Maa Annapurna Chalisa | माँ अन्नपूर्णा चालीसा पाठ

Maa Annapurna Chalisa lyrics in Hindi and English with Goddess Annapurna image

माँ अन्नपूर्णा चालीसा देवी अन्नपूर्णा की स्तुति का पावन पाठ है, जिन्हें अन्न, पोषण, करुणा और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। माँ अन्नपूर्णा सदा अपने भक्तों को अन्न, स्वास्थ्य और जीवन की आवश्यकताओं से परिपूर्ण रखती हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ Maa Annapurna Chalisa का पाठ करने से घर में अन्न की कभी कमी नहीं होती और दरिद्रता का नाश होता है।

नियमपूर्वक माँ अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से पारिवारिक सुख-शांति, आर्थिक स्थिरता और मन की संतुष्टि प्राप्त होती है। विशेष रूप से शुक्रवार, पूर्णिमा या नवरात्रि के दिनों में इस चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह चालीसा भक्तों के जीवन में कृतज्ञता, सेवा भाव और माँ की कृपा का अनुभव कराती है।

श्रद्धा और नियमपूर्वक Maa Annapurna Chalisa का पाठ करने से जीवन में अन्न, धन और शांति की निरंतर प्राप्ति होती है।

Maa Annapurna Chalisa Lyrics in Hindi

(माँ अन्नपूर्णा चालीसा)

