माँ काली चालीसा – अरि मद मान मिटावन हारी (Maa Kali Chalisa)

Maa Kali Chalisa Lyrics in Hindi and English

माँ काली चालीसा देवी काली को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है, जिन्हें शक्ति, साहस और संहार की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। “अरि मद मान मिटावन हारी” माँ काली के उस स्वरूप का वर्णन करता है, जो अहंकार, भय और नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ माँ काली चालीसा का पाठ करने से भक्त को शत्रु भय से मुक्ति, मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि माँ काली की कृपा से जीवन में आने वाले बड़े से बड़े संकट भी दूर हो जाते हैं और साधक को निर्भयता व आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है।

Maa Kali Chalisa देवी काली को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है, जिसका पाठ भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है।

Maa Kali Chalisa का नियमित पाठ करने से साधक को मानसिक शक्ति, साहस और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा प्राप्त होती है।

Maa Kali Chalisa Lyrics in Hindi I माँ काली चालीसा

॥ दोहा ॥

जय काली कलिमलहरण,
महिमा अगम अपार।
महिषमर्दिनी कालिका,
देहु अभय अपार॥

॥ चौपाई ॥

अरि मद मान मिटावन हारी।
मुण्डमाल गल सोहत प्यारी॥

अष्टभुजी सुखदायक माता।
दुष्टदलन जग में विख्याता॥

भाल विशाल मुकुट छवि छाजै।
कर में शीश शत्रु का साजै॥

दूजे हाथ लिए मधु प्याला।
हाथ तीसरे सोहत भाला॥

चौथे खप्पर, खड्ग कर पांचे।
छठे त्रिशूल शत्रु बल जांचे॥

सप्तम कर दमनकत असि प्यारी।
शोभा अद्भुत मात तुम्हारी॥

अष्टम कर भक्तन वर दाता।
जग मनहरण रूप ये माता॥

भक्तन में अनुरक्त भवानी।
निशदिन रटें ऋषि-मुनि ज्ञानी॥

महाशक्ति अति प्रबल पुनीता।
तू ही काली, तू ही सीता॥

पतित तारिणी हे जग पालक।
कल्याणी पापी कुल घालक॥

शेष सुरेश न पावत पारा।
गौरी रूप धर्यो इक बारा॥

तुम समान दाता नहिं दूजा।
विधिवत करें भक्तजन पूजा॥

रूप भयंकर जब तुम धारा।
दुष्टदलन कीन्हेहु संहारा॥

नाम अनेकन मात तुम्हारे।
भक्तजनों के संकट टारे॥

कलि के कष्ट कलेशन हरनी।
भव भय मोचन मंगल करनी॥

महिमा अगम वेद यश गावैं।
नारद शारद पार न पावैं॥

भू पर भार बढ़्यो जब भारी।
तब तब तुम प्रकटीं महतारी॥

आदि अनादि अभय वरदाता।
विश्वविदित भव संकट त्राता॥

कुसमय नाम तुम्हारो लीन्हा।
उसको सदा अभय वर दीन्हा॥

ध्यान धरें श्रुति शेष सुरेशा।
काल रूप लखि तुमरो भेषा॥

कलुआ भैरों संग तुम्हारे।
अरि हित रूप भयानक धारे॥

सेवक लांगुर रहत अगारी।
चौसठ जोगन आज्ञाकारी॥

त्रेता में रघुवर हित आई।
दशकंधर की सैन नसाई॥

खेला रण का खेल निराला।
भरा मांस-मज्जा से प्याला॥

रौद्र रूप लखि दानव भागे।
कियौ गवन भवन निज त्यागे॥

तब ऐसौ तामस चढ़ आयो।
स्वजन विजन को भेद भुलायो॥

ये बालक लखि शंकर आए।
राह रोक चरणन में धाए॥

तब मुख जीभ निकर जो आई।
यही रूप प्रचलित है माई॥

बाढ़्यो महिषासुर मद भारी।
पीड़ित किए सकल नर-नारी॥

करुण पुकार सुनी भक्तन की।
पीर मिटावन हित जन-जन की॥

तब प्रगटी निज सैन समेता।
नाम पड़ा माँ महिष विजेता॥

शुंभ निशुंभ हने छन माहीं।
तुम सम जग दूसर कोउ नाहीं॥

मान मथनहारी खल दल के।
सदा सहायक भक्त विकल के॥

दीन विहीन करैं नित सेवा।
पावैं मनवांछित फल मेवा॥

संकट में जो सुमिरन करहीं।
उनके कष्ट मातु तुम हरहीं॥

प्रेम सहित जो कीरति गावैं।
भव बंधन सों मुक्ति पावैं॥

काली चालीसा जो पढ़हीं।
स्वर्गलोक बिनु बंधन चढ़हीं॥

दया दृष्टि हेरौ जगदम्बा।
केहि कारण माँ कियौ विलम्बा॥

करहु मातु भक्तन रखवाली।
जयति जयति काली कंकाली॥

सेवक दीन अनाथ अनारी।
भक्तिभाव युति शरण तुम्हारी॥

॥ दोहा ॥

प्रेम सहित जो करे,
काली चालीसा पाठ।
तिनकी पूरन कामना,
होय सकल जग ठाठ॥

Maa Kali Chalisa Lyrics in English

॥ Doha ॥

Jaikali Kalimalharan,
Mahima Agam Apaar।
Mahishmardini Kalika,
Dehu Abhay Apaar॥

॥ Chaupai ॥

Ari Mad Maan Mitavan Haari।
Mundamaal Gal Sohat Pyari॥

Ashtabhuji Sukhadayak Mata।
Dushtadalan Jag Mein Vikhyata॥

Bhaal Vishal Mukut Chhavi Chhajai।
Kar Mein Shish Shatru Ka Sajai॥

