Shri Chitragupt Maharaj Chalisa | श्री चित्रगुप्त चालीसा पाठ

Shri Chitragupt Maharaj Chalisa lyrics in Hindi with Bhagwan Chitragupta image

श्री चित्रगुप्त महाराज चालीसा धर्मराज यम के सचिव और कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले भगवान चित्रगुप्त जी की स्तुति का पावन पाठ है। भगवान चित्रगुप्त को न्याय, धर्म, सत्य और लेखन-ज्ञान का अधिदेवता माना जाता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ Shri Chitragupt Maharaj Chalisa का पाठ करने से कर्म दोषों की शांति, मानसिक स्पष्टता और जीवन में संतुलन की प्राप्ति होती है।

नियमपूर्वक श्री चित्रगुप्त चालीसा का पाठ करने से लेखन, शिक्षा, प्रशासन, न्याय और बौद्धिक कार्यों से जुड़े लोगों को विशेष लाभ माना जाता है। चित्रगुप्त जयंती, शनिवार अथवा प्रातःकाल इस चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी होता है। यह चालीसा मनुष्य को अपने कर्मों के प्रति सजग बनाकर धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

Shri Chitragupt Maharaj Chalisa

(श्री चित्रगुप्त चालीसा)

॥ दोहा ॥

सुमिर चित्रगुप्त ईश को, सतत नवाऊँ शीश।
ब्रह्मा विष्णु महेश सह, ऋणी भये जगदीश॥

करो कृपा करिवर वदन, जो सरस्वती सहाय।
चित्रगुप्त जस विमल यश, वंदन गुरुपद लाय॥


॥ चौपाई ॥

जय चित्रगुप्त ज्ञान रत्नाकर।
जय यमेश दिगंत उजागर॥

अज सहाय अवतरेउ गुसाईं।
कीन्हेउ काज ब्रह्म कीनाईं॥

सृष्टि सृजन हित अज मन जाँचा।
भाँति-भाँति के जीवन राँचा॥

अज की रचना मानव सुंदर।
मानव मति अज होइ निरुत्तर॥

भए प्रकट चित्रगुप्त सहाई।
धर्माधर्म गुण ज्ञान कराई॥

राचेउ धर्म, धर्म जग माहीं।
धर्म अवतार लेत तुम पाहीं॥

अहम् विवेक तुम्हीं विधाता।
निज सत्ता पा करहिं कुघाता॥

सृष्टि संतुलन के तुम स्वामी।
त्रय देवन कर शक्ति समानी॥

पाप मृत्यु जग में तुम लाए।
भय का भूत सकल जग छाए॥

महाकाल के तुम हो साक्षी।
ब्रह्महुँ मरन न जान मीनाक्षी॥

धर्म कृष्ण तुम जग उपजायो।
कर्म क्षेत्र गुण ज्ञान करायो॥

राम धर्म हित जग पग धारे।
मानव गुण सद्गुण अति प्यारे॥

विष्णु चक्र पर तुमहिं विराजे।
पालन धर्म करम शुचि साजे॥

महादेव के तुम त्रय लोचन।
प्रेरक शिव अस तांडव नर्तन॥

सावित्री पर कृपा निराली।
विद्यानिधि माँ सब जग आली॥

रमा भाल पर कर अति दाया।
श्रीनिधि अगम अकूत अगाया॥

ऊमा विच शक्ति शुचि राच्यो।
जाके बिन शिव शव जग बाच्यो॥

गुरु बृहस्पति सुरपति नाथा।
जाके कर्म गहैं तव हाथा॥

रावण कंस सकल मतवारे।
तव प्रताप सब स्वर्ग सिधारे॥

प्रथम पूज्य गणपति महदेवा।
सोउ करत तुम्हारी सेवा॥

ऋद्धि सिद्धि पाय द्वै नारी।
विघ्न हरण शुभ काज संवारी॥

व्यास चहइ रच वेद पुराना।
गणपति लिपिबद्ध हित मन ठाना॥

पोथी मसि शुचि लेखनी दीन्हा।
अक्षर देय जगत कृत कीन्हा॥

लेखनि मसि सह कागद कोरा।
तव प्रताप अजु जगत मझोरा॥

विद्या विनय पराक्रम भारी।
तुम आधार जगत आभारी॥

द्वादश पूत जगत अस लाए।
राशि चक्र आधार सुहाए॥

जस पूता तस राशि रचाना।
ज्योतिष के तुम जनक महाना॥

तिथि लगन होरा दिग्दर्शन।
चारि अष्ट चित्रांश सुदर्शन॥

