊर्जा के स्त्रोत को नमन
‘अर्क’ का अर्थ ऊर्जा है। सूर्य सम्पूर्ण ब्रह्मांड की ऊर्जा का मूल स्रोत है। इस मंत्र द्वारा हम जीवन शक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।


1️⃣2️⃣ ॐ भास्कराय नमः

आत्मज्ञान के प्रकाशक को प्रणाम
यह अंतिम मंत्र आत्मबोध और मोक्ष पथ का संकेत देता है। सूर्य को उस दिव्य प्रकाश के रूप में स्वीकार किया जाता है जो हमें अंतिम सत्य की ओर ले जाता है।


🌺 समापन मंत्र

ॐ श्री सवित्रे सूर्यनारायणाय नमः

इन्हीं बारह मंत्रों के माध्यम से सूर्य नमस्कार की पवित्र साधना पूर्ण होती है, जिसमें शरीर, मन और आत्मा — तीनों का समन्वय होता है।

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❓ Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1. सूर्य नमस्कार में कुल कितने मंत्र होते हैं?

सूर्य नमस्कार में कुल 12 मंत्र होते हैं, जो सूर्य देव के 12 पावन नामों पर आधारित हैं।


Q2. सूर्य नमस्कार प्रतिदिन कितनी बार करना चाहिए?

शास्त्रों के अनुसार सूर्य नमस्कार प्रतिदिन 12 या 13 बार करना श्रेष्ठ माना गया है।


Q3. सूर्य नमस्कार करने का सबसे उत्तम समय कौन-सा है?

सूर्योदय के समय, खाली पेट, शांत और खुले वातावरण में सूर्य नमस्कार करना सबसे उत्तम माना जाता है।


Q4. क्या सूर्य नमस्कार बिना मंत्र के किया जा सकता है?

हाँ, सूर्य नमस्कार बिना मंत्र के भी किया जा सकता है, लेकिन मंत्रों के साथ करने से आध्यात्मिक लाभ अधिक प्राप्त होते हैं।


Q5. सूर्य नमस्कार के मुख्य लाभ क्या हैं?

सूर्य नमस्कार से शरीर स्वस्थ रहता है, मन शांत होता है, पाचन सुधरता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और आध्यात्मिक ऊर्जा का विकास होता है।


Q6. क्या सूर्य नमस्कार सभी आयु वर्ग के लोग कर सकते हैं?

सामान्यतः हाँ, लेकिन किसी गंभीर रोग या शारीरिक समस्या की स्थिति में योग विशेषज्ञ या चिकित्सक की सलाह लेना उचित होता है।


Q7. सूर्य नमस्कार में मंत्रों का क्या महत्व है?

मंत्र सूर्य देव की उपासना का माध्यम हैं। इनके उच्चारण से मन, शरीर और आत्मा में संतुलन स्थापित होता है।

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