Rani Sati Dadi Chalisa | राणी सती दादी चालीसा

Rani Sati Dadi Chalisa lyrics in Hindi with Shri Rani Sati Dadi image

राणी सती दादी चालीसा राजस्थान एवं मारवाड़ क्षेत्र में पूज्य मां राणी सती दादी की महिमा का पावन पाठ है। राणी सती दादी को साहस, पतिव्रता धर्म, मातृशक्ति और अखंड आस्था का प्रतीक माना जाता है। भक्तजन श्रद्धा भाव से Rani Sati Dadi Chalisa का पाठ कर परिवार की सुख-शांति, संकट निवारण और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

नियमपूर्वक राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से जीवन में नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है, भय दूर होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। विशेष रूप से नवरात्रि, अमावस्या या शुक्रवार के दिन मां राणी सती दादी की पूजा के साथ इस चालीसा का पाठ करने से भक्तों को विशेष कृपा और संरक्षण प्राप्त होता है।

Rani Sati Dadi Chalisa पाठ करने की विधि

Shri Rani Sati Dadi Chalisa Lyrics in Hindi (श्री राणी सती दादी चालीसा)

॥ दोहा ॥

श्री गुरु पद पंकज नमन,
दूषित भाव सुधार।
राणी सती सू विमल यश,
वरणौं मति अनुसार॥

काम, क्रोध, मद, लोभ में,
भरम रह्यो संसार।
शरण गहि करुणामयी,
सुख-संपत्ति आधार॥


॥ चौपाई ॥

नमो नमो श्री सती भवानी।
जग विख्यात सभी मन मानी॥

नमो नमो संकट कू हरनी।
मनवांछित पूरण सब करनी॥

नमो नमो जय जय जगदंबा।
भक्तन काज न होय विलंबा॥

नमो नमो जय जय जगतारिणी।
सेवक जन के काज सुधारिणी॥

दिव्य रूप सिर चूनर सोहे।
जगमगात कुंडल मन मोहे॥

मांग सिंदूर सुकाजर टीकी।
गजमुक्ता नथ सुंदर नीकी॥

गल वैजयंती माल विराजे।
सोलहूँ साज बदन पे साजे॥

धन्य भाग गुरसामल जी को।
महम डोकवा जन्म सती को॥

तनधनदास पति वर पाए।
आनंद मंगल होत सवाए॥

जालीराम पुत्र-वधू होके।
वंश पवित्र किया कुल ढोके॥

पति देव रण माँय जुझारे।
सती रूप हो शत्रु संहारे॥

पति संग ले सद्गति पाई।
सुर मन हर्ष सुमन बरसाई॥

धन्य भाग उस राणा जी को।
सुफल हुआ कर दरस सती को॥

विक्रम तेरह सौ बावन कूं।
मंगसिर बदी नौमी मंगल कूं॥

नगर झुंझुनूं प्रगटी माता।
जग विख्यात सुमंगल दाता॥

दूर देश के यात्री आवैं।
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावैं॥

