बृहस्पति देव चालीसा हिंदू धर्म में गुरु ग्रह के अधिदेव देवगुरु बृहस्पति की स्तुति का एक अत्यंत पावन पाठ है। बृहस्पति देव को ज्ञान, बुद्धि, धर्म, वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति और भाग्य का कारक माना जाता है। जिन जातकों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर होता है या गुरु दोष होता है, उनके लिए श्री बृहस्पति देव चालीसा का नियमित पाठ अत्यंत लाभकारी माना गया है।
गुरुवार के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक बृहस्पति देव चालीसा का पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, धन-समृद्धि बढ़ती है और शिक्षा व करियर में सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं। इस पवित्र चालीसा के माध्यम से भक्त देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त कर मानसिक शांति, सद्बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करता है।
Brihaspati Dev Chalisa का नियमित पाठ करने से गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त होती है। Brihaspati Dev Chalisa विशेष रूप से उन भक्तों के लिए लाभकारी है जो गुरु दोष से परेशान हैं। Brihaspati Dev Chalisa ज्ञान, धन और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।
Brihaspati Dev Chalisa गुरु ग्रह के अधिदेव देवगुरु बृहस्पति की स्तुति का पावन पाठ है, जिसे श्रद्धा के साथ पढ़ने से ज्ञान, बुद्धि और भाग्य में वृद्धि होती है।
Brihaspati Dev Chalisa Lyrics in Hindi (श्री बृहस्पति देव चालीसा)
॥ दोहा ॥
प्रणवाऊँ प्रथम गुरु चरण, बुद्धि ज्ञान गुन खान।
श्री गणेश शारदा सहित, बसो हृदय में आन॥
अज्ञानी मति मंद मैं, हैं गुरुस्वामी सुजान।
दोषों से मैं भरा हुआ, तुम हो कृपा निधान॥
॥ चौपाई ॥
जय नारायण जय निखिलेश्वर।
विश्व प्रसिद्ध अखिल तंत्रेश्वर॥
यंत्र-मंत्र विज्ञान के ज्ञाता।
भारत भू के प्रेम प्रणेता॥
जब-जब हुई धरम की हानि।
सिद्धाश्रम ने पठाए ज्ञानी॥
सच्चिदानंद गुरु के प्यारे।
सिद्धाश्रम से आप पधारे॥
उच्च कोटि के ऋषि-मुनि स्वेच्छा।
करन हेतु धरम की रक्षा॥
अबकी बार आपकी बारी।
त्राहि-त्राहि है धरा पुकारी॥
मरुधर प्रांत खरंटिया ग्रामा।
मुल्तानचंद पिता कर नामा॥
शेषशायी सपने में आए।
माता को दर्शन दिखलाए॥
रूपादेवी मातु अति धार्मिक।
जन्म भयो शुभ इक्कीस तारीख॥
जन्म दिवस तिथि शुभ साधक की।
पूजा करते आराधक की॥
जन्म वृत्तांत सुनाए नवीना।
मंत्र नारायण नाम कर दीना॥
नाम नारायण भव भय हारी।
सिद्ध योगी मानव तन धारी॥
ऋषिवर ब्रह्म तत्व से ऊर्जित।
आत्म स्वरूप गुरु गौरवान्वित॥
एक बार संग सखा भवन में।
करि स्नान लगे चिंतन में॥
चिंतन करत समाधि लागी।
सुध-बुध हीन भए अनुरागी॥
पूर्ण करि संसार की रीति।
शंकर जैसे बने गृहस्थी॥
अद्भुत संगम प्रभु माया का।
अवलोकन है विधि छाया का॥
युग-युग से भव बंधन रीती।
जहाँ नारायण वहीं भगवती॥
सांसारिक मन हुए अति ग्लानी।
तब हिमगिरि गमन की ठानी॥
अठारह वर्ष हिमालय घूमे।
सर्व सिद्धियाँ गुरु पग चूमें॥
त्याग अटल सिद्धाश्रम आसन।
कर्मभूमि आए नारायण॥
धरा गगन ब्रह्मांड में गूंजी।
जय गुरुदेव साधना पूंजी॥
सर्व धर्महित शिविर पुरोधा।