Dooje Haath Liye Madhu Pyala।
Haath Tisre Sohat Bhala॥

Chauthe Khappar, Khadg Kar Paanche।
Chhathe Trishool Shatru Bal Jaanche॥

Saptam Kar Damanakat Asi Pyari।
Shobha Adbhut Maat Tumhari॥

Ashtam Kar Bhaktan Var Data।
Jag Manharan Roop Ye Mata॥

Bhaktan Mein Anurakt Bhavani।
Nishdin Raten Rishi-Muni Gyani॥

Mahashakti Ati Prabal Punita।
Tu Hi Kali, Tu Hi Sita॥

Patit Tarini He Jag Palak।
Kalyani Papi Kul Ghalak॥

Shesh Suresh Na Pavat Paara।
Gauri Roop Dharyo Ik Baara॥

Tum Saman Data Nahin Dooja।
Vidhivat Karen Bhaktajan Pooja॥

Roop Bhayankar Jab Tum Dhara।
Dushtadalan Kinhehu Sanhara॥

Naam Anekan Maat Tumhare।
Bhaktajanon Ke Sankat Taare॥

Kali Ke Kasht Kaleshan Harani।
Bhav Bhaya Mochan Mangal Karani॥

Mahima Agam Ved Yash Gavain।
Narad Sharad Paar Na Pavain॥

Bhoo Par Bhaar Badhyo Jab Bhari।
Tab Tab Tum Prakatin Mahatari॥

Aadi Anadi Abhay Vardata।
Vishwavidit Bhav Sankat Trata॥

Kusamay Naam Tumharo Linha।
Usko Sada Abhay Var Dinha॥

Dhyan Dharen Shruti Shesh Suresha।
Kaal Roop Lakhi Tumharo Bhesha॥

Kalua Bhairon Sang Tumhare।
Ari Hit Roop Bhayanak Dhaare॥

Sevak Laangur Rahat Agaari।
Chausath Jogan Aagyakari॥

Treta Mein Raghuvar Hit Aai।
Dashkandhar Ki Sain Nasai॥

Khela Ran Ka Khel Nirala।
Bhara Maans-Majja Se Pyala॥

Raudra Roop Lakhi Daanav Bhaage।
Kiyau Gavan Bhavan Nij Tyaage॥

Tab Aisau Taamas Chadh Aayo।
Swajan Vijan Ko Bhed Bhulayo॥

Ye Balak Lakhi Shankar Aaye।
Raah Rok Charanan Mein Dhaaye॥

Tab Mukh Jeebh Nikar Jo Aai।
Yahi Roop Prachalit Hai Maai॥

Badhyo Mahishasur Mad Bhaari।
Peedit Kiye Sakal Nar-Nari॥

Karun Pukar Suni Bhaktan Ki।
Peer Mitavan Hit Jan-Jan Ki॥

Tab Pragati Nij Sain Sameta।
Naam Pada Maa Mahish Vijeta॥

Shumbh Nishumbh Hane Chhan Maahin।
Tum Sam Jag Doosar Kou Naahin॥

Maan Mathanhari Khal Dal Ke।
Sada Sahayak Bhakt Vikal Ke॥

Deen Vihin Karen Nit Seva।
Paavain Manvanchhit Phal Meva॥

Sankat Mein Jo Sumiran Karahin।
Unke Kasht Maatu Tum Harahin॥

Prem Sahit Jo Kirati Gavain।
Bhav Bandhan Son Mukti Paavain॥

Kali Chalisa Jo Padhahin।
Swargalok Binu Bandhan Chadhahin॥

Daya Drishti Herau Jagdamba।
Kehi Kaaran Maa Kiyau Vilamba॥

Karahu Maatu Bhaktan Rakhavali।
Jayati Jayati Kali Kankali॥

Sevak Deen Anath Anari।
Bhaktibhav Yuti Sharan Tumhari॥

॥ Doha ॥

Prem Sahit Jo Kare,
Kali Chalisa Paath।
Tinki Pooran Kaamana,
Hoy Sakal Jag Thaath॥

श्रद्धा और विश्वास के साथ Maa Kali Chalisa का जाप करने से माँ काली की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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Frequently Asked Questions (FAQs)

माँ काली चालीसा का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?

माँ काली चालीसा का श्रद्धा के साथ पाठ करने से भय, नकारात्मक शक्तियाँ और शत्रु बाधाएँ दूर होती हैं। इससे आत्मबल, साहस और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

माँ काली चालीसा का पाठ कब करना शुभ माना जाता है?

माँ काली चालीसा का पाठ अमावस्या, मंगलवार, शनिवार या नवरात्रि के दिनों में विशेष रूप से शुभ माना जाता है। प्रातःकाल या रात्रि समय इसका पाठ किया जा सकता है।

क्या माँ काली चालीसा का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है?

हाँ, माँ काली चालीसा का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है। नियमित पाठ से माँ काली की कृपा बनी रहती है और साधक को निर्भयता प्राप्त होती है।

माँ काली चालीसा किन भक्तों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है?

माँ काली चालीसा उन भक्तों के लिए विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है जो भय, शत्रु बाधा, मानसिक अशांति या जीवन के कठिन संकटों से मुक्ति चाहते हैं।

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