राशि नखत जो जातक धारे।
धर्म करम फल तुमहिं अधारे॥

राम कृष्ण गुरु वर गृह जाई।
प्रथम गुरु महिमा गुण गाई॥

श्री गणेश तव बंदन कीना।
कर्म अकर्म तुमहिं आधीना॥

देववृत जप तप व्रत कीन्हा।
इच्छा मृत्यु परम वर दीन्हा॥

धर्महीन सौदास कुराजा।
तप तुम्हार बैकुंठ विराजा॥

हरि पद दीन्ह धर्म हरि नामा।
कायस्थ परिजन परम पितामा॥

शूर सुयशमा बन जामाता।
क्षत्रिय विप्र सकल आदाता॥

जय जय चित्रगुप्त गुसाईं।
गुरुवर गुरु पद पाय सहाई॥

जो शत पाठ करै चालीसा।
जन्म-मरण दुःख कटै कलेसा॥

विनय करैं कुलदीप सुवेशा।
राख पिता सम नेह हमेशा॥


॥ दोहा ॥

ज्ञान कलम, मसि सरस्वती, अंबर है मसिपात्र।
कालचक्र की पुस्तिका, सदा रखे दंडास्त्र॥

पाप-पुण्य लेखा करण, धार्यो चित्र स्वरूप।
सृष्टि-संतुलन स्वामी सदा, स्वर्ग-नरक कर भूप॥


॥ इति श्री चित्रगुप्त चालीसा समाप्त ॥

❓ Shri Chitragupt Maharaj Chalisa – FAQs

1. Shri Chitragupt Maharaj Chalisa क्या है?

श्री चित्रगुप्त महाराज चालीसा भगवान चित्रगुप्त जी की स्तुति का पावन पाठ है। भगवान चित्रगुप्त को कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले देवता और न्याय के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।


2. चित्रगुप्त महाराज चालीसा का पाठ क्यों किया जाता है?

इस चालीसा का पाठ कर्म दोषों की शांति, न्याय की प्राप्ति, मानसिक स्पष्टता और जीवन में धर्म-पथ पर अग्रसर होने के लिए किया जाता है।


3. चित्रगुप्त चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?

चित्रगुप्त चालीसा का पाठ चित्रगुप्त जयंती, शनिवार, या प्रातःकाल शांत वातावरण में करना अत्यंत शुभ माना जाता है।


4. श्री चित्रगुप्त चालीसा के पाठ से क्या लाभ होते हैं?

नियमित पाठ से कर्मों की शुद्धि, नकारात्मक प्रभावों में कमी, बुद्धि-विवेक में वृद्धि और ईश्वरीय कृपा की अनुभूति होती है।


5. कौन-कौन लोग चित्रगुप्त महाराज चालीसा का पाठ कर सकते हैं?

लेखन, शिक्षा, न्याय, प्रशासन, लेखा-जोखा, व्यवसाय और बौद्धिक कार्यों से जुड़े सभी लोग इस चालीसा का पाठ कर सकते हैं।


6. चित्रगुप्त चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

सामान्यतः एक बार प्रतिदिन पाठ पर्याप्त होता है। विशेष संकल्प या साधना के लिए 11 या 108 बार पाठ भी किया जाता है।


7. क्या श्री चित्रगुप्त चालीसा को हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में पढ़ा जा सकता है?

हाँ, इसे हिंदी या English (Roman Hindi) दोनों में पढ़ा जा सकता है। श्रद्धा और भावना को मुख्य माना जाता है।


8. चित्रगुप्त महाराज चालीसा का पाठ कहाँ करना श्रेष्ठ है?

घर के पूजा स्थान, मंदिर या किसी शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठकर पाठ करना श्रेष्ठ माना जाता है।

भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज, उनकी कथा और चित्रगुप्त जयंती से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी के लिए आप Drik Panchang वेबसाइट भी देख सकते हैं।

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