कर्मक्षेत्र के अतुलित योद्धा॥
हृदय विशाल शास्त्र भंडारा।
भारत का भौतिक उजियारा॥
एक सौ छप्पन ग्रंथ रचयिता।
सिद्ध साधक विश्व विजेता॥
प्रिय लेखक प्रिय गूढ़ प्रवक्ता।
भूत-भविष्य के आप विधाता॥
आयुर्वेद ज्योतिष के सागर।
षोडश कला युक्त परमेश्वर॥
रत्न पारखी विघ्न हरंता।
सन्यासी अनन्यतम संता॥
अद्भुत चमत्कार दिखलाया।
पारद का शिवलिंग बनाया॥
वेद पुराण शास्त्र सब गाते।
पारेश्वर दुर्लभ कहलाते॥
पूजा कर नित ध्यान लगावे।
वो नर सिद्धाश्रम में जावे॥
चारों वेद कंठ में धारे।
पूजनीय जन-जन के प्यारे॥
चिंतन करत मंत्र जब गाएं।
विश्वामित्र वशिष्ठ बुलाएं॥
मंत्र “नमो नारायण” सांचा।
ध्यावत भागत भूत-पिशाचा॥
प्रातःकाल करहि निखिलायन।
मन प्रसन्न नित तेजस्वी तन॥
निर्मल मन से जो भी ध्यावे।
ऋद्धि-सिद्धि सुख-संपत्ति पावे॥
पाठ करहि नित जो चालीसा।
शांति प्रदान करहि योगीसा॥
अष्टोत्तर शत पाठ करत जो।
सर्व सिद्धियाँ पावत जन सो॥
श्री गुरु चरण की धारा।
सिद्धाश्रम साधक परिवारा॥
जय-जय-जय आनंद के स्वामी।
बारंबार नमामि नमामि॥
अधिक जानकारी के लिए आप गुरु ग्रह से संबंधित विवरण Drik Panchang वेबसाइट पर भी देख सकते हैं।
❓ Brihaspati Dev Chalisa FAQs
1. Brihaspati Dev Chalisa क्या है?
बृहस्पति देव चालीसा गुरु ग्रह के अधिदेव बृहस्पति भगवान की स्तुति का पावन पाठ है। इसका नियमित पाठ ज्ञान, विवेक, धन, विवाह सुख और भाग्य में वृद्धि करता है।
2. बृहस्पति देव चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?
बृहस्पति देव चालीसा का पाठ गुरुवार के दिन विशेष फलदायी माना जाता है। इसे प्रातःकाल या संध्या समय पीले वस्त्र धारण कर करना श्रेष्ठ होता है।
3. गुरु ग्रह कमजोर हो तो क्या बृहस्पति देव चालीसा लाभ देती है?
हाँ, जिन जातकों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर या पीड़ित हो, उनके लिए बृहस्पति देव चालीसा का नियमित पाठ गुरु दोष शांति में सहायक माना जाता है।
4. बृहस्पति देव चालीसा का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
सामान्यतः प्रतिदिन या प्रत्येक गुरुवार को एक बार पाठ पर्याप्त होता है। विशेष मनोकामना के लिए 108 बार या 16 गुरुवार का संकल्प भी किया जाता है।
5. बृहस्पति देव चालीसा के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इस चालीसा के पाठ से ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि, धन-समृद्धि, वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
6. क्या महिलाएँ बृहस्पति देव चालीसा का पाठ कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएँ पूर्ण श्रद्धा और नियम के साथ बृहस्पति देव चालीसा का पाठ कर सकती हैं। इससे गृहस्थ जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता आती है।
7. बृहस्पति देव चालीसा के साथ कौन सा मंत्र जपना चाहिए?
चालीसा के साथ “ॐ नमो नारायणाय” या गुरु बीज मंत्र का जप करने से पाठ का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।
8. बृहस्पति देव चालीसा का पाठ कहाँ करना श्रेष्ठ होता है?
पाठ घर के पूजा स्थल या शांत स्थान पर करना उत्तम होता है। पीले फूल, चने की दाल और हल्दी अर्पित करना शुभ माना जाता है।