॥ माँ अन्नपूर्णा चालीसा प्रारम्भ ॥

॥ दोहा ॥

विश्वेश्वर पद-पदम की रज, निज शीश लगाय।
अन्नपूर्णे, तव सुयश बरनौं, कवि मति लाय॥


॥ चौपाई ॥

नित्य आनंद करिणी माता,
वर अरु अभय भाव प्रख्याता॥

जय सौंदर्य सिंधु जग जननी,
अखिल पाप हर भव-भय-हरनी॥

श्वेत बदन पर श्वेत बसन पुनि,
संतन तव पद सेवत ऋषि-मुनि॥

काशी पुराधीश्वरी माता,
माहेश्वरी सकल जग त्राता॥

वृषभारूढ़ नाम रुद्राणी,
विश्व विहारिणि जय कल्याणी॥

पति देवता सुतीत शिरोमणि,
पदवी प्राप्त कीन्ह गिरी नंदिनि॥

पति-विछोह दुःख सहि नहिं पावा,
योग अग्नि तब बदन जरावा॥

देह तजत शिव चरण सनेहू,
राखेहु जात हिमगिरि गेहू॥

प्रकटी गिरिजा नाम धरायो,
अति आनंद भवन महँ छायो॥

नारद ने तब तोहिं भरमायो,
ब्याह करन हित पाठ पढ़ायो॥

ब्रह्मा, वरुण, कुबेर गनाये,
देवराज आदिक कहि गाये॥

सब देवन को सुजस बखानी,
मति पलटन की मन महँ ठानी॥

अचल रहीं तुम प्रण पर धन्या,
कीन्हीं सिद्ध हिमाचल कन्या॥

निज कौ तब नारद घबराये,
तब प्रण पूरण मंत्र पढ़ाये॥

करन हेतु तप तोहिं उपदेशेउ,
संत बचन तुम सत्य परेखेउ॥

गगनगिरा सुनि टरी न टारे,
ब्रह्मा तब तव पास पधारे॥

कहेउ पुत्रि वर माँगु अनूपा,
देहुँ आज तव मति अनुरूपा॥

तुम तप कीन्ह अलौकिक भारी,
कष्ट उठायहु अति सुकुमारी॥

अब संदेह छाँड़ि कछु मोसों,
है सौगंध नहिं छल तोसों॥

करत वेदविद् ब्रह्मा जानहु,
वचन मोर यह सांचा मानहु॥

तजि संकोच कहहु निज इच्छा,
देहौं मैं मनमानी भिक्षा॥

सुनि ब्रह्मा की मधुरी बानी,
मुख सों कछु मुसुकाय भवानी॥

बोली तुम का कहहु विधाता,
तुम तो जग के सृष्टाधाता॥

मम कामना गुप्त नहिं तोसों,
कहवावा चाहहु का मोंसों॥

दक्ष यज्ञ महँ मरती बारा,
शंभुनाथ पुनि होहिं हमारा॥

सो अब मिलहिं मोहिं मनभाये,
कहि तथास्तु विधि धाम सिधाये॥

तब गिरिजा शंकर तव भयऊ,
फल कामना संशयो गयऊ॥

चन्द्र-कोटि, रवि-कोटि प्रकाशा,
तब आनन महँ करत निवासा॥

माला पुस्तक अंकुश सोहै,
कर महँ अपर पाश मन मोहै॥

अन्नपूर्णे सदापूर्णे,
अज अनवघ अनंत पूर्णे॥

कृपा-सागरी क्षेमंकरि माँ,
भव विभूति आनंद भरी माँ॥

कमल विलोचन विलसित भाले,
देवि कालिके चंडि कराले॥

तुम कैलास महँ है गिरिजा,
विलसी आनंद साथ सिंधुजा॥

स्वर्ग महालक्ष्मी कहलायी,
मर्त्य लोक लक्ष्मी पद पायी॥

विलसी सब महँ सर्व स्वरूपा,
सेवत तोहिं अमरपुर भूपा॥

जो पढ़िहहिं यह तव चालीसा,
फल पाइहहिं शुभ साखी ईसा॥

प्रात समय जो जन मन लायो,
पढ़िहहिं भक्ति सुरुचि अधिकायो॥

स्त्री, कलत्र, पति, मित्र, पुत्र युत,
परमैश्वर्य लाभ लहि अद्भुत॥

राज-विमुख को राज दिवावै,
जस तेरो जन सुजस बढ़ावै॥

पाठ महा मुद मंगल दाता,
भक्त मनोवांछित निधि पाता॥


॥ दोहा ॥

जो यह चालीसा सुभग,
पढ़ि नावैंगे माथ।
तिनके कारज सिद्ध सब,
साखी काशी नाथ॥

Maa Annapurna Chalisa Lyrics in English

(माँ अन्नपूर्णा चालीसा)

॥ Doha ॥

Vishweshwar Pad-Padam Ki Raj, Nij Shish Lagaye।
Annapurne, Tav Suyash Baranau, Kavi Mati Laaye॥