उछंग-उछंगते हैं आनंद से।
पूजा तन-मन-धन श्रीफल से॥

जात जड़ूला रात जगावैं।
बांसल गोत्री सभी मनावैं॥

पूजन पाठ पठन द्विज करते।
वेद ध्वनि मुख से उच्चरते॥

नाना भाँति-भाँति पकवाना।
विप्र जनों को न्योत जिमाना॥

श्रद्धा भक्ति सहित हरसाते।
सेवक मनवांछित फल पाते॥

जय जयकार करे नर-नारी।
श्री राणी सतीजी की बलिहारी॥

द्वार कोट नित नौबत बाजे।
होत सिंगार साज अति साजे॥

रत्न सिंहासन झलके नीको।
पल-पल छिन-छिन ध्यान सती को॥

भाद्र कृष्ण मावस दिन लीला।
भरता मेला रंग-रंगीला॥

भक्त सुजन की सकल भीड़ है।
दर्शन के हित नहीं छीड़ है॥

अटल भुवन में ज्योति तिहारी।
तेज पुंज जगमग उजियारी॥

आदि शक्ति में मिली ज्योति है।
देश-देश में भवन भौति है॥

नाना विधि से पूजा करते।
निशदिन ध्यान तिहारो धरते॥

कष्ट निवारिणी दुख नासिनी।
करुणामयी झुंझुनूं वासिनी॥

प्रथम सती नारायणी नामा।
द्वादश और हुई इस धामा॥

तिहुँ लोक में कीरति छाई।
राणी सतीजी की फिरी दुहाई॥

सुबह-शाम आरती उतारैं।
नौबत घंटा ध्वनि टंकारैं॥

राग छत्तीसों बाजा बाजे।
तेरहूँ मंड सुंदर अति साजे॥

त्राहि-त्राहि मैं शरण आपकी।
पूरी मन की आस दास की॥

मुझको एक भरोसो तेरो।
आन सुधारो मैया कारज मेरो॥

पूजा जप तप नेम न जानू।
निर्मल महिमा नित्य बखानू॥

भक्तन की आपत्ति हर लीनी।
पुत्र-पौत्र संपत्ति वर दीनी॥

पढ़े चालीसा जो शत बारा।
होय सिद्ध मन माहिं विचारा॥

टिबरिया ली शरण तिहारी।
क्षमा करो सब चूक हमारी॥


॥ दोहा ॥

दुख आपद विपदा हरण,
जन-जीवन आधार।
बिगड़ी बात सुधारियो,
सब अपराध बिसार॥


॥ मात श्री राणी सतीजी की जय ॥

❓ Rani Sati Dadi Chalisa FAQs

1. Rani Sati Dadi Chalisa क्या है?

Rani Sati Dadi Chalisa मां राणी सती दादी की स्तुति का पावन पाठ है। इसका पाठ करने से भक्तों को संकटों से रक्षा, मानसिक शांति और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है।


2. राणी सती दादी चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?

राणी सती दादी चालीसा का पाठ शुक्रवार, अमावस्या, नवरात्रि या किसी भी शुभ दिन श्रद्धा के साथ किया जा सकता है। प्रातः या संध्या समय पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है।


3. राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?

इस चालीसा के नियमित पाठ से कष्ट निवारण, भय से मुक्ति, घर में सुख-शांति, और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।


4. क्या महिलाएँ राणी सती दादी चालीसा का पाठ कर सकती हैं?

हाँ, महिलाएँ पूर्ण श्रद्धा और नियम के साथ राणी सती दादी चालीसा का पाठ कर सकती हैं। यह पाठ विशेष रूप से गृहस्थ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।


5. राणी सती दादी चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

सामान्यतः एक बार प्रतिदिन या शुक्रवार के दिन पाठ पर्याप्त होता है। विशेष संकल्प के लिए 11 या 108 बार पाठ भी किया जाता है।


6. राणी सती दादी चालीसा का पाठ कहाँ करना श्रेष्ठ होता है?

घर के पूजा स्थल या किसी शांत स्थान पर दीपक जलाकर पाठ करना उत्तम माना जाता है। झुंझुनूं स्थित राणी सती दादी मंदिर में पाठ करने का विशेष महत्व है।


7. राणी सती दादी चालीसा के साथ क्या अर्पण करना चाहिए?

चालीसा पाठ के समय नारियल, चुनरी, दीपक, मिश्री और फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।


8. क्या राणी सती दादी चालीसा मनोकामना पूर्ति में सहायक है?

हाँ, श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया राणी सती दादी चालीसा का पाठ भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति में सहायक माना जाता है।

राणी सती दादी से संबंधित तिथियाँ, व्रत और पर्वों की जानकारी के लिए आप Drik Panchang वेबसाइट भी देख सकते हैं।

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