॥ Chaupai ॥

Nitya Anand Karini Mata,
Var Aru Abhay Bhaav Prakhyata॥

Jai Saundarya Sindhu Jag Janani,
Akhil Paap Har Bhav-Bhay-Harani॥

Shwet Badan Par Shwet Basan Puni,
Santan Tav Pad Sevat Rishi-Muni॥

Kashi Puradhishwari Mata,
Maheshwari Sakal Jag Trata॥

Vrishabhaarudh Naam Rudrani,
Vishwa Vihaarini Jai Kalyani॥

Pati-Devata Suteet Shiromani,
Padavi Prapt Kinh Giri Nandini॥

Pati-Vichhoh Dukh Sahi Nahin Paava,
Yog Agni Tab Badan Jaraava॥

Deh Tajat Shiv Charan Sanehu,
Rakhehu Jaat Himagiri Gehu॥

Prakati Girija Naam Dharaayo,
Ati Anand Bhavan Mahan Chhaayo॥

Narad Ne Tab Tohin Bharmaayo,
Byaah Karan Hit Paath Padhaayo॥

Brahma, Varun, Kuber Ganaaye,
Devraaj Aadik Kahi Gaaye॥

Sab Devan Ko Sujas Bakhaani,
Mati Paltan Ki Man Mahan Thaani॥

Achal Rahin Tum Pran Par Dhanya,
Keenhi Siddh Himachal Kanya॥

Nij Kau Tab Narad Ghabraaye,
Tab Pran Pooran Mantra Padhaaye॥

Karan Hetu Tap Tohin Updesheu,
Sant Bachan Tum Satya Parekheu॥

Gagan-Gira Suni Tari Na Taare,
Brahma Tab Tav Paas Padhaare॥

Kaheu Putri Var Maangu Anoopa,
Dehun Aaj Tav Mati Anuroopa॥

Tum Tap Kinh Alaukik Bhaari,
Kasht Uthaayahu Ati Sukumaari॥

Ab Sandeh Chhaandi Kachhu Moson,
Hai Saugandh Nahin Chhal Toson॥

Karat Ved-Vid Brahma Jaanahu,
Vachan Mor Yah Saacha Maanahu॥

Taji Sankoch Kahahu Nij Ichchha,
Dehaun Main Manmaani Bhiksha॥

Suni Brahma Ki Madhuri Baani,
Mukh Son Kachhu Musukaay Bhavaani॥

Boli Tum Ka Kahahu Vidhaata,
Tum To Jag Ke Srashtaadhaata॥

Mam Kaamana Gupt Nahin Tonson,
Kahavaava Chaahahu Ka Monson॥

Daksh Yagya Mahan Marati Baara,
Shambhunath Puni Hohin Hamaara॥

So Ab Milahin Mohin Man Bhaaye,
Kahi Tathaastu Vidhi Dhaam Sidhaaye॥

Tab Girija Shankar Tav Bhayu,
Phal Kaamana Sanshayo Gayu॥

Chandra-Koti Ravi-Koti Prakaasha,
Tab Aanan Mahan Karat Nivaasa॥

Maala Pustak Ankush Sohai,
Kar Mahan Apar Paash Man Mohai॥

Annapurne Sadaa-Purne,
Aj Anavagh Anant Purne॥

Kripa-Saagari Kshemankari Maa,
Bhav Vibhooti Anand Bhari Maa॥

Kamal Viloachan Vilasit Bhaale,
Devi Kaalike Chandi Karaale॥

Tum Kailaash Mahan Hai Girija,
Vilasi Anand Saath Sindhuja॥

Swarg Mahalakshmi Kahalaayi,
Martya Lok Lakshmi Pad Paayi॥

Vilasi Sab Mahan Sarva Swaroopa,
Sevat Tohin Amar-Pur Bhoopa॥

Jo Padhihahin Yah Tav Chalisa,
Phal Paaihain Shubh Saakhi Isa॥

Praat Samay Jo Jan Man Laayo,
Padhihahin Bhakti Suruchi Adhikaayo॥

Stri, Kalatra, Pati, Mitra, Putra Yut,
Parameshwar-Arth Laabh Lahin Adbhut॥

Raaj-Vimukh Ko Raaj Divaavai,
Jas Tero Jan Sujas Badhaavai॥

Paath Maha Mud Mangal Daata,
Bhakt Manovanchhit Nidhi Paata॥


॥ Doha ॥

Jo Yah Chalisa Subhag,
Padhi Navainge Maath।
Tinke Kaaj Siddh Sab,
Saakhi Kashi Naath॥

Maa Annapurna Chalisa का पाठ भक्तों को अन्नपूर्णा माता की कृपा से कभी भूख, अभाव और असंतोष से दूर रखता है।

Maa Annapurna Chalisa – FAQs

1. Maa Annapurna Chalisa क्या है?

माँ अन्नपूर्णा चालीसा देवी अन्नपूर्णा की स्तुति का पावन पाठ है, जो अन्न, पोषण, करुणा और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं।

2. माँ अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ क्यों किया जाता है?

इस चालीसा का पाठ अन्न की कमी दूर करने, आर्थिक स्थिरता, पारिवारिक सुख और कृतज्ञता भाव बढ़ाने के लिए किया जाता है।

3. अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?

शुक्रवार, पूर्णिमा, नवरात्रि या प्रातःकाल शांत वातावरण में पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

4. इस चालीसा के पाठ से क्या लाभ होते हैं?

नियमित पाठ से अन्न-समृद्धि, घर में सुख-शांति, मानसिक संतोष और माँ की कृपा प्राप्त होती है।

5. क्या महिलाएँ और बच्चे अन्नपूर्णा चालीसा पढ़ सकते हैं?

हाँ, सभी आयु वर्ग के लोग श्रद्धा के साथ इसका पाठ कर सकते हैं।

6. माँ अन्नपूर्णा चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

सामान्यतः एक बार प्रतिदिन पर्याप्त है। विशेष संकल्प के लिए 11 या 108 बार पाठ भी किया जाता है।

7. क्या इसे हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में पढ़ा जा सकता है?

हाँ, भावना के साथ हिंदी या English (Roman Hindi) दोनों में पढ़ा जा सकता है।

8. अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ कहाँ करना उचित है?

घर के पूजा स्थल, मंदिर या स्वच्छ शांत स्थान पर पाठ करना श्रेष्ठ माना जाता है।

जो भक्त प्रतिदिन Maa Annapurna Chalisa का श्रद्धा से पाठ करते हैं, उनके घर में अन्न, समृद्धि और सुख-शांति बनी रहती है।

माँ अन्नपूर्णा देवी, उनकी पूजा और अन्नपूर्णा मंदिर से संबंधित प्रमाणिक जानकारी के लिए आप Drik Panchang वेबसाइट भी देख सकते हैं।

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